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खरमास बीता, अब बजेगी घरों में शहनाई
Unnao
Updated Thu, 16 Jan 2014 05:49 AM IST
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उन्नाव। मकर संक्रांति पर्व से खरमास समाप्त होने के साथ मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो गया है। 18 जनवरी से यज्ञोपवीत, विवाह व अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के लिए शुभ मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। खरमास के कारण एक माह से संभी मांगलिक कार्य बंद पड़े थे।
हिंदू संस्कृति के अनुसार पौष माह (खरमास) में शुभ कार्य करना मना होता है। इसलिए लोग इस महीने में कोई भी मांगलिक कार्य करना उचित नहीं समझते हैं। इस महीने न तो लोग कोई शुभ कार्य करते हैं और न किसी चीज की खरीदारी ही करते हैं। अब मकर संक्रांति के पर्व से खरमास समाप्त होने के साथ शुभ दिनों की शुरुआत हुई है। आचार्य पं. पुत्तन लाल शुक्ला ने बताया सूर्यदेव के उत्तरायण में आने के बाद से ही मांगलिक कार्यक्रमों की घड़ी आ गई है। बताया इस बार हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे अधिक विवाह मुहूर्त मकर संक्रांति के बाद से 13 मार्च के बीच हैं। इसके बाद ग्रीष्म ऋतु में मांगलिक कार्यक्रम होंगे।
बसंत पंचमी का दिन सबसे शुभ
आचार्य गिरिजेश त्रिपाठी ने कहा इस बार बसंत पंचमी का दिन अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक चार फरवरी को पड़ रहा है। कहा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग दोनों ही एक साथ मिल रहे हैं। इससे इस दिन का महत्व कुछ अधिक ही बढ़ गया है। बताया पंचमी के दिन मांगलिक कार्यक्रमों को करवाने वालों की संख्या काफी ज्यादा हो रही है।
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खरमास की वजह से एक माह से वीरान पड़े बाजारों में भी रौनक लौट रही है। लोगों ने सहालग के मद्देनजर इसी दिन से खरीदारी भी शुरू कर दी है। इससे बाजारों का सन्नाटा भी दूर होने लगा है। शहर के कपड़ा व्यवसायियों के अनुसार पौष माह में प्रति वर्ष बाजार ठंडा पड़ जाता है लेकिन अब शादियों के मौसम की शुरुआत होने से व्यापार बढ़ेगा और सन्नाटा दूर होगा।
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हिंदू संस्कृति के अनुसार पौष माह (खरमास) में शुभ कार्य करना मना होता है। इसलिए लोग इस महीने में कोई भी मांगलिक कार्य करना उचित नहीं समझते हैं। इस महीने न तो लोग कोई शुभ कार्य करते हैं और न किसी चीज की खरीदारी ही करते हैं। अब मकर संक्रांति के पर्व से खरमास समाप्त होने के साथ शुभ दिनों की शुरुआत हुई है। आचार्य पं. पुत्तन लाल शुक्ला ने बताया सूर्यदेव के उत्तरायण में आने के बाद से ही मांगलिक कार्यक्रमों की घड़ी आ गई है। बताया इस बार हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे अधिक विवाह मुहूर्त मकर संक्रांति के बाद से 13 मार्च के बीच हैं। इसके बाद ग्रीष्म ऋतु में मांगलिक कार्यक्रम होंगे।
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बसंत पंचमी का दिन सबसे शुभ
आचार्य गिरिजेश त्रिपाठी ने कहा इस बार बसंत पंचमी का दिन अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक चार फरवरी को पड़ रहा है। कहा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग दोनों ही एक साथ मिल रहे हैं। इससे इस दिन का महत्व कुछ अधिक ही बढ़ गया है। बताया पंचमी के दिन मांगलिक कार्यक्रमों को करवाने वालों की संख्या काफी ज्यादा हो रही है।
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खरमास की वजह से एक माह से वीरान पड़े बाजारों में भी रौनक लौट रही है। लोगों ने सहालग के मद्देनजर इसी दिन से खरीदारी भी शुरू कर दी है। इससे बाजारों का सन्नाटा भी दूर होने लगा है। शहर के कपड़ा व्यवसायियों के अनुसार पौष माह में प्रति वर्ष बाजार ठंडा पड़ जाता है लेकिन अब शादियों के मौसम की शुरुआत होने से व्यापार बढ़ेगा और सन्नाटा दूर होगा।