{"_id":"76554","slug":"Unnao-76554-40","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिपाही के धक्का देने से बंदी का सिर फूटा, हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिपाही के धक्का देने से बंदी का सिर फूटा, हंगामा
Unnao
Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
उन्नाव। पेशी पर आए बंदी को फल दे रही उसकी मां को सिपाही ने रोका तो बंदी ने हंगामा शुरू कर दिया। तैश में सिपाही ने धक्का दिया तो बंदी के सिर में चोट लग गई। यह देख कचहरी हवालात में बंद अन्य बंदियों ने हंगामा किया। बंदी की मां ने सिपाही पर 100 रुपए घूस मांगने का आरोप लगाया। घटना की जानकारी पर एएसपी मौके पर पहुंचे। उनके मुताबिक युवक ने खुद अपना सिर पटक लिया, सिपाही ने धक्का नहीं दिया। उन्होंने घटना की जांच कराने की बात कही।
शुक्लागंज के मोहल्ला इंद्रानगर निवासी अजय उर्फ टिंकल पुत्र मस्तराम कश्यप को गंगाघाट थाना पुलिस ने दो महीने पहले एनडीपीएस में गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को उसकी एडीजे तृतीय की कोर्ट में पेशी थी। पेशी के बाद दोपहर करीब दो बजे सिपाही प्रेम सिंह यादव बंदी अजय को कचहरी हवालात लेकर जा रहा था। रास्ते में अजय को मां द्रौपदी देवी ने अंगूर देने का प्रयास किया तो सिपाही ने उसे रोक दिया। इसके बाद सिपाही ने बंदी को वाहन में बैठने को कहा लेकिन वह मां से फल लेने की जिद करने लगा। इस पर सिपाही प्रेम सिंह ने उसे जबरन वाहन के भीतर कर दिया। धक्कामुक्की में अजय के सिर में चोट लग गई। यह देख पेशी पर आए अन्य बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। द्रौपदी का आरोप था कि अंगूर देने के एवज में सिपाही ने सौ रुपए मांगे थे। उसने रुपए देने में असमर्थता जताई तो सिपाही गाली गलौज करने लगा। बेटे ने इसका विरोध किया तो उसका सिर बंदी वाहन की ग्रिल में लड़ा दिया।
घटना की सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक हीरालाल, आरआई डीके धवन और कोतवाली प्रभारी अमृतलाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बंदियों और पुलिस जवानों से अलग-अलग बात की। एएसपी ने पत्रकारों को बताया कि बंदी को पीटने का आरोप निराधार है। बताया कि अजय जमानत न हो पाने से परेशान था। पेशी के बाद वह आपा खो बैठा। उसकी मां ने उसे अंगूर देने का प्रयास किया मगर सुरक्षा कारणों से सिपाही ने उसे रोक दिया। इस पर उसने वाहन के चैनल में अपना सिर पटक कर खुद को घायल कर लिया। जिला अस्पताल में मेडिकल और मरहम पट्टी कराने के बाद बंदी को जिला कारागार भेजा दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्लागंज के मोहल्ला इंद्रानगर निवासी अजय उर्फ टिंकल पुत्र मस्तराम कश्यप को गंगाघाट थाना पुलिस ने दो महीने पहले एनडीपीएस में गिरफ्तार किया था। शुक्रवार को उसकी एडीजे तृतीय की कोर्ट में पेशी थी। पेशी के बाद दोपहर करीब दो बजे सिपाही प्रेम सिंह यादव बंदी अजय को कचहरी हवालात लेकर जा रहा था। रास्ते में अजय को मां द्रौपदी देवी ने अंगूर देने का प्रयास किया तो सिपाही ने उसे रोक दिया। इसके बाद सिपाही ने बंदी को वाहन में बैठने को कहा लेकिन वह मां से फल लेने की जिद करने लगा। इस पर सिपाही प्रेम सिंह ने उसे जबरन वाहन के भीतर कर दिया। धक्कामुक्की में अजय के सिर में चोट लग गई। यह देख पेशी पर आए अन्य बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। द्रौपदी का आरोप था कि अंगूर देने के एवज में सिपाही ने सौ रुपए मांगे थे। उसने रुपए देने में असमर्थता जताई तो सिपाही गाली गलौज करने लगा। बेटे ने इसका विरोध किया तो उसका सिर बंदी वाहन की ग्रिल में लड़ा दिया।
विज्ञापन
घटना की सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक हीरालाल, आरआई डीके धवन और कोतवाली प्रभारी अमृतलाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बंदियों और पुलिस जवानों से अलग-अलग बात की। एएसपी ने पत्रकारों को बताया कि बंदी को पीटने का आरोप निराधार है। बताया कि अजय जमानत न हो पाने से परेशान था। पेशी के बाद वह आपा खो बैठा। उसकी मां ने उसे अंगूर देने का प्रयास किया मगर सुरक्षा कारणों से सिपाही ने उसे रोक दिया। इस पर उसने वाहन के चैनल में अपना सिर पटक कर खुद को घायल कर लिया। जिला अस्पताल में मेडिकल और मरहम पट्टी कराने के बाद बंदी को जिला कारागार भेजा दिया गया।
विज्ञापन