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Sultanpur News: असम, महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं साइबर ठगों के तार

Wed, 04 Feb 2026 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Wed, 04 Feb 2026 11:56 PM IST
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The cyber fraudsters have links to Assam, Maharashtra, and West Bengal
सुल्तानपुर में साइबर थाने में खड़े आरोपी। स्रोत-पुलिस
आदित्य उपाध्याय
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सुल्तानपुर। शेयर ट्रेडिंग कंपनी के क्लोन एप से 356.65 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क तीन राज्यों में फैला है। सात आरोपियों के महाराष्ट्र, असम व पश्चिम बंगाल से जुड़े कनेक्शन भी पुलिस तलाश कर रही है। उनसे जुड़े अन्य करीबी लोग भी पुलिस के रडार पर है। हालांकि, गिरोह के सरगना तक पुलिस अभी नहीं पहुंच सकी है।
असम के कामरूप जिले के हाजो निवासी हनीफ काजी, शमसुद्दीन के खाते को साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया गया। उनके संयुक्त खाते में भास्कर पांडेय के खाते से ठगी की गई धनराशि को ट्रांसफर किया गया था। उन्हें सालेकुरा (बारपेटा) निवासी शफीकुल इस्लाम, कोटलीजार (हावली) निवासी जाकिर खान ने पैसा कमाने का लालच दिया था। उन दोनों का नेटवर्क असम में फैला है। अन्य कई खातों में भी उन दोनों ने संदिग्ध लेन-देन कराया है।
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शफीकुल इस्लाम व जाकिर खान का संबंध में मुंबई के कल्याण नगर, भिवंडी निवासी संतोष सुर्वे और नवी मुंबई के घंसोली निवासी विजय ईश्वर कलांतरे से था। उनसे पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर निवासी फरीद मलिक का भी संबंध है। पुलिस के मुताबिक, सातों आरोपी एक-दूसरे से निरंतर मोबाइल पर संपर्क में भी रहते हैं। इन आरोपियों से जुड़े अन्य कुछ संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबर भी पुलिस के रडार पर हैं। उनकी गहन छानबीन चल रही है। साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक आलोक कुमार सिंह ने बताया कि सातों आरोपियों के करीबियों पर भी निगाह है। तीनाें राज्य की पुलिस से समन्वय स्थापित कर उनके नेटवर्क के बारे में पता लगाया जा रहा है।
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11 खातों पर लगाई गई रोक
साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक आलोक कुमार सिंह ने बताया कि सभी आरोपियों को बुधवार को जेल भेज दिया गया। उनके पास से सात मोबाइल फोन, छह चेक बुक और तीन एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। कुल 11 संदिग्ध खातों के लेन-देन पर रोक लगाई गई है।

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क्लोनिंग एप से करते थे ठगी
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे अंशिका ग्रोइंग एंड शेयरिंग नामक कंपनी के क्लोन एप के माध्यम से ठगी करते थे, जबकि असली कंपनी अलग है। गिरोह के सरगना धनंजय फिस्के और केतन नायर के लिए बैंक खाते, चेक बुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड जुटाकर उपलब्ध कराते थे। ठगी की रकम पर उन्हें कमीशन दिया जाता था। संवाद
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