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वेंटिलेटर विहीन हुआ जिला अस्पताल, मरीजों की जान पर आफत
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सुल्तानपुर। जिला अस्पताल में गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है। जिला अस्पताल में लगाए गए छह वेंटिलेटर को स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए जिला महिला अस्पताल के पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। ऐसी हालत में जिला अस्पताल में पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया जा रहा है।
कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने का अंदेशा जताया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ने की बात कही जा रही है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्पतालों में बेड और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था करने का आदेश दिया था। जिला अस्पताल में कुल छह वेंटिलेटर लगाए गए थे। मौजूदा समय में बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर जिला अस्पताल में लगाए गए वेंटिलेटर को जिला महिला अस्पताल के पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। वेंटिलेटर पीकू वार्ड में शिफ्ट कर देने से जिला अस्पताल में प्रतिदिन पहुंचने वाले गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को चिकित्सक ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर करके पल्ला झाड़ रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि जिला अस्पताल में कुल छह वेंटिलेटर थे। जिन्हें कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए बनाए गए पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
सांसद निधि से मुहैया कराए गए थे चार वेंटिलेटर
तत्कालीन सांसद वरुण गांधी ने अपनी निधि से जिला अस्पताल को चार वेंटिलेटर मुहैया कराए थे, जबकि दो जिला अस्पताल में पहले से थे। ये वेंटिलेटर टेक्नीशियन के अभाव में कभी चले ही नहीं। यहां तक कि कोरोना की दोनों लहर में भी इनका संचालन नहीं हो सका। तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए किए गए इंतजाम के तहत वेंटिलेटर को पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वेंटिलेटर संचालन के लिए कुछ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। हालांकि पीकू वार्ड में वेंटिलेटर शिफ्ट होने की वजह से अब तक इसके संचालन की नौबत ही नहीं आई है।
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कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने का अंदेशा जताया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ने की बात कही जा रही है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने अस्पतालों में बेड और वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था करने का आदेश दिया था। जिला अस्पताल में कुल छह वेंटिलेटर लगाए गए थे। मौजूदा समय में बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर जिला अस्पताल में लगाए गए वेंटिलेटर को जिला महिला अस्पताल के पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। वेंटिलेटर पीकू वार्ड में शिफ्ट कर देने से जिला अस्पताल में प्रतिदिन पहुंचने वाले गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को चिकित्सक ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर करके पल्ला झाड़ रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि जिला अस्पताल में कुल छह वेंटिलेटर थे। जिन्हें कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए बनाए गए पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
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सांसद निधि से मुहैया कराए गए थे चार वेंटिलेटर
तत्कालीन सांसद वरुण गांधी ने अपनी निधि से जिला अस्पताल को चार वेंटिलेटर मुहैया कराए थे, जबकि दो जिला अस्पताल में पहले से थे। ये वेंटिलेटर टेक्नीशियन के अभाव में कभी चले ही नहीं। यहां तक कि कोरोना की दोनों लहर में भी इनका संचालन नहीं हो सका। तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए किए गए इंतजाम के तहत वेंटिलेटर को पीकू वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वेंटिलेटर संचालन के लिए कुछ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। हालांकि पीकू वार्ड में वेंटिलेटर शिफ्ट होने की वजह से अब तक इसके संचालन की नौबत ही नहीं आई है।
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