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150 करोड़ का लेन-देन प्रभावित, परेशान हुए खाताधारक
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सुल्तानपुर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर सोमवार को निजीकरण के विरोध समेत अन्य समस्याओं को लेकर एसबीआई व अन्य बैकों की 188 शाखाओं के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बैंक कर्मियों की हड़ताल से करीब 150 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ। खाताधारकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिले में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों की 188 शाखाओं का संचालन किया जा रहा है। सोमवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर एसबीआई, बॉब, पीएनबी समेत करीब 188 शाखाओं के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
हड़ताल से दिन भर बैंक शाखाओं में ताले लटकते रहे। हड़ताल का असर ग्रामीण क्षेत्र में भी देखा गया। राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकतर कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होकर केंद्र सरकार के प्रति अपना विरोध जताया। बैंक शाखाओं के बंद होने की वजह से खाताधारकों को धन की जमा-निकासी व अन्य बैंकिंग कार्य निपटाने में परेशानी उठानी पड़ी।
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वहीं, चेकों की क्लीयरिंग का काम भी पूरी तरह प्रभावित रहा। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन बैंक के चेयरमैन/संरक्षक व बैंक ऑफ बड़ौदा स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष आरसी शुक्ला ने बताया कि प्रमुख बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन करीब 150 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ है।
जिला मुख्यालय पर बैंक कर्मियों ने शाखाओं पर तालाबंदी करते हुए जुलूस निकालकर विरोध जाहिर किया। नेशनल फेडरेशन ऑफ आरआरबी इंपलाइज संगठन के महासचिव शिवकरन द्विवेदी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के कीमती सार्वजनिक उपक्रमों को निजीकरण की राह पर ले जा रही है। देश भर के बैंकिंग कर्मचारी सोमवार से दो दिनों के लिए बैंक बंद कर सड़कों पर उतर पड़े हैं।
उन्होंने बताया कि हड़ताल को लेकर सभी ग्रामीण बैंक शाखाएं बंद रहीं। क्षेत्रीय कार्यालय के सामने आयोजित धरने में ऑफिसर एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव कामरेड अनुपम गोस्वामी ने हड़ताल के मुद्दों पर प्रकाश डाला।
बताया कि बैंकों के निजीकरण के विरोध, 11वां वेतन समझौता ग्रामीण बैंकों में अविलंब लागू किए जाने, प्रायोजक बैंकों की तरह पदोन्नति नीति लागू करने, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के स्थायीकरण जैसी मांगों को लेकर यह हड़ताल की गई है। इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय सचिव सुरेंद्र पांडेय, ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष बीपी उपाध्याय व इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष आनंद तिवारी, श्रीदत्त राजेश, रामकृष्ण पांडेय, संजय पाठक, सुरेश सिंह आदि ने भी धरने को संबोधित किया।
बैंकों की हड़ताल से ग्राहकों को हुई परेशानी
सुल्तानपुर। बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन जमा-निकासी के लिए ग्राहकों को खासी परेशानी हुई। शहर के पलटू का पुरवा निवासी रामनरायन ने बताया कि वे बैंक से पैसा निकालने के लिए आए थे। हड़ताल की वजह से पैसा नहीं निकल सका।
निखिल पांडेय बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में कंपनी का चेक जमा करने के लिए आए थे। बताया कि बैंक हड़ताल से चेक जमा नहीं हो सका। मो. शमीम के मोबाइल पर पैसा जमा करने व निकासी के समय मैसेज नहीं आता था। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए बैंक में आए थे। हड़ताल की जानकारी मिलने पर निराशा हुई। इसके अलावा कई लोग बैंकों में विवाह की खरीदारी के लिए पैसा निकालने आए थे। हड़ताल के चलते बैंक से पैसा नहीं निकल पाया और खरीदारी नहीं हो सकी।
एटीएम पर बढ़ा धन निकासी का दबाव
सुल्तानपुर। बैंकों के निजीकरण के विरोध में सोमवार को बैंक कर्मियों की हड़ताल की वजह से लोगों को धन निकासी के लिए एटीएम बूथों का सहारा लेना पड़ा।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित करीब 188 एटीएम बूथों में से अधिकतर एटीएम कैशलेस रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर एटीएम पर कैश नहीं लोड होने से लोगों को धन निकासी के लिए जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ा। सीमित एटीएम पर धन निकासी का दबाव रहा। वहां धन निकासी के लिए लंबी कतार लगी रही।
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जिले में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों की 188 शाखाओं का संचालन किया जा रहा है। सोमवार को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर एसबीआई, बॉब, पीएनबी समेत करीब 188 शाखाओं के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।
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हड़ताल से दिन भर बैंक शाखाओं में ताले लटकते रहे। हड़ताल का असर ग्रामीण क्षेत्र में भी देखा गया। राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकतर कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होकर केंद्र सरकार के प्रति अपना विरोध जताया। बैंक शाखाओं के बंद होने की वजह से खाताधारकों को धन की जमा-निकासी व अन्य बैंकिंग कार्य निपटाने में परेशानी उठानी पड़ी।
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वहीं, चेकों की क्लीयरिंग का काम भी पूरी तरह प्रभावित रहा। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन बैंक के चेयरमैन/संरक्षक व बैंक ऑफ बड़ौदा स्टाफ एसोसिएशन के प्रांतीय उपाध्यक्ष आरसी शुक्ला ने बताया कि प्रमुख बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन करीब 150 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ है।
जिला मुख्यालय पर बैंक कर्मियों ने शाखाओं पर तालाबंदी करते हुए जुलूस निकालकर विरोध जाहिर किया। नेशनल फेडरेशन ऑफ आरआरबी इंपलाइज संगठन के महासचिव शिवकरन द्विवेदी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के कीमती सार्वजनिक उपक्रमों को निजीकरण की राह पर ले जा रही है। देश भर के बैंकिंग कर्मचारी सोमवार से दो दिनों के लिए बैंक बंद कर सड़कों पर उतर पड़े हैं।
उन्होंने बताया कि हड़ताल को लेकर सभी ग्रामीण बैंक शाखाएं बंद रहीं। क्षेत्रीय कार्यालय के सामने आयोजित धरने में ऑफिसर एसोसिएशन के क्षेत्रीय सचिव कामरेड अनुपम गोस्वामी ने हड़ताल के मुद्दों पर प्रकाश डाला।
बताया कि बैंकों के निजीकरण के विरोध, 11वां वेतन समझौता ग्रामीण बैंकों में अविलंब लागू किए जाने, प्रायोजक बैंकों की तरह पदोन्नति नीति लागू करने, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के स्थायीकरण जैसी मांगों को लेकर यह हड़ताल की गई है। इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्रीय सचिव सुरेंद्र पांडेय, ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष बीपी उपाध्याय व इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष आनंद तिवारी, श्रीदत्त राजेश, रामकृष्ण पांडेय, संजय पाठक, सुरेश सिंह आदि ने भी धरने को संबोधित किया।
बैंकों की हड़ताल से ग्राहकों को हुई परेशानी
सुल्तानपुर। बैंकों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले दिन जमा-निकासी के लिए ग्राहकों को खासी परेशानी हुई। शहर के पलटू का पुरवा निवासी रामनरायन ने बताया कि वे बैंक से पैसा निकालने के लिए आए थे। हड़ताल की वजह से पैसा नहीं निकल सका।
निखिल पांडेय बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में कंपनी का चेक जमा करने के लिए आए थे। बताया कि बैंक हड़ताल से चेक जमा नहीं हो सका। मो. शमीम के मोबाइल पर पैसा जमा करने व निकासी के समय मैसेज नहीं आता था। उन्होंने बताया कि मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए बैंक में आए थे। हड़ताल की जानकारी मिलने पर निराशा हुई। इसके अलावा कई लोग बैंकों में विवाह की खरीदारी के लिए पैसा निकालने आए थे। हड़ताल के चलते बैंक से पैसा नहीं निकल पाया और खरीदारी नहीं हो सकी।
एटीएम पर बढ़ा धन निकासी का दबाव
सुल्तानपुर। बैंकों के निजीकरण के विरोध में सोमवार को बैंक कर्मियों की हड़ताल की वजह से लोगों को धन निकासी के लिए एटीएम बूथों का सहारा लेना पड़ा।
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित करीब 188 एटीएम बूथों में से अधिकतर एटीएम कैशलेस रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर एटीएम पर कैश नहीं लोड होने से लोगों को धन निकासी के लिए जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ा। सीमित एटीएम पर धन निकासी का दबाव रहा। वहां धन निकासी के लिए लंबी कतार लगी रही।