कैश का संकट कायम
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नोटबंदी के दो माह बाद शहर की स्थिति पटरी पर आ गई है लेकिन ग्रामीण अंचल की दिक्कतें कायम हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों को मांग के सापेक्ष करेंसी चेस्ट नहीं मिल पा रहा है। जिन बैंक शाखाओं को धन मिल रहा है, वहां भी खाताधारकों को तय सीमा के मुताबिक भुगतान नहीं दिया जा रहा है। सीमित भुगतान से खाताधारकों की मुश्किलें बनी हैं। बुधवार को बरौंसा स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में सुबह कुछ देर तक ही कैश बांटा गया। दोपहर 12 बजे तक यहां कैश खत्म हो गया। उसके बाद बैंक अधिकारियों ने भुगतान से हाथ खड़ा कर दिया। मजबूरी में सुबह से कतार लगाकर खड़े खाताधारकों को निराश लौटना पड़ा।
शाखा प्रबंधक कदमकांत अग्निहोत्री ने बताया कि मुख्यालय से करेंसी चेस्ट नहीं मिल सका है। उधर, जयसिंहपुर की एसबीआई शाखा में मंगलवार से कैश नहीं है। यहां खाताधारकों को बुधवार को भी भुगतान नहीं दिया जा सका। सुबह से ही खाताधारक यहां पहुंच गए, बैंक अधिकारियों के मना करने के बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। शाखा प्रबंधक पीके लोहानी ने बताया कि मेन ब्रांच से कैश नहीं भेजा गया। किसी बड़े खाताधारक ने भी पैसा नहीं जमा किया।
इस वजह से दो दिनों से भुगतान में समस्या खड़ी हो गई है। बल्दीराय ब्लॉक में बॉब की हेमनापुर शाखा में दोपहर बाद कैश खत्म हो गया। बैंक अधिकारियों के मुताबिक सुबह प्रति ग्राहक अधिकतम पांच हजार रुपये का ही भुगतान किया गया। दोपहर बाद कैश खत्म होने से कई खाताधारक भुगतान नहीं पा सके। भुगतान न मिलने से नाराज खाताधारकों व बैंक अधिकारियों के बीच नोक-झोंक भी हुई। खाताधारकों को किसी तरह से समझा-बुझाकर लौटाया गया। शाखा प्रबंधक प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि करेंसी चेस्ट कम मिलने से सीमित भुगतान दिया गया। खाताधारकों को समझा-बुझाकर शांत करवाया गया।