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युवाओं के रोल मॉडल बने कुमार कार्तिकेय
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रणजी ट्रॉफी के साथ कुमार कार्तिकेय।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। बल्दीराय क्षेत्र के कुंवासी गांव के रहने वाले क्रिकेटर कुमार कार्तिकेय अपने शानदार प्रदर्शन की वजह से युवाओं के रोल मॉडल बन गए हैं। लंबे संघर्ष के बाद सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे कुमार कार्तिकेय के खेल से क्षेत्र के युवा काफी प्रभावित हैं। तमाम युवा खेल में अपना कॅरिअर तलाश रहे हैं।
पीएसी में कार्यरत कुंवासी निवासी श्याम नाथ सिंह के पुत्र कार्तिकेय ने क्रिकेट सीखने के लिए घर छोड़ने का फैसला लिया था। उन्होंने दिल्ली जाकर क्रिकेट एकेडमी ज्वॉइन की। खर्च चलाने के लिए गाजियाबाद की एक फैक्टरी में काम कर वे हर रोज 70 से 80 किलोमीटर का सफर तय कर एकेडमी जाते थे। कभी-कभी तो भूख लगने पर उन्हें बिस्किट खाकर गुजारा करना पड़ता। यह क्रम करीब साल भर चला। इस बात की जानकारी जब क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज को हुई तो उन्होंने कार्तिकेय के लिए लंच की व्यवस्था कराई। कार्तिकेय ने एक साल तक संघर्ष किया। उत्तर प्रदेश की रणजी टीम से मौका नहीं मिलने पर उन्होंने मध्य प्रदेश की टीम में जगह बनाने की कोशिश की।
मध्य प्रदेश की टीम में शामिल हुए तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कार्तिकेय का प्रदर्शन ऐसा रहा कि पहली बार उनकी फिरकी गेंदबाजी की बदौलत मध्य प्रदेश की टीम रणजी ट्रॉफी की चैैंपियन बनी। कुमार कार्तिकेय जब भी क्रिकेट खेलते हैं तो गांव और क्षेत्र के लोग लगातार लाइव मैच देखते हैं। रणजी ट्रॉफी जीतने के बाद कार्तिकेय को आईपीएल में भी खेलने का मौका मिला। उन्हें 30 अप्रैल 2022 को मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल किया गया। यहां भी उन्होंने अपने प्रदर्शन की छाप छोड़ी। कार्तिकेय के पिता श्याम नाथ सिंह कहते हैं कि कार्तिकेय का क्रिकेट के प्रति इतना जुनून था कि वह खाना-पीना तक भूल जाता था। कानपुर में तैनाती के लिए क्रिकेट ग्रांउड पर मुझे या कार्तिकेय की माता को खाना लेकर जाना पड़ता था। एक स्टंप लगाकर गेंदबाजी की प्रैक्टिस करना उसकी दिनचर्या थी। उनकी सफलता से क्षेत्र के युवा प्रभावित हैं। तमाम युवा विभिन्न खेलों में अपना कॅरिअर तलाश रहे हैं।
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टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना
कुमार कार्तिकेय कहते हैं कि उनका सपना है कि टीम इंडिया में शामिल होकर देश के लिए खेलें। इसके लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना जरूरी है। कोच और सीनियर खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में मेहनत की जा रही है। उम्मीद है कि सपना पूरा होगा।
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पीएसी में कार्यरत कुंवासी निवासी श्याम नाथ सिंह के पुत्र कार्तिकेय ने क्रिकेट सीखने के लिए घर छोड़ने का फैसला लिया था। उन्होंने दिल्ली जाकर क्रिकेट एकेडमी ज्वॉइन की। खर्च चलाने के लिए गाजियाबाद की एक फैक्टरी में काम कर वे हर रोज 70 से 80 किलोमीटर का सफर तय कर एकेडमी जाते थे। कभी-कभी तो भूख लगने पर उन्हें बिस्किट खाकर गुजारा करना पड़ता। यह क्रम करीब साल भर चला। इस बात की जानकारी जब क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज को हुई तो उन्होंने कार्तिकेय के लिए लंच की व्यवस्था कराई। कार्तिकेय ने एक साल तक संघर्ष किया। उत्तर प्रदेश की रणजी टीम से मौका नहीं मिलने पर उन्होंने मध्य प्रदेश की टीम में जगह बनाने की कोशिश की।
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मध्य प्रदेश की टीम में शामिल हुए तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कार्तिकेय का प्रदर्शन ऐसा रहा कि पहली बार उनकी फिरकी गेंदबाजी की बदौलत मध्य प्रदेश की टीम रणजी ट्रॉफी की चैैंपियन बनी। कुमार कार्तिकेय जब भी क्रिकेट खेलते हैं तो गांव और क्षेत्र के लोग लगातार लाइव मैच देखते हैं। रणजी ट्रॉफी जीतने के बाद कार्तिकेय को आईपीएल में भी खेलने का मौका मिला। उन्हें 30 अप्रैल 2022 को मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल किया गया। यहां भी उन्होंने अपने प्रदर्शन की छाप छोड़ी। कार्तिकेय के पिता श्याम नाथ सिंह कहते हैं कि कार्तिकेय का क्रिकेट के प्रति इतना जुनून था कि वह खाना-पीना तक भूल जाता था। कानपुर में तैनाती के लिए क्रिकेट ग्रांउड पर मुझे या कार्तिकेय की माता को खाना लेकर जाना पड़ता था। एक स्टंप लगाकर गेंदबाजी की प्रैक्टिस करना उसकी दिनचर्या थी। उनकी सफलता से क्षेत्र के युवा प्रभावित हैं। तमाम युवा विभिन्न खेलों में अपना कॅरिअर तलाश रहे हैं।
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टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना
कुमार कार्तिकेय कहते हैं कि उनका सपना है कि टीम इंडिया में शामिल होकर देश के लिए खेलें। इसके लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहना जरूरी है। कोच और सीनियर खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में मेहनत की जा रही है। उम्मीद है कि सपना पूरा होगा।