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स्मार्ट होंगे परिषदीय विद्यालयों के क्लास रूम

Fri, 04 Sep 2020 10:42 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2020 10:42 PM IST
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सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों की कक्षाओं को डिजिटलाइज/स्मार्ट क्लास के रूप में परिवर्तित करने के लिए शासन ने तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। अगले कुछ महीनों में चरणबद्घ तरीके से इस व्यवस्था को लागू करते हुए हर स्कूल को कायाकल्प के साथ-साथ स्मार्ट स्कूल में परिवर्तित किया जाएगा। स्मार्ट क्लास बन जाने के बाद शिक्षकों को पढ़ाने के लिए डिजिटल मंच मिलेगा, साथ ही बच्चों को भी पढ़ने में आनंद आएगा।
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स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आनंद ने सभी बीएसए को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विद्यालयों में सिर्फ 30 से 50 हजार रुपये की लागत से स्मार्ट स्कूल के रूप में परिवर्तित कराया जाएगा। शिक्षकों को पढ़ाने के लिए डिजिटल मंच दिया जाएगा। इसके तहत उनको पढ़ाने में अलग आनंद की अनुभूति होगी। साथ ही बच्चों को भी नए तरीके से पढ़ने में आनंद आएगा। स्मार्ट क्लास से विद्यालय का शैक्षिक वातावरण भी बदलेगा।
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यही नहीं स्मार्ट क्लास संचालन के लिए विद्युत कनेक्शन करवाया जाएगा। जहां बिजली व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, उन विद्यालयों में सोलर लाइट के साथ इनवर्टर की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए अधिकतम 18 हजार रुपये का बजट स्वीकृत किया जाएगा।
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ऐसे शिक्षक जो स्मार्ट फोन का उपयोग नहीं करते हैं, उनका उत्तरदायित्व होगा कि दीक्षा एप पर उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री को पेन ड्राइव में बीआरसी से डाउनलोड कर विद्यालय में स्मार्ट क्लास संचालन में प्रयोग करेंगे। पेन ड्राइव कंपोजिट ग्रांट के मद से खरीदी जाएगी। इंटरनेट के लिए प्रतिमाह 200 रुपये का व्यय इसी ग्रांट से किया जाएगा।
सामुदायिक सहभागिता से बनाई जाए स्मार्ट क्लास
बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विकास के लिए स्वयंसेवी संगठनों की मदद ली जाएगी। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने डीएम को पत्र लिखकर परिषदीय विद्यालयों में कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, स्मार्ट टीवी की व्यवस्था कराने को कहा है।
विद्यालयों को डिजिटल लर्निंग के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ग्राम पंचायत की निधियों से सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से काम कराया जाएगा। निजी कंपनियों के सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी) मद से भी व्यवस्था कराई जा सकती है। स्वयंसेवी संगठन, ट्रस्ट, व्यापारिक संगठन, औद्योगिक संगठन व गैर सरकारी संस्थाएं भी स्कूलों को गोद लेकर यह व्यवस्था दे सकती हैं।

सुनिश्चित होगी सामुदायिक सहभागिता
शासन के निर्देश के अनुसार विद्यालयों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कराया जाएगा। इसके लिए सामुदायिक सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी।
-संतोष सक्सेना, बीएसए
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