जिला चिकित्सालय में बढ़े वायरल के मरीज
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सुल्तानपुर। मौसम के बदले रुख से जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पीएचसी तक में सर्दी-बुखार के मरीजों की संख्या में दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। सीएचसी, पीएचसी व जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 300 सौ से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक वायरल फीवर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके संक्रमण से मरीज दिमागी बुखार की चपेट में भी आ सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक बारिश और तेज धूप के बीच तेजी से फैल रहे इंटेरोवायरस, इंफ्लूएंजा व पैराइंफ्लूएंजा वायरस सक्रिय हो जाते हैं। इनकी चपेट में आने वाले लोग पेट संबंधी बीमारियों के साथ बुखार और सर्दी-जुकाम से पीड़ित हो जाते हैं।
सीएमओ/चेस्ट फिजीशियन डॉ. केबी सिंह कहते हैं कि मरीज को झोलाछाप चिकित्सक को कतई न दिखाएं। ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर झोलाछाप स्टेरॉयड युक्त दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इसके सेवन से मरीज की प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है और शरीर के दूसरे हिस्सों में तेजी से संक्रमण फैलने लगता है। स्टेरॉयड में प्रमुख रूप से बेट्नासॉल, बेटामेथासोन, डेक्सामेथासोन, प्रेडनीस्लोन दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं दिमाग की कोशिकाओं को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। इन दवाओं के नियमित सेवन से निमोनिया व टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधाकर सिंह ने बताया कि इंफ्लूएंजा, पैरा इंफ्लूएंजा और इंटेरोवायरस लोगों को संक्रामक रोग की चपेट में ले रहा है। इेटेरोवायरस से सबसे अधिक आंत और पेट संबंधी बीमारी होती है। ऐसे में खान-पान व दैनिक दिनचर्या पर ध्यान दें तो बीमारी से बचा जा सकता है।