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बंद हुए 23 ईंट-भट्ठे हजारों श्रमिक बेरोजगार

Sun, 03 Jan 2016 10:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर Updated Sun, 03 Jan 2016 10:22 PM IST
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करौंदीकलां (सुल्तानपुर)। स्थानीय विकासखंड में संचालित 23 ईंट-भट्ठों के बंद होने से करीब हजार मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रत्येक भट्ठे पर करीब 200 मजदूर काम करते थे। ईंट-भट्ठों का संचालन बंद होने से मजदूर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

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क्षेत्र के दसगरपारा में एक, तिवारी का पूरा में एक, अमिलिया में तीन, अमनाईकपुर में एक, रामपुर दुबायल में दो, बौढ़ियाबालमऊ में दो, भटौता तुलसीपट्टी में दो, प्रतापपुर में दो, हरीपुर में एक, कनरवल में एक, गोपालपुर में दो, कटघरखास में दो, हिंदुआबाद में एक, बहाउद्दीपुन में एक व सड़सी में एक ईंट-भट्ठा मौजूद है। शासन से निर्धारित पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र की अनिवार्यता के चलते सभी ईंट-भट्ठे बंद पड़े हैं। जो ईंट-भट्ठे इस प्रमाणपत्र को प्राप्त कर पाएंगे, वही संचालन करा सकते हैं।
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संचालकों की मानें तो प्रमाणपत्र प्राप्त करने के जो नियम हैं, उस मानक पर एक भी ईंट-भट्ठे का संचालन मुश्किल है। भट्ठा संघ के महामंत्री सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जून 2015 तक जिले में 295 ईंट-भट्ठे पंजीकृत थे। अब काम बंद करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है। ईंट-भट्ठों के बंद होने से करीब पाच हजार मजदूर भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। प्रत्येक भट्ठे पर ईंट पथाई, ढुलाई, ट्रैक्टर ट्रॉली पर लोड करने के लिए मजदूरों व ड्राइवरों को मिलाकर कुल 200 लोगों की आवश्यकता पड़ती है। ईंट-भट्ठों के बंद होने से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
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