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Sultanpur News: धान पर कीटों का प्रकोप, पत्तियां पीली, फसलों पर संकट
Wed, 23 Sep 2026 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:16 AM IST
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बल्दीराय क्षेत्र में धान की फसल में लगा रोग। संवाद
सुल्तानपुर। बारिश के बाद बढ़ी नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से धान की फसल पर कीटों का हमला शुरू हो गया है। जिले में 1,00,864 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। कई क्षेत्रों में तना छेदक और सूंड़ी के प्रकोप से पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं।
फसल प्रभावित होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में दीमक, जड़ की सूंड़ी, पत्ती लपेटक, तना छेदक और हरे-भूरे फुदके का प्रकोप बढ़ा है। दीमक और जड़ की सूंड़ी जड़ों को नुकसान पहुंचाकर पौधों को कमजोर करती हैं। तना छेदक पौधे को अंदर से खोखला कर उसकी बढ़वार रोक देता है। बल्दीराय के देवरा निवासी किसान भगवान दास तिवारी ने बताया कि धान में रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। बचनगंज निवासी किसान साहेब लाल ने पत्ती लपेटन और सफेद टिड्डी रोग की जानकारी दी। इससे पैदावार घटने की चिंता बनी हुई है।
इस तरह से करें बचाव
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सीके त्रिपाठी ने बताया कि रोग के लक्षण पहचानकर ही दवा का छिड़काव करें। झुलसा रोग में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग किया जा सकता है। भूरा धब्बा रोग के लिए मैनकोजेब उपयोगी है। तना छेदक और पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप में फफूंदनाशी के बजाय अनुशंसित कीटनाशी का उपयोग करें। दवा की मात्रा फसल की अवस्था और उत्पाद के अनुसार निर्धारित रखें।
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फसल प्रभावित होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में दीमक, जड़ की सूंड़ी, पत्ती लपेटक, तना छेदक और हरे-भूरे फुदके का प्रकोप बढ़ा है। दीमक और जड़ की सूंड़ी जड़ों को नुकसान पहुंचाकर पौधों को कमजोर करती हैं। तना छेदक पौधे को अंदर से खोखला कर उसकी बढ़वार रोक देता है। बल्दीराय के देवरा निवासी किसान भगवान दास तिवारी ने बताया कि धान में रोग का प्रकोप शुरू हो गया है। बचनगंज निवासी किसान साहेब लाल ने पत्ती लपेटन और सफेद टिड्डी रोग की जानकारी दी। इससे पैदावार घटने की चिंता बनी हुई है।
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इस तरह से करें बचाव
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सीके त्रिपाठी ने बताया कि रोग के लक्षण पहचानकर ही दवा का छिड़काव करें। झुलसा रोग में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग किया जा सकता है। भूरा धब्बा रोग के लिए मैनकोजेब उपयोगी है। तना छेदक और पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप में फफूंदनाशी के बजाय अनुशंसित कीटनाशी का उपयोग करें। दवा की मात्रा फसल की अवस्था और उत्पाद के अनुसार निर्धारित रखें।
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