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Unnao News: बच्चे की बलि मामले में सभी नौ आरोपी बरी

Tue, 02 Jul 2024 04:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2024 04:19 AM IST
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All nine accused acquitted in child sacrifice case
उन्नाव। विवेचना में लापरवाही से पांच साल पहले हुए बच्चे की बलि देने के चर्चित मामले में अपर जिला जज प्रथम कोर्ट ने दो महिलाओं समेत सभी नौ आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इस मामले में पुलिस पर विवेचना में लापरवाही सामने आई है।
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माखी थाना क्षेत्र के ग्राम परमनी में तीन अप्रैल 2019 को आठ वर्षीय आदर्श को अगवा कर उसकी हत्या कर दी गई थी। तालाब किनारे तांत्रिक के कहने के अनुसार पूजा पाठ के बाद बलि देने की बात सामने आई थी। पिता कन्हैयालाल में बेटे के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अगले दिन गांव के नाई ने तालाब में शव देख पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने तालाब में कीचड़ से सना हुआ बच्चे का शव निकालकर उसका पोस्टमार्टम कराया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोर की गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि हुई थी।
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गांव वालों ने आरोपी सुरेंद्र को बच्चे को खिलाते व तालाब की ओर ले जाते देखा था। बाद में जब पुलिस ने सुरेंद्र से पूछताछ की थी तो उसने बताया था कि उसके पिता विश्राम मां के इलाज से आर्थिक रूप से परेशान हो गए थे। एक दिन पिता विश्राम को एक साधु ने झांसा दिया कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे की पूजा पाठ के बाद बलि दी जाए तो बीमारी से छुटकारा और खजाना मिलेगा।
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इस पर विश्राम व सुरेंद्र ने अपने परिवार की रानी, सुखबीर, गोबर्धन, छेदीलाल, छेदाना, राहुल व नरेंद्र के साथ साधु के झांसे में आकर घटना को अंजाम दिया था। पूरी विवेचना में आज तक पुलिस बाबा को तलाश नहीं कर सकी। इस केस में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता व बचाव पक्ष से अधिवक्ता कर्ण बहादुर सिंह ने अपने साक्ष्यों एवं गवाहों को पेश किया। उन्होंने मृतक बच्चे की हत्या के आरोप में अपने मुवक्किलों को बिल्कुल ही निर्दोष बताया और इसके समर्थन में नजीर भी पेश की।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष के जरिए पेश किए गए फोटोग्राफ एवं चार्जशीट को भी भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार ग्राह्य बनने की शर्तों का अनुपालन न करने का तथ्य रखा। इसके अलावा अन्य पेश किए गए सबूतों को भी अपर्याप्त मानते हुए अपर जिला जज प्रथम मो. असलम सिद्दकी की अदालत ने सभी दोषियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।
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