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दम तोड़ गया 150 करोड़ का व्यापार
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Sat, 31 Dec 2016 12:30 AM IST
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rush in bank
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी से आम से खास तक की नींद उड़ गई। बैंकों में करेंसी की कमी से हाहाकार मचा। करेंसी हाथ में न आने पर लोगों ने बैंक से सड़क तक बवाल भी काटा। वहीं मार्केट में रुपया न होने से थोक से फुटकर व्यापार तक बेपटरी हो गया। मंडी समिति, गल्ला मंडी, सराफा कारोबार, कपड़ा मार्केट, किराना मार्केट से अन्य फुटकर व्यापार में लगभग 150 करोड़ का टर्नओवर दम तोड़ गया। बैंकों में करेंसी की उपलब्धता होने से दावा धीरे-धीरे हकीकत का रूप लेने लगा है।
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नोट की चोट से कराह रहे किसान
पहले प्रकृति की मार ने किसान को तोड़ा, फिर सरकारी सिस्टम ने सूखा राहत के नाम पर अरमानों पर कुठाराघात किया। फिर 8 नवंबर को पीएम ने रवी की फसल के पीक समय पर बड़े नोट की पाबंदी कर किसान का दिन-रात का सुकून लूट लिया। बैंक की लंबी कतार से दो से तीन दिन तक जूझने के बाद भी बमुश्किल हजारों की नगदी मिल पाने की बात बताने वाले किसानों की आंखों में अंासू छलक आए। सरकार के फैसले से उलझन में फंसा किसान साल भर की जीविका के जतन के लिए सेठ- साहूकारों से कर्ज लेकर बुवाई के साथ ही खाद-बीज का इंतजाम करने का दावा करते मिले। किसान रामनरेश, छोट्टन, कफील ने बताया कि पैसा न होने से फसल बुवाई इतना पिछड़ गई कि पैदावार क्या होगी। यह सोंचकर किसान हैरान-परेशान है।
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खुदरा कारोबारी तो उजड़ गए
बड़े नोट की पुरानी करेंसी बैन होने के 50 वें दिन भी मार्केट की रौनक धुंधली नजर आई। ज्वैलर्स, ईंट भट्ठा, ट्रेडर्स, हार्डवेयर, मशीनरी से लेकर अन्य व्यापार मंदी की चोट से अभी भी उबर नहीं पाए। व्यापारी नेता रजनीकांत श्रीवास्तव समेत सभी व्यापारियों ने 70 फीसदी से अधिक व्यापार प्रभावित होने की बात कही। आंकड़ों की मानें तो हर माह 100 करोड़ का टर्न ओवर करने वाले जिले में करेंसी की किल्लत से 50 दिनों में 40 करोड़ का व्यापार संभव नहीं हो सका। व्यापार ठप होने की कसक चेहरों पर झलक रही थी। व्यापारियों ने कहा कि बैंक से लेकर एटीएम तक खाली पड़े हैं। और सरकार पर्याप्त करेंसी का कोरा दावा कर रही है।
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नहीं लौटी बाजारों की रौनक
नोट बंदी के फैसले के 50 वें दिन मार्केट में भीड़ की चहलकदमी काफी कम रही। अमर उजाला टीम ने बुधवार को शहर की कपड़ा मार्केट,सर्राफ मार्केट, गल्ला मंडी का प्रमुख रूप से हाल जाना तो दुकानदार दुकानों में सुस्ताते मिले। जिससे भी बात की गई उसके पास एक ही जवाब था कि बैंकों में करेंसी की किल्लत ने व्यापार चौपट कर दिया। कुछ ने धीरे-धीरे व्यापार का पहिया पटरी पर आने की बात कही। वहीं सहालग के समय पीएम द्वारा किए गए फैसले को दुकानदार कोसते नहीं थक रहे थे। चाहे धवन रोड हो या फिर कपड़ा मार्केट या सर्राफ मार्केट हर तरफ नोट की चोट का दर्द रहा।
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46 दिनों में मंडी समिति को 15.5 लाख का झटका
कानपुर-लखनऊ नेशनल हाईवे पर आरओबी के पास बनी नवीन मंडी स्थल में व्यापार की धमक नोट की चोट से दम तोड़ रही। बड़ी करेंसी बंद के अलावा बैकों में नई करेंसी की कमी से आम लोग ही नहीं व्यापारी भी हलाकान है। बड़े नोट की पाबंदी के बाद से मंडी समिति को बुधवार तक 46 दिन के अंतराल में पिछले साल की अपेक्षा 15 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हो चुका है। वहीं व्यापारी वर्ग का टर्न ओवर भी 30 से 40 फीसदी के बीच ही फंस कर रह गया। लाखों का व्यापार प्रभावित होने से व्यापारी फैसले को कोसते नहीं थक रहे थे। जिस मंडी समिति में भोर पहर से ही वाहनों की धमाचौकड़ी के बीच किसानों व व्यापारियों का शोर शराबा शुरु हो जाता था। वहां नोट की चोट ने व्यापार की रौनक ही गायब कर रखी। मंडी प्रभारी नागेंद्र सेंगर ने बताया कि सन् 2015 नवंबर माह में 28.5 लाख, दिसंबर में 17 लाख मंडी शुल्क जमा हुआ था। जबकि नोटबंदी के चलते 9 नवंबर से 24 दिसंबर के बीच 30 लाख ही मंडी शुल्क जमा हुआ। इस तरह नोट की चोट ने सरकारी खजाने को 15.5 लाख का झटका दिया।
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एक माह में जिले में व्यापार का टर्न ओवर
नोटबंदी के पहले बाद में
मशीनरी का व्यापार 30 करोड़ 13 करोड़
ज्वैलर्स का व्यापार 100 करोड़ 20 करोड़
कपड़ा व्यापार 9 करोड़ 2.5 करोड़
गल्ला मंडी थोक 200 करोड़ 70.5 करोड़
गल्ला मंडी फुटकर 50 करोड़ 16 करोड़
हाईटेक हुआ नवाबगंज टोल प्लाजा
-टोल बूथ पर इलेक्ट्रानिकल टोल कनेक्शन (ईटीसी) की सुविधा हुई शुरू
-ई-पेमेंट व फास्ट टैग कार्ड से पेमेंट करने वालों को 10 प्रतिशत छूट भी
अमर उजाला ब्यूरो
सोहरामऊ (उन्नाव)। नोटबंदी के बाद लखनऊ-कानपुर हाईवे का टोल प्लाजा और हाईटेक हो गया है। यहां लोगों को इलेक्ट्रानिकल टोल कनेक्शन (ईटीसी) की सुविधा मिलने लगी है। वहीं ई-पेमेंट व फास्ट टैग कार्ड के उपयोग की भी व्यवस्था की गई है। इन सभी सुविधाओं के बाद भी वाहन सवारों को इलेक्ट्रानिक पेमेंट पर 10 फीसदी की छूट भी दी जा रही है।
नेशनल अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) के क्षेत्र में आने वाले लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित नवाबगंज टोल प्लाजा पर अब वाहन सवारों को टोल टैक्स देने के लिए करेंसी की परेशानी नहीं झेलनी होगी। टोल प्लाजा में ई-पेमेंट, फास्ट टैग कार्ड व इलेक्ट्रानिक टोल कनेक्शन से पेमेंट का लेनदेन शुरू हो गया है। टोल बूथ पर फास्ट टैग कार्ड लगी गाड़ियों के लिए दो स्पेशल लेन बना दी गई हैं जिससे इस कार्ड की सुविधा वाली गाड़ियों को रुकना न पड़े और वह आराम से निकल जाएं। वहीं बूथ पर इलेक्ट्रानिक टोल कनेक्शन स्कीम के तहत पेमेंट करने वालों को 10 फीसदी की छूट भी दी जा रही है। एनएचएआई अफसरों की मानें तो वाहन में टैग सेवा लेने के लिए वाहन मालिक को केवल वाहन की आरसी की कापी देनी होगी। इसी के आधार पर टैग बन जाएगा। वाहन चालक टैग को फ्रंट शीशे पर लगा लेगा और इसमें लगा हुआ सेंसर जैसे ही टोल के सेंसर से मैच होगा वैसे ही गेट अपने आप खुल जाएगा। इस टैग को आनलाइन रिचार्ज भी किया जा सकता है। टोल प्लाजा के मैनेजर ए एस चौहान ने बताया कि सरकार ने अब नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर ही आरएफआईडी जरुरी कर दिया है। बिना फास्ट टैग कार्ड लगी गाड़ियां अब शोरूम से नहीं निकलेंगी।
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तेजी से बढ़ी है ई-पेमेंट वैल्यू
टोल मैनेजर एएस चौहान ने बताया कि नोट बंदी के बाद से टोल पर ई-पेमेंट की वैल्यू तेजी से बढ़ी है। मौजूदा समय में रोज करीब 4 सौ लोग एटीएम कार्ड स्वाइप कराकर पेमेंट कर रहे हैं। वहीं रोजाना 40 से 50 लोग पेटीएम से भुगतान कर रहे हैं। इसके अलावा करीब 3 से 4 सौ लोग फास्ट टैग कार्ड का प्रयोग कर रहे हैं। बताया कि इससे रोजाना 20 से 22 लाख रुपये के पेमेंट में करीब 2 से ढाई लाख रुपये का रोजाना ई-पेमेंट होना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से ई-पेमेंट करने वालों की संख्या बढ़ रही है इससे लग रहा है कि आने वाले समय में पूरी तरह से कैशलेस हो जाएगा।