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कौशल विकास पर आधारित है वर्धा योजना
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अमेठी। शहर स्थित आरआरपीजी कॉलेज में मानव संसाधन मंत्रालय के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के सौजन्य से सात दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ।
कार्यक्रम संयोजक/प्राचार्य डॉ. त्रिवेणी सिंह ने गांधी के सर्वोदय एवं वर्धा शिक्षा योजना पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी के कल्याण की भावना को ध्यान में रखने के कारण ही इसे सर्वोदयी शिक्षा कहा गया है।
कहा कि वर्धा शिक्षा योजना के आधार पर शिक्षण में नए ज्ञान एवं अनुभव के प्रयोग को नई तालीम कहा गया है। गांधी जी का चिंतन कल, आज और आने वाले कल में भी प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने जो कुछ कहा, वह किया।
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विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के राज्य समन्वयक डॉ. अनिल कुमार दूबे ने कहा कि भारत सरकार को ऐसी शिक्षा पद्धति बनानी चाहिए जिसमें अनुभवजन्य एवं प्रयोगात्मक शिक्षण तकनीक सम्मिलित हो।
आज देश में साक्षरता दर निरंतर बढ़ रही है। आज देश में शिक्षा सैद्धांतिक अधिक व व्यावहारिक कम है। गांधी जी की नई तालीम से शिक्षा को अनुभजन्य एवं प्रयोगात्मक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी शिक्षा संकाय के प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र कुमार ने कहा कि यह अवधारणा ग्रामीण सशक्तीकरण में सहायक है। वर्धा शिक्षा योजना कौशल विकास पर आधारित है। कौशल विकास से ही हम गरीबी दूर कर जनसंख्या को नियंत्रित कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एमपी त्रिपाठी ने किया।
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कार्यक्रम संयोजक/प्राचार्य डॉ. त्रिवेणी सिंह ने गांधी के सर्वोदय एवं वर्धा शिक्षा योजना पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी के कल्याण की भावना को ध्यान में रखने के कारण ही इसे सर्वोदयी शिक्षा कहा गया है।
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कहा कि वर्धा शिक्षा योजना के आधार पर शिक्षण में नए ज्ञान एवं अनुभव के प्रयोग को नई तालीम कहा गया है। गांधी जी का चिंतन कल, आज और आने वाले कल में भी प्रासंगिक रहेगा। उन्होंने जो कुछ कहा, वह किया।
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विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा परिषद के राज्य समन्वयक डॉ. अनिल कुमार दूबे ने कहा कि भारत सरकार को ऐसी शिक्षा पद्धति बनानी चाहिए जिसमें अनुभवजन्य एवं प्रयोगात्मक शिक्षण तकनीक सम्मिलित हो।
आज देश में साक्षरता दर निरंतर बढ़ रही है। आज देश में शिक्षा सैद्धांतिक अधिक व व्यावहारिक कम है। गांधी जी की नई तालीम से शिक्षा को अनुभजन्य एवं प्रयोगात्मक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी शिक्षा संकाय के प्रोफेसर डॉ. नागेंद्र कुमार ने कहा कि यह अवधारणा ग्रामीण सशक्तीकरण में सहायक है। वर्धा शिक्षा योजना कौशल विकास पर आधारित है। कौशल विकास से ही हम गरीबी दूर कर जनसंख्या को नियंत्रित कर सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एमपी त्रिपाठी ने किया।