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गोमती नदी का जलस्तर स्थिर, बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ीं
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15. धनपतगंज के औदहा गांव में पानी में डूबा हैंडपंप।
- फोटो : SULTANPUR
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धनपतगंज (सुल्तानपुर)। दो दिनों तक लगातार हुई बारिश के बाद गोमती नदी का जलस्तर स्थिर हो गया है। बाढ़ से राहत शिविरों व दूसरी जगह शरण लिए 19 गांवों के बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। प्रभावित परिवार भोजन, पशुओं का चारा, इलाज, रोशनी समेत अन्य दिक्कतों से जूझ रहे हैं। बाढ़ के पानी से गांव घिरने व फसलों के जलमग्न होने से उनके सामने आगे की समस्या खड़ी हो गई है। राहत शिविरों में काफी संख्या में परिवार खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। हालांकि अधिकारी राहत शिविरों का जायजा ले रहे हैं लेकिन पीड़ितों को पूरी सुविधाएं अभी तक नहीं मिल सकी हैं। कुछ स्थानीय लोगों की ओर से बाढ़ शिविरों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ भोजन के लिए भंडारा चलाया जा रहा है।
रात अंधेरे में काट रहे बाढ़ पीड़ित
राहत शिविर में ठिकाना बनाए अमऊ गांव के बाढ़ पीड़ितों को रात में उजाले के लिए अभी तक प्रशासन की ओर से केरोसिन नहीं उपलब्ध कराया जा सका है। केरोसिन नहीं मिलने पर मंगलवार को अमऊ की सुनीता समेत अन्य महिलाएं खाली डिब्बा लेकर वापस आ गईं। बिजली नहीं है और केरोसिन नहीं मिलने से रात के अंधेरे में रहना पड़ रहा है। अंधेरे की वजह से सांप व बिच्छू समेत अन्य कीड़ों का डर बना है।
अभिभावक बच्चों को नाव से स्वयं ले गए स्कूल
बाढ़ से घिरे औदहा के कुछ ग्रामीण आश्रय स्थल में ठिकाना लिए हैं और कुछ परिवार गांव में रह रहे हैं। सुविधाएं नहीं मिलने से गांव के ग्रामीण बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए स्वयं नाव की व्यवस्था किए। सुबह बच्चों को बाढ़ के पानी से पार कर सूखे स्थान पर पहुंचाए और शाम को नाव से वापस लाए। गांव के अशोक पांडेय ने बताया कि सरकारी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। सिर्फ आश्वासन मिला है।
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पानी के रास्ते बच्चे का इलाज कराने निकली महिला
बाढ़ के पानी से घिरे जज्जौर गांव के ग्रामीणों की भी मुश्किलें कम नहीं हैं। गांव में रह रहे कुछ ग्रामीणों को इलाज तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित अपने बच्चे को गांव महिला रेनू गुप्ता कंधे पर बच्चे को लेकर पानी के रास्ते इलाज कराने निकल पड़ीं। बताया कि इसी तरह गांव में कई लोग बीमार चल रहे हैं।
खुले आसमान के नीचे बनी बाढ़ राहत की चौकी
बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाई गई चौकी का सच भी बुधवार को सामने आया है। प्रशासन ने धर्मदासपुर बाढ़ चौकी का राहत शिविर खुले आसमान के नीचे बना दिया है। गांव के कुछ ग्रामीण इसी बाढ़ चौकी पर खुले आसमान के नीचे शरण लिए हैं। ये परिवार दिन में तेज धूप व रात में ओस का सामना कर रहे हैं।
औदहा में पानी से घिरा हैंडपंप
बाढ़ से घिरे औदहा गांव में सब तहस-नहस हो गया है। गांव में पेयजल के लिए लगे कई हैंडपंप पानी में डूब गए हैं। पानी में डूबने से हैंडपंप का पानी दूषित होने की आशंका से ग्रामीण परेशान हैं। गांव में रह रहे कुछ लोगों को पानी की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। इसी गांव में पशुशाला में बाढ़ का पानी घुसने से पशुुुओं के लिए रखा गया भूसा भी नष्ट हो गया है। फसलें जलमग्न होने से पशुुओं के लिए चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
प्रमुख की ओर से संचालित भंडारा
बाढ़ प्रभावितों की मदद में प्रशासन के साथ स्थानीय लोग भी आगे आए हैं। पांच दिनों से पानी से घिरे गांवों के ग्रामीणों को स्थानीय लोग भी मदद पहुंचा रहे हैं। धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू की ओर से सेवरा गांव में भंडारा शुरू किया गया है। सुबह व शाम संचालित भंडारे में बाढ़ पीड़ित परिवार को भोजन कराया जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख स्वयं भंडारे की निगरानी कर रहे हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए की गई व्यवस्था
अपर जिलाधिकारी वित्त/दैवी आपदा अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इलाज, शिविर, भोजन, पशुओं के चारा आदि की व्यवस्था की गई है। संबंधित अधिकारियों को जलस्तर की स्थिति पर नजर रखने का निर्देश डीएम की ओर से दिया गया है। इसमें लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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रात अंधेरे में काट रहे बाढ़ पीड़ित
राहत शिविर में ठिकाना बनाए अमऊ गांव के बाढ़ पीड़ितों को रात में उजाले के लिए अभी तक प्रशासन की ओर से केरोसिन नहीं उपलब्ध कराया जा सका है। केरोसिन नहीं मिलने पर मंगलवार को अमऊ की सुनीता समेत अन्य महिलाएं खाली डिब्बा लेकर वापस आ गईं। बिजली नहीं है और केरोसिन नहीं मिलने से रात के अंधेरे में रहना पड़ रहा है। अंधेरे की वजह से सांप व बिच्छू समेत अन्य कीड़ों का डर बना है।
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अभिभावक बच्चों को नाव से स्वयं ले गए स्कूल
बाढ़ से घिरे औदहा के कुछ ग्रामीण आश्रय स्थल में ठिकाना लिए हैं और कुछ परिवार गांव में रह रहे हैं। सुविधाएं नहीं मिलने से गांव के ग्रामीण बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए स्वयं नाव की व्यवस्था किए। सुबह बच्चों को बाढ़ के पानी से पार कर सूखे स्थान पर पहुंचाए और शाम को नाव से वापस लाए। गांव के अशोक पांडेय ने बताया कि सरकारी सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। सिर्फ आश्वासन मिला है।
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पानी के रास्ते बच्चे का इलाज कराने निकली महिला
बाढ़ के पानी से घिरे जज्जौर गांव के ग्रामीणों की भी मुश्किलें कम नहीं हैं। गांव में रह रहे कुछ ग्रामीणों को इलाज तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई दिनों से तेज बुखार से पीड़ित अपने बच्चे को गांव महिला रेनू गुप्ता कंधे पर बच्चे को लेकर पानी के रास्ते इलाज कराने निकल पड़ीं। बताया कि इसी तरह गांव में कई लोग बीमार चल रहे हैं।
खुले आसमान के नीचे बनी बाढ़ राहत की चौकी
बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाई गई चौकी का सच भी बुधवार को सामने आया है। प्रशासन ने धर्मदासपुर बाढ़ चौकी का राहत शिविर खुले आसमान के नीचे बना दिया है। गांव के कुछ ग्रामीण इसी बाढ़ चौकी पर खुले आसमान के नीचे शरण लिए हैं। ये परिवार दिन में तेज धूप व रात में ओस का सामना कर रहे हैं।
औदहा में पानी से घिरा हैंडपंप
बाढ़ से घिरे औदहा गांव में सब तहस-नहस हो गया है। गांव में पेयजल के लिए लगे कई हैंडपंप पानी में डूब गए हैं। पानी में डूबने से हैंडपंप का पानी दूषित होने की आशंका से ग्रामीण परेशान हैं। गांव में रह रहे कुछ लोगों को पानी की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। इसी गांव में पशुशाला में बाढ़ का पानी घुसने से पशुुुओं के लिए रखा गया भूसा भी नष्ट हो गया है। फसलें जलमग्न होने से पशुुओं के लिए चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
प्रमुख की ओर से संचालित भंडारा
बाढ़ प्रभावितों की मदद में प्रशासन के साथ स्थानीय लोग भी आगे आए हैं। पांच दिनों से पानी से घिरे गांवों के ग्रामीणों को स्थानीय लोग भी मदद पहुंचा रहे हैं। धनपतगंज ब्लॉक प्रमुख यशभद्र सिंह मोनू की ओर से सेवरा गांव में भंडारा शुरू किया गया है। सुबह व शाम संचालित भंडारे में बाढ़ पीड़ित परिवार को भोजन कराया जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख स्वयं भंडारे की निगरानी कर रहे हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए की गई व्यवस्था
अपर जिलाधिकारी वित्त/दैवी आपदा अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इलाज, शिविर, भोजन, पशुओं के चारा आदि की व्यवस्था की गई है। संबंधित अधिकारियों को जलस्तर की स्थिति पर नजर रखने का निर्देश डीएम की ओर से दिया गया है। इसमें लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।