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20वीं पशुगणना में जिले में पशुओं की संख्या में हुई बढ़ोतरी
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सुल्तानपुर। जिले में 20वीं पशुगणना में गोवंशीय व महिषवंशीय पशुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। पशुपालन विभाग के मुताबिक जिले में कुल 3,59,706 गोवंश व 3,18,785 महिषवंश हैं। वहीं, 19वीं पशुगणना में जिले में 6,60,988 मवेशी थे। जनपद में संचालित अस्थायी गो-आश्रय स्थलों पर प्रति गोवंश सरकार से मिलने वाले 30 रुपये खर्च प्रतिदिन खर्च किए जा रहे हैं।
पशुपालन विभाग के मुताबिक 19वीं पशुगणना में जिले के अंदर तीन लाख 89 हजार 23 गोवंश और दो लाख 71 हजार 965 महिषवंश थे। 20वीं पशुगणना के बाद जिले में तीन लाख 59 हजार 706 गोवंश व तीन लाख 18 हजार 785 महिषवंश हो गए।
गोवंशीय व महिषवंशीय पशुओं की संख्या कुल छह लाख 78 हजार 491 है। वहीं 19वीं पशुगणना में गोवंशीय व महिषवंशीय पशुओं की संख्या छह लाख 60 हजार 988 थी। इस हिसाब से जिले में 20वीं पशुगणना के बाद गोवंशीय व महिषवंशीय को मिलाकर कुल 17,503 मवेशी बढ़े हैं।
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पशुपालन विभाग के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूदेव सिंह ने बताया कि जिले में 27 अस्थायी गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। इन गो-आश्रय स्थलों में कुल 2898 गोवंश रखे गए हैं। शासन की ओर से जिले में गो-आश्रय स्थलों से पशुपालकों को 836 गोवंश सुपुर्दगी का लक्ष्य मिला था। लक्ष्य के मुताबिक 794 गोवंशों को पशुपालकों के सुपुर्द किया गया है।
वर्मी कंपोस्ट से होती है अतिरिक्त आय
जनपद में संचालित सभी गो-आश्रय स्थलों पर गोवंश के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार की जाती है। इसे बाजार में बेचकर अतिरिक्त मुनाफा होता है। इस इनकम से भी गोवंशों के चारा-पानी में लगा दिया जाता है। रोजाना प्रति गोवंश पर कम से कम 70 रुपये का खर्च आता है।
- डॉ. भूदेव सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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पशुपालन विभाग के मुताबिक 19वीं पशुगणना में जिले के अंदर तीन लाख 89 हजार 23 गोवंश और दो लाख 71 हजार 965 महिषवंश थे। 20वीं पशुगणना के बाद जिले में तीन लाख 59 हजार 706 गोवंश व तीन लाख 18 हजार 785 महिषवंश हो गए।
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गोवंशीय व महिषवंशीय पशुओं की संख्या कुल छह लाख 78 हजार 491 है। वहीं 19वीं पशुगणना में गोवंशीय व महिषवंशीय पशुओं की संख्या छह लाख 60 हजार 988 थी। इस हिसाब से जिले में 20वीं पशुगणना के बाद गोवंशीय व महिषवंशीय को मिलाकर कुल 17,503 मवेशी बढ़े हैं।
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पशुपालन विभाग के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूदेव सिंह ने बताया कि जिले में 27 अस्थायी गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। इन गो-आश्रय स्थलों में कुल 2898 गोवंश रखे गए हैं। शासन की ओर से जिले में गो-आश्रय स्थलों से पशुपालकों को 836 गोवंश सुपुर्दगी का लक्ष्य मिला था। लक्ष्य के मुताबिक 794 गोवंशों को पशुपालकों के सुपुर्द किया गया है।
वर्मी कंपोस्ट से होती है अतिरिक्त आय
जनपद में संचालित सभी गो-आश्रय स्थलों पर गोवंश के गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार की जाती है। इसे बाजार में बेचकर अतिरिक्त मुनाफा होता है। इस इनकम से भी गोवंशों के चारा-पानी में लगा दिया जाता है। रोजाना प्रति गोवंश पर कम से कम 70 रुपये का खर्च आता है।
- डॉ. भूदेव सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।