फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Principal and Secretary could not account for Rs 60 lakh

Sultanpur News: 60 लाख रुपये का हिसाब नहीं दे पाए प्रधान और सचिव

Fri, 15 Mar 2024 01:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Fri, 15 Mar 2024 01:55 AM IST
विज्ञापन
Principal and Secretary could not account for Rs 60 lakh
सुल्तानपुर। जिले के 18 ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों ने करीब 60 लाख रुपये का वारा न्यारा कर डाला। ग्राम पंचायतों के हुए विशेष ऑडिट में इसका खुलासा हुआ है। विशेष टीम को तत्कालीन प्रधान व पंचायत सचिव भुगतान के रिकॉर्ड नहीं दिखा सके। इस पर डीएम व डीपीआरओ ने आरोपी प्रधानों व पंचायत सचिवों को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन

विशेष ऑडिट की टीम ने वित्तीय वर्ष 2014-2015 में सरकारी धनराशि से कराए गए कार्यों के भुगतान की जांच में दो ग्राम पंचायतों में घोटाला होना पाया। वित्तीय वर्ष 2015-2016 की जांच में सात ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये का घोटाला सामने आया है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2016-2017 में कराए गए कार्यों के भुगतान में नौ ग्राम पंचायतों में अनियमितता मिली। तीनों वित्तीय वर्ष में 18 ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों व तत्कालीन पंचायत सचिवों की ओर से विभिन्न कार्यों के मद में करीब 60 लाख रुपये मनमाना भुगतान किया गया।
विज्ञापन

विशेष ऑडिट में घोटाला का खुलासा होने पर डीएम कृत्तिका ज्योत्स्ना ने 18 ग्राम पंचायतों के तत्कालीन प्रधानों और डीपीआरओ ने तत्कालीन पंचायत सचिवों को नोटिस जारी करते हुए साक्ष्य समेत जवाब मांगा है। आरोपियों को दो माह के भीतर साक्ष्यों समेत जवाब लेखा परीक्षक के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि इसमें दो आरोपी पंचायत सचिवों व एक तत्कालीन प्रधान की मौत हो चुकी है। इसमें कई पंचायत सचिव सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

तत्कालीन डीपीआरओ भुगतान को करते रहे नजरअंदाज
नियम के मुताबिक ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों व पंचायत सचिवों की ओर से राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त समेत विभागीय धनराशि से कराए जाने वाले कार्यों के भुगतान पर नजर रखने के निर्देश हैं। शासन की इस व्यवस्था को तत्कालीन डीपीआरओ नजरअंदाज करते रहे और भुगतान होता रहा। नतीजतन 18 ग्राम पंचायतों में करीब 60 लाख रुपये का वारा-न्यारा कर दिया गया। कहा जा रहा है कि उस समय विभागीय अधिकारियों की ओर से भुगतान की जांच की गई होती तो सरकारी राशि का इतने बड़े पैमाने पर दुरुपयोग न हुआ होता।
कहां कितना हुआ घोटाला
विशेष ऑडिट टीम ने वित्तीय वर्ष 2014-15 के कार्यों में मोतिगरपुर की अहदा में 2,50,841 लाख, शेषपुर में 1,56,582 रुपये का गोलमाल पकड़ा है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में मोतिगरपुर की हमजाबाद में 4,59,289, लंभुआ के हरिहरपुर में 3,63,200, जगन्नाथपुर में 3,64,000, वेदूपारा में 2,64,400, घाटमपुर उत्तरी में 2,94,091, तातोमुरैनी में 5,30,000 व परसुरामपुर में 2,86,000 लाख रुपये का घोटाला समाने आया। वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुड़वार के नौगवां रायतासी में 4,53,190, नौगवांतीर में 1,25,760, धनपतगंज के सेवरा में 2,70,180 व ब्राह्मिपुर में 4,30,373, अखंडनगर के डोमापुर में 1,26,000, दोस्तपुर के सुखऊपुर अशरफपट्टी में 9,82,354 व नरसिंहपुर में 5,09,400, लंभुआ के सबसुखपुर में 2,97,000 व परसुरामपुर में 1,49,118 रुपये का घोटला पकड़ा गया है।

डीपीआरओ को रखना चाहिए था रिकॉर्ड
पुराना मामला होने की वजह से आरोपी ग्राम पंचायतें ऑडिट में भुगतान का केवल रिकॉर्ड नहीं दिखा सकी हैं। इसी वजह से टीम घोटाला मान रही है, जबकि अमूमन ग्राम पंचायतों की ओर से कार्य कराया गया है। फिलहाल तत्कालीन डीपीआरओ को इस पर नजर रखनी चाहिए थी। साथ ही रिकॉर्ड रखवाना चाहिए था।
- अभिषेक शुक्ल, जिला पंचायतराज अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed