{"_id":"40-107379","slug":"Unnao-107379-40","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा का धन खर्च करने में कन्वर्जेंस विभाग पिछड़े ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा का धन खर्च करने में कन्वर्जेंस विभाग पिछड़े
Unnao
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
उन्नाव। मनरेगा विकास कार्य कराने में जिले के तीन कन्वर्जेंस विभाग पीछे चल रहे हैं। अक्तूबर माह तक ये विभाग विकास के लिए जारी धनराशि का बीस फीसदी भी नहीं खर्च कर सके हैं। कन्वर्जेेंस विभागों की हीलाहवाली से ग्रामीण क्षेत्रों में न तो विकास हो पा रहा है और न ही ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है।
मनरेगा के तहत जिले में आठ कन्वर्जेंस विभागों को विकास कार्यों के लिए धनराशि आवंटित की गई। ये विभाग अपने से संबंधित विकास कार्यों को मनरेगा से करवाते हैं। वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए पंचायती राज विभाग को विकास कार्य कराने के लिए मनरेगा कन्वर्जेंस के तहत छह लाख 10 हजार रुपए आवंटित हुए थे। अक्तूबर माह बीतने तक पंचायती राज विभाग ने इस धनराशि का एक रुपया भी नहीं खर्च किया था। इसी तरह लोक निर्माण विभाग छह माह में मात्र सोलह प्रतिशत धनराशि ही खर्च कर सका है। 2012-13 में लोक निर्माण विभाग को मनरेगा कर्न्वजेंस के 1 करोड़ 78 लाख 74 हजार रुपया जारी किया गया। विभाग अक्टूबर माह तक केवल 21 लाख रुपया ही खर्च कर सका है। सिंचाई विभाग की स्थिति भी बदतर है यह विभाग भी आधा वित्तीय वर्ष गुजरने के बावजूद मात्र 11 प्रतिशत धनराशि ही खर्च कर सका है। सिंचाई विभाग को वित्तीय वर्ष 2012-13 में मनरेगा कन्वर्जेंस के तहत विकास कार्य कराने के लिए 2 करोड़ 66 लाख 69 हजार रुपए जारी किए गए हैं। वित्तीय वर्ष के छह माह से अधिक गुजरने के बावजूद विभाग मात्र 31 लाख 14 हजार रुपया ही खर्च कर सका है। मालूम हो 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच सिंचाई विभाग द्वारा नहरों सफाई कराई जा रही है। नियमों के मुताबिक सिंचाई विभाग माइनरों की सफाई केवल मनरेगा से ही करवाएगा। इसके बावजूद सिंचाई विभाग द्वारा मात्र ग्यारह प्रतिशत धनराशि खर्च किया जाना जानकारों की चिंता का विषय है। निर्मल भारत अभियान के तहत गांवों मेें बनने वाले शौचालयों मेें मनरेगा मजदूरों से काम कराए जाने का प्रावधान किया गया है। पंचायत राज विभाग द्वारा छह माह बीतने के बावजूद एक रुपया नहीं खर्च किया है। मनरेगा मामलोें के जानकारों की मानें तो पंचायतीराज विभाग द्वारा कन्वर्जेंस की धनराशि खर्च न किया जाना दर्शाता है कि गावों में शौचालय निर्माण का कार्य भी नहीं हो रहा है। मुख्य विकास अधिकारी हेमंत कुमार ने बताया कि इन विभागों को कन्वर्जेंस धनराशि का उपयोग करने के निर्देश पहले भी दिए जा चुके हैं। इन विभागों को जल्द ही गांवों में विकास कार्य शुरू करवाने के निर्देश दोबारा जारी किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
मनरेगा के तहत जिले में आठ कन्वर्जेंस विभागों को विकास कार्यों के लिए धनराशि आवंटित की गई। ये विभाग अपने से संबंधित विकास कार्यों को मनरेगा से करवाते हैं। वित्तीय वर्ष 2012-13 के लिए पंचायती राज विभाग को विकास कार्य कराने के लिए मनरेगा कन्वर्जेंस के तहत छह लाख 10 हजार रुपए आवंटित हुए थे। अक्तूबर माह बीतने तक पंचायती राज विभाग ने इस धनराशि का एक रुपया भी नहीं खर्च किया था। इसी तरह लोक निर्माण विभाग छह माह में मात्र सोलह प्रतिशत धनराशि ही खर्च कर सका है। 2012-13 में लोक निर्माण विभाग को मनरेगा कर्न्वजेंस के 1 करोड़ 78 लाख 74 हजार रुपया जारी किया गया। विभाग अक्टूबर माह तक केवल 21 लाख रुपया ही खर्च कर सका है। सिंचाई विभाग की स्थिति भी बदतर है यह विभाग भी आधा वित्तीय वर्ष गुजरने के बावजूद मात्र 11 प्रतिशत धनराशि ही खर्च कर सका है। सिंचाई विभाग को वित्तीय वर्ष 2012-13 में मनरेगा कन्वर्जेंस के तहत विकास कार्य कराने के लिए 2 करोड़ 66 लाख 69 हजार रुपए जारी किए गए हैं। वित्तीय वर्ष के छह माह से अधिक गुजरने के बावजूद विभाग मात्र 31 लाख 14 हजार रुपया ही खर्च कर सका है। मालूम हो 1 नवंबर से 30 नवंबर के बीच सिंचाई विभाग द्वारा नहरों सफाई कराई जा रही है। नियमों के मुताबिक सिंचाई विभाग माइनरों की सफाई केवल मनरेगा से ही करवाएगा। इसके बावजूद सिंचाई विभाग द्वारा मात्र ग्यारह प्रतिशत धनराशि खर्च किया जाना जानकारों की चिंता का विषय है। निर्मल भारत अभियान के तहत गांवों मेें बनने वाले शौचालयों मेें मनरेगा मजदूरों से काम कराए जाने का प्रावधान किया गया है। पंचायत राज विभाग द्वारा छह माह बीतने के बावजूद एक रुपया नहीं खर्च किया है। मनरेगा मामलोें के जानकारों की मानें तो पंचायतीराज विभाग द्वारा कन्वर्जेंस की धनराशि खर्च न किया जाना दर्शाता है कि गावों में शौचालय निर्माण का कार्य भी नहीं हो रहा है। मुख्य विकास अधिकारी हेमंत कुमार ने बताया कि इन विभागों को कन्वर्जेंस धनराशि का उपयोग करने के निर्देश पहले भी दिए जा चुके हैं। इन विभागों को जल्द ही गांवों में विकास कार्य शुरू करवाने के निर्देश दोबारा जारी किए जा रहे हैं।
विज्ञापन