फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   parishadiy school

830 परिषदीय विद्यालयों में नहीं बाउंड्रीवाल

Fri, 10 Jun 2022 11:51 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jun 2022 11:51 PM IST
विज्ञापन
parishadiy school
बल्दीराय में बांउड्रीविहीन पूरे सुखदेव प्राथमिक विद्यालय। - फोटो : SULTANPUR
सुल्तानपुर। परिषदीय स्कूलों को लकदक करने के लिए चलाई जा रही ऑपरेशन कायाकल्प योजना जिले में सुस्त पड़ती जा रही है। पढ़ाई का बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए शासन की हिदायत के बाद भी जिले के 875 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। 2064 विद्यालयों में से 830 स्कूल ऐसे हैं, जहां चहारदीवारी नहीं बनी है। बच्चों की पढ़ाई के समय आवारा पशु विद्यालय के कक्षों तक पहुंच जाते हैं। 323 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बिजली कनेक्शन व उपकरण की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों को लकदक करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प योजना लागू की थी। पहले इस योजना में 14 बिंदु निर्धारित हुए थे। बाद में बढ़ाकर 19 बिंदु कर दिए गए। योजना को लागू हुए पांच वर्ष हो चुके हैं लेकिन कई विद्यालय अभी भी कायाकल्प पूरी तरह अछूते हैं। ग्राम पंचायत निधि से विद्यालयों को लकदक कराने के लिए पंचायत सचिवों, ग्राम प्रधानों व प्रधानाध्यापकों के बीच कुछ जगहों पर समन्वय का अभाव है तो कुछ जगहों पर प्रधान व पंचायत सचिव योजना में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिले के कुल 2064 विद्यालयों में से फर्नीचर की सुविधा मात्र 1189 में ही है। शेष 875 विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। भीषण गर्मी में टाइल्स गर्म रहती है। इस वजह से विद्यार्थियों को बैठने में दिक्कतें होती हैं। 16 जून से जब विद्यालय खुलेंगे तो इस भीषण गर्मी में छात्र-छात्राओं को इस समस्या से दो-चार होना पड़ेगा।
विज्ञापन

1935 विद्यालयों में बालकों के लिए प्रसाधन और 1963 में बालिकाओं के लिए प्रसाधन की व्यवस्था हो सकी है। 1918 विद्यालयों में टॉयलट तक रनिंग वाटर, 1886 में प्रसाधनों का टाइलीकरण, 1998 में मल्टिपल हैंडवाशिंग यूनिट और 1902 विद्यालयों में कक्षा कक्षों का टाइलीकरण हो सका है। 2054 स्कूलों में पेयजल की सुविधा है। जिले के 2061 विद्यालयों में ब्लैकबोर्ड की सुविधा व 1902 में किचन शेड की सुविधा उपलब्ध है। रैंप रेलिंग 1954, रंगाई-पुताई 1475, विद्युत कनेक्शन 1741, ब्वॉयज यूरिनल 1714, गर्ल्स यूरिनल 1759, बाउंड्रीवॉल 1234 विद्यालयों में है। 830 विद्यालय ऐसे हैं, जहां अभी तक बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं कराया जा सका है। बाउंड्रीवाल नहीं होने से आए दिन विद्यालय परिसर में गंदगी रहती है। यही नहीं शिक्षण अवधि में भी आवारा कुत्ते और छुट्टा जानवर परिसर में घुस आते हैं। इससे विद्यार्थियों के लिए भी खतरा बना रहता है। साथ ही परिसर की साफ-सफाई भी बाधित होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीएसए दीवान सिंह यादव का कहना है कि ऑपरेशन कायाकल्प योजना में तेजी लाने के निर्देश प्रधानाध्यापकों को दिए गए हैं। विद्यालयों में जो काम छूटे हुए हैं, उनको प्राथमिकता देते हुए पूर्ण कराने को कहा गया है। इसमें पंचायत सचिव और ग्राम प्रधान से समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।

858 विद्यालयों में दिव्यांग शौचालय नहीं
जिले के 2064 परिषदीय विद्यालयों में से 1206 में दिव्यांग शौचालय की व्यवस्था उपलब्ध हो पाई है। अभी भी 858 विद्यालय ऐसे हैं, जहां दिव्यांग शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। विद्यालयों में अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थियों को इससे असुविधा होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed