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लोगों को प्रेरणा देते रहेंगे महानायकों के बलिदान
Unnao
Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। रविवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सभागार में सांस्कृतिक संगठन आंदोलन व जन एकता मुहिम के संयुक्त तत्वावधान में इतिहास और सांप्रदायिक सौहार्द विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान इतिहासविद व जनकर्मी प्रो. रायबहादुर को श्रद्धांजलि दी गई।
आंदोलन के दिनेश प्रियमन ने प्रो. रायबहादुर के चित्र पर पुष्पांजलि व दीप प्रज्ज्वलन के साथ गोष्ठी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रो. रायबहादुर को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए स्थानीय प्रेरणा पुरुष बताया। जनकर्मी व राजनीतिक विश्लेषक रामकिशोर बाजपेई ने विषय विश्लेषण करते हुए ब्रिटिश साम्राज्यवाद को दोषी ठहराया। उनका मानना था कि जाति और वर्ग अलग अवधारणा है। सांप्रदायिकता से निपटने के लिए भारतीय समाज की व्यापक समझ जरूरी है। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष व इतिहासविद रामकृष्ण तैलंग ने भारतीय इतिहास की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उसे इतिहास की विडंबनाओं का कालचक्र घोषित किया। उनका मानना था कि प्रगतिशील समाज निर्माण में सांप्रदायिकता सबसे बड़ी बाधा है। सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महानायकों के बलिदान हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। अंत में प्रश्नमंच रखा गया जिसमें मुहिम के पीयूष, नसीर अहमद, संजीव्र मनीष व रघुराज सिंह मगन व अश्विनी कुमार शर्मा ने भाग लिया। संचालन संयोजक नसीर अहमद ने किया। इस मौके पर सुशील, मयंकालोक, जंगबहादुर सिंह, नागेन्द्र सिंह, दिलीप, जब्बार अकरम, गिरिजेश, अजय शास्त्री, दिनेश उन्नावी, राधाकृष्ण साहू व विजय मिश्र आदि उपस्थित रहे।
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आंदोलन के दिनेश प्रियमन ने प्रो. रायबहादुर के चित्र पर पुष्पांजलि व दीप प्रज्ज्वलन के साथ गोष्ठी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रो. रायबहादुर को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए स्थानीय प्रेरणा पुरुष बताया। जनकर्मी व राजनीतिक विश्लेषक रामकिशोर बाजपेई ने विषय विश्लेषण करते हुए ब्रिटिश साम्राज्यवाद को दोषी ठहराया। उनका मानना था कि जाति और वर्ग अलग अवधारणा है। सांप्रदायिकता से निपटने के लिए भारतीय समाज की व्यापक समझ जरूरी है। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष व इतिहासविद रामकृष्ण तैलंग ने भारतीय इतिहास की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उसे इतिहास की विडंबनाओं का कालचक्र घोषित किया। उनका मानना था कि प्रगतिशील समाज निर्माण में सांप्रदायिकता सबसे बड़ी बाधा है। सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महानायकों के बलिदान हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। अंत में प्रश्नमंच रखा गया जिसमें मुहिम के पीयूष, नसीर अहमद, संजीव्र मनीष व रघुराज सिंह मगन व अश्विनी कुमार शर्मा ने भाग लिया। संचालन संयोजक नसीर अहमद ने किया। इस मौके पर सुशील, मयंकालोक, जंगबहादुर सिंह, नागेन्द्र सिंह, दिलीप, जब्बार अकरम, गिरिजेश, अजय शास्त्री, दिनेश उन्नावी, राधाकृष्ण साहू व विजय मिश्र आदि उपस्थित रहे।
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