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Unnao News: बाढ़ प्रभावित 89 गांव में 1612 हेक्टेयर फसल तबाह

Sat, 05 Oct 2024 01:50 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Oct 2024 01:50 AM IST
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1612 hectares of crops destroyed in 89 flood affected villages
उन्नाव। जिला प्रशासन की ओर से अब तक कराए गए सर्वे में चार तहसीलों के 89 गांवों में 1612 हेक्टेअर फसल तबाह होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ प्रभावित पांच हजार से अधिक किसानों को मुआवजा देने के लिए राहत पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग का काम तेजी के साथ पूरा कराया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि अगले एक-दो दिन में किसानों के खातों में राहत राशि पहुंचनी शुरू हो जाएगी।
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इस बार गंगा के बढ़े जलस्तर ने लगभग दस दिनों तक कटरी क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई थी। 20 सितंबर की सुबह जलस्तर खतरे का निशान 113 मीटर को पार कर गया था। जलस्तर 113.150 मीटर तक पहुंच गया था। जिसके बाद पानी गांवों के अंदर घुस गया था। फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई थीं। कुछ गांवों के लोगों को तो घर छोड़कर सड़क किनारे डेरा डालना पड़ा था। वर्तमान में पानी कम हो गया है। इसके बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ से हुए नुकसान का आंकलन शुरू कराया था। अब तक हुए सर्वे के अनुसार, 5830 किसान प्रभावित हुए हैं। इनकी 1612 हेक्टेयर में बोई गई धान, उर्द, मूंग व हरी सब्जियों की फसल बाढ़ से तबाह हुई है। प्रशासन किसानों को राहत देने के लिए ऑनलाइन फीडिंग कराने में जुटा है। डीएम गौरांग राठी ने बताया कि मुआवजा देने के लिए फीडिंग का काम अंतिम स्तर पर पहुंच गया है। जल्द बाढ़ पीड़ित किसानों के खातों में मुआवजा राशि भेजना शुरू कर दिया जाएगा। उधर, फसल बीमा कंपनी ने बाढ़ प्रभावित 65 गांवों में सर्वे शुरू कराया है। बीमा कंपनी के जिला प्रभारी श्यामू जायसवाल ने बताया कि अभी गांवों में सर्वे शुरू कराया गया है। एक, दो दिन में रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
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तहसीलवार प्रभावित गांव व फसल की क्षति (अनुमानित, फाइनल आंकड़ा नहीं)
तहसील गांव फसल क्षति (हेक्टेयर में)
बांगरमऊ 08 114.63
सफीपुर 12 314.03
सदर 44 635.11
बीघापुर 25 548.54
कुल 89 1612.31
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मवेशियों के लिए बोया गया चारा भी सड़ा, पशुपालक परेशान
गंजमुरादाबाद। गंगा नदी में पिछले दिनों बाढ़ आ जाने से तलहटी में बसे कटरी इलाके के भुड्डा, रतईपुरवा, भिखारीपुर पतसिया, मुन्नीपुरवा, गढ़ेवा, सिरधरपुर, बगिया, बदलीपुरवा, भगवंतपुरवा, गुल्हरिया, कुंशी, सहिबापुर, गहरपुरवा, मितानपुरवा आदि गांव पानी से घिर गए थे। यहां की धान, मक्का के अलावा तरोई, करेला, भिंडी, बैंगन, कद्दू, लौकी, टमाटर आदि हरी सब्जियां सड़कर नष्ट हो गई हैं। इसके अलावा मवेशियों के लिए बोया गया चारा भी जलमग्न होकर सड़ चुका है। जिसके चरने से मवेशियों में खुरपका और मुंहपका आदि बीमारियां पनपने की आशंका से पशुपालक चिंतित दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में पशुपालकों के सामने दुधारू पशुओं का पेट भरने की कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जिससे दुधारू पशुओं में दूध की कमी हो गई है। इससे पशुपालकों को नुकसान पहुंच रहा है। कटरी इलाके के रामनरेश निषाद, रमेश कुमार, सर्वेश कुमार, देवेंद्र सिंह, राजेश यादव, भइया लाल, गोकरन, संतराम, विनोद कुमार, फैयाज, होरी लाल, बिटाना, सियाराम आदि पशुपालकों ने बताया कि बाढ़ के पानी से हरा चारा सड़कर बर्बाद हो चुका है और खेतों की घास विषैली हो चुकी है। राजकीय पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल सचान ने बताया कि बाढ़ में चारा समाप्त हो गया है और खेतों की घास में बिषैले कीटाणु पनप चुके हैं। जिसके चरने से पशुओं में खुरपका, मुंहपका सहित अन्य बीमारियां फैल सकती हैं। ऐसी स्थिति में पशुपालक अपने पशुओं को परिस्थितियों को देखते हुए सूखा भूसा खिलाकर किसी प्रकार उनका पेट भर सकते हैं।
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