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Sultanpur News: टाटियानगर गोमती पुल की बची एक लेन भी दरकी
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सुल्तानपुर। मरम्मत के पांचवें ही दिन टाटियानगर गोमती नदी सेतु फिर दरकने लगा है। भारी वाहनों के आवागमन से बची एक लेन में भी दरार आ गई है। दरार ने एनएचएआई के घटिया कार्य की पोल खोल दी है। सिर्फ एक लेन के संचालन से रात में शहर में भारी वाहनों के आवागमन से यातायात का दबाव बना रहा।
टाटियानगर गोमती नदी पुल के एक ज्वाॅइंटर के पास स्लैब टूट गया था। एनएचएआई ने पखवारेभर इसकी मरम्मत की थी, जिसके बाद एक मार्च से वाहनों का संचालन शुरू करा दिया गया था। मगर छह मार्च को मरम्मत वाले हिस्से पर पुल के एक लेन का स्लैब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सूचना पर एनएचएआई ने आनन-फानन उस पर आवागमन बंद करा दिया है। सिर्फ एक लेन से वाहनों का संचालन हो रहा है। इसके चलते शहर में रातभर भारी वाहनों के आवागमन से ट्रैफिक का दबाव बना रहा। इसकी वजह से रात में भी आवाजाही करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
यही नहीं भारी वाहनों के संचालन से पांच दिन पहले कराए गए मरम्मत कार्य की जगह पुल में फिर दरार आ गई है, इससे जल्द ही पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है। घटिया मरम्मत कार्य ने शहरवासियों के साथ ही वाहन संचालकों के लिए भी परेशानी पैदा कर दी है।
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डेढ़ साल पहले पूर्व डीपीएम ने पुल को जर्जर घोषित किया था
गुजरात में मोरवी का पुल टूटने की घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने नदी व नालों पर बने सभी पुलों की जांच करते हुए पीडब्ल्यूडी व सेतु निगम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। सेतु निगम के तत्कालीन डीपीएम ने अपनी जांच में पुल को जर्जर करार दे दिया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट निगम मुख्यालय लखनऊ को भेज दी थी। सूत्रों के मुताबिक उसका निगम मुख्यालय की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
30 साल में ही जर्जर हो गया पुल
टाटियानगर पुल का निर्माण करीब 30 साल पहले हुआ था। 30 साल के अंदर ही पुल जर्जर हो गया है। इंजीनियरों के मुताबिक पुल की अवधि कम से कम 50 साल की होती है। करीब आधे समय में ही पुल के जर्जर हो जाने से इसके निर्माण पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसके पीछे सेतु निगम के इंजीनियर क्षमता से अधिक भार वाले मालवाहक वाहनों का गुजरना बता रहे हैं। एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक विकल्प सिंह का कहना है कि पुल पूर्व की क्षमता का अनुमान लगाकर तैयार किया गया था। मौजूदा समय में पुल से अनुमानित क्षमता से अधिक करीब दोगुना भार वाले मालवाहक वाहन संचालित हो रहे हैं। इसकी वजह से खामी आई होगी। बताया कि वैसे मेरी तरफ से निरीक्षण नहीं किया गया है।
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टाटियानगर गोमती नदी पुल के एक ज्वाॅइंटर के पास स्लैब टूट गया था। एनएचएआई ने पखवारेभर इसकी मरम्मत की थी, जिसके बाद एक मार्च से वाहनों का संचालन शुरू करा दिया गया था। मगर छह मार्च को मरम्मत वाले हिस्से पर पुल के एक लेन का स्लैब पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सूचना पर एनएचएआई ने आनन-फानन उस पर आवागमन बंद करा दिया है। सिर्फ एक लेन से वाहनों का संचालन हो रहा है। इसके चलते शहर में रातभर भारी वाहनों के आवागमन से ट्रैफिक का दबाव बना रहा। इसकी वजह से रात में भी आवाजाही करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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यही नहीं भारी वाहनों के संचालन से पांच दिन पहले कराए गए मरम्मत कार्य की जगह पुल में फिर दरार आ गई है, इससे जल्द ही पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है। घटिया मरम्मत कार्य ने शहरवासियों के साथ ही वाहन संचालकों के लिए भी परेशानी पैदा कर दी है।
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डेढ़ साल पहले पूर्व डीपीएम ने पुल को जर्जर घोषित किया था
गुजरात में मोरवी का पुल टूटने की घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने नदी व नालों पर बने सभी पुलों की जांच करते हुए पीडब्ल्यूडी व सेतु निगम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। सेतु निगम के तत्कालीन डीपीएम ने अपनी जांच में पुल को जर्जर करार दे दिया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट निगम मुख्यालय लखनऊ को भेज दी थी। सूत्रों के मुताबिक उसका निगम मुख्यालय की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
30 साल में ही जर्जर हो गया पुल
टाटियानगर पुल का निर्माण करीब 30 साल पहले हुआ था। 30 साल के अंदर ही पुल जर्जर हो गया है। इंजीनियरों के मुताबिक पुल की अवधि कम से कम 50 साल की होती है। करीब आधे समय में ही पुल के जर्जर हो जाने से इसके निर्माण पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसके पीछे सेतु निगम के इंजीनियर क्षमता से अधिक भार वाले मालवाहक वाहनों का गुजरना बता रहे हैं। एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक विकल्प सिंह का कहना है कि पुल पूर्व की क्षमता का अनुमान लगाकर तैयार किया गया था। मौजूदा समय में पुल से अनुमानित क्षमता से अधिक करीब दोगुना भार वाले मालवाहक वाहन संचालित हो रहे हैं। इसकी वजह से खामी आई होगी। बताया कि वैसे मेरी तरफ से निरीक्षण नहीं किया गया है।