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नहीं चलीं एंबुलेंस, मरीज परेशान

Wed, 25 Sep 2019 01:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Sep 2019 01:12 AM IST
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Ambulance did not go, patient upset
जिला अस्पताल परिसर में हड़ताल के चलते खड़ी एंबुलेंस। - फोटो : UNNAO
उन्नाव। तीन माह से भुगतान न मिलने पर 108 व 102 एंबुलेंस चालकों की हड़ताल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल वापस लेने के लिए स्वास्थ्य अधिकारी चालकों से मिन्नतें करते रहे लेकिन मांगे पूरी न होने तक उन्होंने हड़ताल वापस लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई। सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीज ठेलिया व ई-रिक्शा से पहुंचे।
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सोमवार सुबह से शुरू हुई एंबुलेंस चालकों की
हड़ताल मंगलवार शाम तक जारी रही। जिला अस्पताल परिसर में चालक सेवा प्रदाता कंपनी के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। चालकों की हड़ताल खत्म कराने के लिए सीएमओ डा. केपी सिंह स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने हड़ताल पर बैठे चालकों से बात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि 72 घंटों में उनकी शिकायतों का निस्तारण हो जाएगा। हालांकि लिखित आश्वासन के बिना उन्होंने हड़ताल वापस लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में सीएमओ लौट गए। चालकों की हड़ताल की वजह से अस्पतालों में मरीज इधर उधर भटकते रहे। एंबुलेंस के लिए लोगों ने जब 108 व 102 नंबर मिलाया तो उन्हें कोई उत्तर भी नहीं मिला। सड़क हादसों में घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल लाया गया। लखनऊ कानपुर हाईवे पर राष्ट्रीय राजमार्ग की एंबुलेंस से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
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इनसेट
घायलों की बिगड़ी हालत
सोमवार रात लखनऊ कानपुर हाईवे पर ट्रक की टक्कर से अचलगंज कसबा निवासी रवी (18) व उसका दोस्त राकेश (22) ट्रक की टक्कर से घायल हो गए थे। राहगीरों ने एंबुलेंस के लिए फोन मिलाया लेकिन कॉल सेंटर में फोन नहीं उठा। ऐसे में टेंपो में लादकर उन्हें अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया। हालांकि एंबुलेंस न मिलने की वजह से वह एक घंटे तक स्ट्रेचर पर लेटे रहे। अचलगंज से परिजनों के अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें प्राइवेट एंबुलेंस से कानपुर भेजा गया।
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सीएचसी, पीएचसी में भटके मरीज
एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीज इधर उधर भटकने को मजबूर हुए। अस्पताल तक पहुंचने के लिए उन्हें ठेलिया व ई रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। इसके बदले उन्हें तीन सौ से पांच सौ रुपये तक चुकाने पड़े। सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिला को ई-रिक्शा से अस्पताल लाया गया। बिछिया में युवक गर्भवती पत्नी को बाइक से लेकर अस्पताल पहुंचा।
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