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काहे का मॉडल स्टेशन, सफाई न पीने का पानी
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सुल्तानपुर। ‘ए’ श्रेणी के मॉडल स्टेशनों में शुमार स्थानीय रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन करीब पांच हजार यात्री आवागमन करते हैं।
यात्रियों को रोजाना पेयजल व गंदगी की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। ट्रेनों के टाइम टेबल से लेकर प्रमुख ट्रेनों के कोच गाइडेंस डिस्पले तक ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
संसाधनों के नाम पर स्थापित लिफ्ट में गंदगी की भरमार है। एस्केलेटर तकनीकी खामी से बंद पड़ा है। बुधवार को अमर उजाला ने रेलवे स्टेशन का जायजा लिया तो संसाधनों समेत अन्य व्यवस्थाएं बदहाल दिखीं।
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गर्मी के समय में स्थानीय रेलवे स्टेशन पर सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर पानी की आपूर्ति बाधित चल रही है। प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के समय यात्रियों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है।
प्लेटफार्म नंबर-3 पर बेगमपुरा एक्सप्रेस के इंतजार में बैठे यात्री महेश ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ जम्मू जा रहे हैं।
प्यास बुझाने के लिए उन्होंने खरीदकर पानी पीया। परिवार के सभी सदस्यों के लिए उन्होंने दूसरे प्लेटफार्म पर जाकर पानी की बोतल खरीदी। स्टेशन पर मौजूद रेलवे कर्मियों ने बताया कि पिछले दो दिनों से जलापूर्ति ठप है।
रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुविधा के लिए जनरल टिकट काउंटर व प्लेटफार्म नंबर एक पर एलसीडी ट्रेन टाइम टेबल डिस्पले लगाया गया है। प्लेटफार्म नंबर एक पर लगा डिस्पले बंद पड़ा है।
वहीं जनरल टिकट काउंटर के पास लगे एलसीडी ट्रेन टाइम टेबल डिस्पले का भी संचालन नहीं हो पा रहा है। ट्रेनों की स्थिति पता करने के लिए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्लेटफार्म नंबर-1 पर मौजूद यात्री राजवर्धन ने बताया कि डिजिटल ट्रेन टाइम डिस्पले पूरी तरह से निष्प्रयोज्य है। कोच गाइडेंस डिस्पले का संचालन नहीं होने से स्लीपर, एसी व अन्य कोच के बारे में भी यात्रियों को जानकारी नहीं मिल पा रही है।
रेलवे स्टेशन परिसर में लगे निशक्त, महिला व अन्य यात्रियों की सुविधा स्थापित की गई लिफ्ट व एस्केलेटर का संचालन भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।
प्लेटफार्म नंबर एक के उत्तरी छोर पर पार्सल विभाग के पास स्थित एस्केलेटर का संचालन बंद पड़ा है। मौजूद लोगों ने बताया कि एस्केलेटर बंद होने से प्लेटफार्म बदलने के लिए उन्हें दूसरी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसी से मिलता जुलता हाल प्लेटफार्म नंबर एक के दक्षिणी छोर पर स्थित लिफ्ट सेवा का है। यह भी अक्सर खराब हो जाती है।
रेलवे स्टेशन परिसर में बाहर और भीतर दोनों स्थानों पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। स्टेशन परिसर के बाहर प्रवेश द्वार के पास कचरे का ढेर लगा था।
प्लेटफार्म नंबर एक पर यात्रियों के बैठने के स्थान के निकट ही कचरा पड़ा रहता है। इसके अलावा लिफ्ट तक की गंदगी पर रेल विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है। लिफ्ट के भीतर की दीवार पर पान व गुटखे की पीक के दाग पड़े हैं। लिफ्ट के अंदर कचरा भी जमा दिखा।
स्टेशन परिसर के बाहर निजी वाहनों का जमावड़ा प्रमुख ट्रेनों के पहुंचने के समय के पहले से ही लगने लगता है। कई लोग नो पार्किंग परिसर के भीतर अपने वाहन जबरन ले जाकर खड़े कर देते हैं।
मॉडल श्रेणी के रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर पहुंचते ही यात्रियों की मुश्किलें शुरू हो जाती हैं। स्टेशन के प्रवेश द्वार के बाहर रेलवे कर्मचारी संघ भवन के सामने से गुजरे रास्ते से ही लोग स्टेशन परिसर तक पहुंचते हैं और यहां से बाहर जाते हैं।
इस रास्ते में सड़क की गिट्टियां उखड़ चुकी हैं। सड़क की गिट्टियां उखड़ने के बाद यहां पर रेलवे की ओर से सड़क बनाने के लिए नई गिट्टियां तो डाल दी गई हैं लेकिन सड़क बनाने का कार्य अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। इससे लोगों को आवाजाही करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्टेशन अधीक्षक एलएल मीना ने बताया कि प्लेटफार्म नंबर दो पर वाटर सप्लाई के लिए एईएन से शिकायत की गई है। अन्य समस्याओं के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों से लिखा-पढ़ी की गई है। जल्द ही समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।
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यात्रियों को रोजाना पेयजल व गंदगी की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। ट्रेनों के टाइम टेबल से लेकर प्रमुख ट्रेनों के कोच गाइडेंस डिस्पले तक ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।
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संसाधनों के नाम पर स्थापित लिफ्ट में गंदगी की भरमार है। एस्केलेटर तकनीकी खामी से बंद पड़ा है। बुधवार को अमर उजाला ने रेलवे स्टेशन का जायजा लिया तो संसाधनों समेत अन्य व्यवस्थाएं बदहाल दिखीं।
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गर्मी के समय में स्थानीय रेलवे स्टेशन पर सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर पानी की आपूर्ति बाधित चल रही है। प्रमुख ट्रेनों के ठहराव के समय यात्रियों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है।
प्लेटफार्म नंबर-3 पर बेगमपुरा एक्सप्रेस के इंतजार में बैठे यात्री महेश ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ जम्मू जा रहे हैं।
प्यास बुझाने के लिए उन्होंने खरीदकर पानी पीया। परिवार के सभी सदस्यों के लिए उन्होंने दूसरे प्लेटफार्म पर जाकर पानी की बोतल खरीदी। स्टेशन पर मौजूद रेलवे कर्मियों ने बताया कि पिछले दो दिनों से जलापूर्ति ठप है।
रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों की सुविधा के लिए जनरल टिकट काउंटर व प्लेटफार्म नंबर एक पर एलसीडी ट्रेन टाइम टेबल डिस्पले लगाया गया है। प्लेटफार्म नंबर एक पर लगा डिस्पले बंद पड़ा है।
वहीं जनरल टिकट काउंटर के पास लगे एलसीडी ट्रेन टाइम टेबल डिस्पले का भी संचालन नहीं हो पा रहा है। ट्रेनों की स्थिति पता करने के लिए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्लेटफार्म नंबर-1 पर मौजूद यात्री राजवर्धन ने बताया कि डिजिटल ट्रेन टाइम डिस्पले पूरी तरह से निष्प्रयोज्य है। कोच गाइडेंस डिस्पले का संचालन नहीं होने से स्लीपर, एसी व अन्य कोच के बारे में भी यात्रियों को जानकारी नहीं मिल पा रही है।
रेलवे स्टेशन परिसर में लगे निशक्त, महिला व अन्य यात्रियों की सुविधा स्थापित की गई लिफ्ट व एस्केलेटर का संचालन भी ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।
प्लेटफार्म नंबर एक के उत्तरी छोर पर पार्सल विभाग के पास स्थित एस्केलेटर का संचालन बंद पड़ा है। मौजूद लोगों ने बताया कि एस्केलेटर बंद होने से प्लेटफार्म बदलने के लिए उन्हें दूसरी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
इसी से मिलता जुलता हाल प्लेटफार्म नंबर एक के दक्षिणी छोर पर स्थित लिफ्ट सेवा का है। यह भी अक्सर खराब हो जाती है।
रेलवे स्टेशन परिसर में बाहर और भीतर दोनों स्थानों पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। स्टेशन परिसर के बाहर प्रवेश द्वार के पास कचरे का ढेर लगा था।
प्लेटफार्म नंबर एक पर यात्रियों के बैठने के स्थान के निकट ही कचरा पड़ा रहता है। इसके अलावा लिफ्ट तक की गंदगी पर रेल विभाग के अधिकारियों की नजर नहीं पड़ रही है। लिफ्ट के भीतर की दीवार पर पान व गुटखे की पीक के दाग पड़े हैं। लिफ्ट के अंदर कचरा भी जमा दिखा।
स्टेशन परिसर के बाहर निजी वाहनों का जमावड़ा प्रमुख ट्रेनों के पहुंचने के समय के पहले से ही लगने लगता है। कई लोग नो पार्किंग परिसर के भीतर अपने वाहन जबरन ले जाकर खड़े कर देते हैं।
मॉडल श्रेणी के रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर पहुंचते ही यात्रियों की मुश्किलें शुरू हो जाती हैं। स्टेशन के प्रवेश द्वार के बाहर रेलवे कर्मचारी संघ भवन के सामने से गुजरे रास्ते से ही लोग स्टेशन परिसर तक पहुंचते हैं और यहां से बाहर जाते हैं।
इस रास्ते में सड़क की गिट्टियां उखड़ चुकी हैं। सड़क की गिट्टियां उखड़ने के बाद यहां पर रेलवे की ओर से सड़क बनाने के लिए नई गिट्टियां तो डाल दी गई हैं लेकिन सड़क बनाने का कार्य अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। इससे लोगों को आवाजाही करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्टेशन अधीक्षक एलएल मीना ने बताया कि प्लेटफार्म नंबर दो पर वाटर सप्लाई के लिए एईएन से शिकायत की गई है। अन्य समस्याओं के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों से लिखा-पढ़ी की गई है। जल्द ही समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।