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मुकदमों की ऑनलाइन सुनवाई में बाधा बन रही सर्वर की समस्या
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सुल्तानपुर। जिले का दीवानी न्यायालय मुकदमों के बोझ तले दबा हुआ है। इसमें दो लाख, 10 हजार, 326 मुकदमे लंबित हैं। कोरोना महामारी के कारण बंद चल रही अदालत खुल गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर अब सिविल मामलों में भी सुनवाई होने लगी है।
जमानत प्रार्थनापत्र, जमीन-जायदाद से जुड़े सिविल प्रकृति के मुकदमे और अन्य आवश्यक प्रार्थनापत्र ऑनलाइन दायर किए जा रहे हैं। न्यायिक अधिकारी ऑनलाइन मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं। ऑनलाइन सुनवाई में खराब सर्वर की समस्या बाधा बन रही है।
जिले के दीवानी न्यायालय में सुल्तानपुर व अमेठी जनपद के फौजदारी व जमीन-जायदाद से जुड़े सिविल प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई होती है। कोरोना महामारी के कारण पिछले माह सिविल प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई बंद हो गई थी। केवल जमानत प्रार्थनापत्र व रिलीज प्रार्थनापत्र की ऑनलाइन सुनवाई हो रही है।
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7 जून से हाईकोर्ट के आदेश पर फौजदारी के साथ सिविल प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई होने लगी है। अब जमानत प्रार्थनापत्र के साथ ही सिविल प्रकृति के मुकदमे ऑनलाइन दायर किए जा रहे हैं। कोर्ट में लोगों की भीड़-भाड़ बढ़ गई है। मुकदमों को ऑनलाइन दायर किए जाने पर वादकारियों की जेब ढीली हो रही है। इसके लिए वादकारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। प्रति पेज 10 रुपये से लेकर 20 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
ऑनलाइन सुनवाई में सबसे बड़ी बाधा सर्वर पहुंचा रहा है। इससे केस की सुनवाई में दिक्कतें आ रही हैं। केंद्रीयकृत कंप्यूटर कक्ष में मुकदमे दायर न होने से अधिवक्ता व वादकारी परेशान हैं। वादकारियों को त्वरित न्याय नहीं मिल पा रहा है। वादकारी न्याय पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
धनपतगंज के वादकारी विनोद सिंह ने बताया कि उन्हें नकल देने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। पैरवी करने आए कुड़वार के रमेश कुमार ने बताया कि सर्वर की दिक्तत से केस में सुनवाई नहीं हो रही है।
कादीपुर के दिनेश कुमार ने बताया कि जमानत पर सुनवाई कराने के लिए परेशान हैं। जामो के सियाराम ने बताया कि हत्या के मामले में साक्ष्य न होने से मामला अधर में है। कोर्ट परिसर में प्रवेश करने के लिए दक्षिणी छोर पर स्थित मुख्य गेट को खोल दिया गया है जबकि पूर्वी छोर के दोनों गेटों को बंद कर दिया गया है। मुख्य गेट पर तैनात रहने वाले पुलिस कर्मी नदारद हैं। पूर्वी गेट पर चढ़कर लोग प्रवेश कर रहे हैं। कोर्ट परिसर में कोरोना से बचाव करने को लेकर लापरवाही खुलेआम दिखाई पड़ रही है।
दीवानी न्यायालय में हो रही ऑनलाइन सुनवाई को लेकर अधिवक्ता संतुष्ट नहीं हैं। सिविल मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अनीस खां ने बताया कि ऑनलाइन सुनवाई में सर्वर की समस्या आड़े आ रही है। इससे बातें स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं पड़ती हैं। कोर्ट को दस्तावेजी साक्ष्य के बारे में समझाने में परेशानी हो रही है।
अधिवक्ता अब्बास अहमद खां ने बताया कि दावा की नकल व प्रश्नोत्तरी नहीं मिल रही है। सिविल मामलों में सीपीसी की धारा 151 के तहत दी जाने वाली अर्जी पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। फौजदारी के अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद शुक्ल राजन बताते हैं कि आरोपियों का सरेंडर नहीं लिया जा रहा है जबकि पुलिस रिमांड पर आरोपी जेल भेजे जा रहे हैं।
तकनीकी कमी के कारण सुनवाई में समस्या आ रही है। धनपतगंज थाने से जुड़े एनडीपीएस एक्ट की जमानत अर्जी पर 6 अप्रैल से सुनवाई नहीं हो पा रही है और आरोपी दो अप्रैल से जेल काट रहा है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमनाथ पांडेय ने बताया कि पुराने लंबित केस में सुनवाई न होने से वादकारी परेशान हैं। काफी संख्या में लंबित मुकदमों में सुनवाई ठप है।
अधिवक्ता अयूब उल्ला खां का कहना है कि पूर्वी छोर के दोनों गेट बंद कर देने से आने-जाने में परेशानी हो रही है। कोविड-19 से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। अधिवक्ता संतोष पांडेय कहते हैं कि मुख्य गेट पर सुरक्षा का कोई इंतजाम न होने से लोग बेरोकटोक अंदर प्रवेश कर रहे हैं। बिना मास्क के ही लोग कोर्ट परिसर में टहलते हैं। इससे लोगों की सेहत खतरे में है।
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जमानत प्रार्थनापत्र, जमीन-जायदाद से जुड़े सिविल प्रकृति के मुकदमे और अन्य आवश्यक प्रार्थनापत्र ऑनलाइन दायर किए जा रहे हैं। न्यायिक अधिकारी ऑनलाइन मुकदमों की सुनवाई कर रहे हैं। ऑनलाइन सुनवाई में खराब सर्वर की समस्या बाधा बन रही है।
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जिले के दीवानी न्यायालय में सुल्तानपुर व अमेठी जनपद के फौजदारी व जमीन-जायदाद से जुड़े सिविल प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई होती है। कोरोना महामारी के कारण पिछले माह सिविल प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई बंद हो गई थी। केवल जमानत प्रार्थनापत्र व रिलीज प्रार्थनापत्र की ऑनलाइन सुनवाई हो रही है।
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7 जून से हाईकोर्ट के आदेश पर फौजदारी के साथ सिविल प्रकृति के मुकदमों की सुनवाई होने लगी है। अब जमानत प्रार्थनापत्र के साथ ही सिविल प्रकृति के मुकदमे ऑनलाइन दायर किए जा रहे हैं। कोर्ट में लोगों की भीड़-भाड़ बढ़ गई है। मुकदमों को ऑनलाइन दायर किए जाने पर वादकारियों की जेब ढीली हो रही है। इसके लिए वादकारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। प्रति पेज 10 रुपये से लेकर 20 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
ऑनलाइन सुनवाई में सबसे बड़ी बाधा सर्वर पहुंचा रहा है। इससे केस की सुनवाई में दिक्कतें आ रही हैं। केंद्रीयकृत कंप्यूटर कक्ष में मुकदमे दायर न होने से अधिवक्ता व वादकारी परेशान हैं। वादकारियों को त्वरित न्याय नहीं मिल पा रहा है। वादकारी न्याय पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
धनपतगंज के वादकारी विनोद सिंह ने बताया कि उन्हें नकल देने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। पैरवी करने आए कुड़वार के रमेश कुमार ने बताया कि सर्वर की दिक्तत से केस में सुनवाई नहीं हो रही है।
कादीपुर के दिनेश कुमार ने बताया कि जमानत पर सुनवाई कराने के लिए परेशान हैं। जामो के सियाराम ने बताया कि हत्या के मामले में साक्ष्य न होने से मामला अधर में है। कोर्ट परिसर में प्रवेश करने के लिए दक्षिणी छोर पर स्थित मुख्य गेट को खोल दिया गया है जबकि पूर्वी छोर के दोनों गेटों को बंद कर दिया गया है। मुख्य गेट पर तैनात रहने वाले पुलिस कर्मी नदारद हैं। पूर्वी गेट पर चढ़कर लोग प्रवेश कर रहे हैं। कोर्ट परिसर में कोरोना से बचाव करने को लेकर लापरवाही खुलेआम दिखाई पड़ रही है।
दीवानी न्यायालय में हो रही ऑनलाइन सुनवाई को लेकर अधिवक्ता संतुष्ट नहीं हैं। सिविल मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अनीस खां ने बताया कि ऑनलाइन सुनवाई में सर्वर की समस्या आड़े आ रही है। इससे बातें स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं पड़ती हैं। कोर्ट को दस्तावेजी साक्ष्य के बारे में समझाने में परेशानी हो रही है।
अधिवक्ता अब्बास अहमद खां ने बताया कि दावा की नकल व प्रश्नोत्तरी नहीं मिल रही है। सिविल मामलों में सीपीसी की धारा 151 के तहत दी जाने वाली अर्जी पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। फौजदारी के अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद शुक्ल राजन बताते हैं कि आरोपियों का सरेंडर नहीं लिया जा रहा है जबकि पुलिस रिमांड पर आरोपी जेल भेजे जा रहे हैं।
तकनीकी कमी के कारण सुनवाई में समस्या आ रही है। धनपतगंज थाने से जुड़े एनडीपीएस एक्ट की जमानत अर्जी पर 6 अप्रैल से सुनवाई नहीं हो पा रही है और आरोपी दो अप्रैल से जेल काट रहा है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमनाथ पांडेय ने बताया कि पुराने लंबित केस में सुनवाई न होने से वादकारी परेशान हैं। काफी संख्या में लंबित मुकदमों में सुनवाई ठप है।
अधिवक्ता अयूब उल्ला खां का कहना है कि पूर्वी छोर के दोनों गेट बंद कर देने से आने-जाने में परेशानी हो रही है। कोविड-19 से बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। अधिवक्ता संतोष पांडेय कहते हैं कि मुख्य गेट पर सुरक्षा का कोई इंतजाम न होने से लोग बेरोकटोक अंदर प्रवेश कर रहे हैं। बिना मास्क के ही लोग कोर्ट परिसर में टहलते हैं। इससे लोगों की सेहत खतरे में है।