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दूसरी बार भी योगी सरकार में नहीं मिली जिले को जगह
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सुल्तानपुर। योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में लगातार दूसरी बार जिले को प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। दो चुनावों से जिले के पांच में से चार विधायक देने के बावजूद सरकार में जगह नहीं मिलने से लोगों को मायूस होना पड़ा है। 2012 में सभी सीटें सपा के खाते में जाने के बाद भी जिले से कोई मंत्री नहीं बन सका था
2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच में से चार सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। तब भी जिले के लोगों को उम्मीद थी कि जिले से कोई न कोई मंत्री जरूर बनेगा। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों को निराशा हाथ लगी थी। योगी आदित्यनाथ की सरकार में जिले का कोई विधायक मंत्री नहीं बन सका था। सरकार के पांच साल के कार्यकाल में हुए फेरबदल में भी जिले को कुछ हासिल नहीं हुआ। पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने 2017 के नतीजों को दोहराते हुए चार सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। जिले के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार कोई न कोई यहां से मंत्री जरूर बनेगा। खासतौर पर सुल्तानपुर से निर्वाचित पूर्व मंत्री विनोद सिंह और सदर से विधायक बने राजप्रसाद उपाध्याय की चर्चा आम रही। चर्चा के पीछे यह तर्क गढ़े गए कि विनोद सिंह वरिष्ठ नेता हैं। साथ ही वे बसपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें मौका मिल सकता है।
राजप्रसाद उपाध्याय के दावेदारी के पीछे यह कहा गया कि वे निषाद पार्टी के कोटे से विधायक निर्वाचित हुए हैं। उन्हें निषाद पार्टी के कोटे से सरकार में स्थान मिलने की गुंजाइश है। शुक्रवार को सरकार के गठन के बाद जिले के लोगों को फिर निराश होना पड़ा है। इसके पहले 2012 में जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर सपा ने जीत हासिल की थी। लगातार दो बार विधायक निर्वाचित होने की वजह से तब सुल्तानपुर विधायक अनूप संडा का दावा मजबूत माना जा रहा था लेकिन सपा की सरकार में भी जिले को स्थान नहीं मिल सका था। 2007 में प्रदेश की बसपा की सरकार में विनोद सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जरूर रहे। उनके बाद प्रदेश की सरकार में जिले से अब तक कोई मंत्री नहीं बन सका है।
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2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की पांच में से चार सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। तब भी जिले के लोगों को उम्मीद थी कि जिले से कोई न कोई मंत्री जरूर बनेगा। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों को निराशा हाथ लगी थी। योगी आदित्यनाथ की सरकार में जिले का कोई विधायक मंत्री नहीं बन सका था। सरकार के पांच साल के कार्यकाल में हुए फेरबदल में भी जिले को कुछ हासिल नहीं हुआ। पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने 2017 के नतीजों को दोहराते हुए चार सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। जिले के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार कोई न कोई यहां से मंत्री जरूर बनेगा। खासतौर पर सुल्तानपुर से निर्वाचित पूर्व मंत्री विनोद सिंह और सदर से विधायक बने राजप्रसाद उपाध्याय की चर्चा आम रही। चर्चा के पीछे यह तर्क गढ़े गए कि विनोद सिंह वरिष्ठ नेता हैं। साथ ही वे बसपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें मौका मिल सकता है।
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राजप्रसाद उपाध्याय के दावेदारी के पीछे यह कहा गया कि वे निषाद पार्टी के कोटे से विधायक निर्वाचित हुए हैं। उन्हें निषाद पार्टी के कोटे से सरकार में स्थान मिलने की गुंजाइश है। शुक्रवार को सरकार के गठन के बाद जिले के लोगों को फिर निराश होना पड़ा है। इसके पहले 2012 में जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर सपा ने जीत हासिल की थी। लगातार दो बार विधायक निर्वाचित होने की वजह से तब सुल्तानपुर विधायक अनूप संडा का दावा मजबूत माना जा रहा था लेकिन सपा की सरकार में भी जिले को स्थान नहीं मिल सका था। 2007 में प्रदेश की बसपा की सरकार में विनोद सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जरूर रहे। उनके बाद प्रदेश की सरकार में जिले से अब तक कोई मंत्री नहीं बन सका है।
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