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शहर और गांव के बैंकों कैश का संकट

Thu, 08 Dec 2016 10:25 PM IST
Amarujala Bureau
Amarujala Bureau Updated Thu, 08 Dec 2016 10:25 PM IST
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NO cash in city and village banks
लोग परेशान - फोटो : अमर उजाला

500-1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के एक माह बाद भी कैश की किल्लत बनी हुई है। घंटों कतार में लगने के बाद भी खाताधारकों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को शहर व ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश बैंक शाखाएं कैशलेस रहीं। लोगों को जरूरत के मुताबिक भुगतान नहीं मिल सका।

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नोटबंदी के एक माह बाद भी बैंकों को नए नोटों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। आरबीआई की ओर से सीमित करेंसी चेस्ट मिलने के चलते जिले की अधिकांश बैंक शाखाओं में भुगतान व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। बृहस्पतिवार को भी शहर के बैंकों में कैश का संकट बरकरार रहा। बैंक ऑफ बड़ौदा की मेन ब्रांच को आठ लाख का करेंसी चेस्ट मिला था। जो दोपहर बाद खत्म हो गया। ऐसे में चालू खाताधारकों ने जो रुपये जमा किए थे।
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उससे बचत खाता धारकों को सीमित भुगतान देकर काम चलाया गया। शाखा प्रबंधक विकास कुमार ने बताया कि मांग के मुताबिक करेंसी चेस्ट नहीं मिल पा रहा है। बैंक के उच्चाधिकारियों से वार्ता के बाद भी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। यही हाल डाकघर शाखाओं का भी रहा। प्रधान डाकघर के अधीक्षक एसएन दूबे ने बताया कि एसबीआई से डिमांड के सापेक्ष काफी कम कैश मिला।
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उप डाकघर शाखाओं पर भुगतान का कार्य प्रभावित रहा। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की शाखाओं पर भी कैश की किल्लत से बैंक कर्मियों व खाताधारकों को दो-चार होना पड़ा। दिन भर इंतजार करने के बाद भी शाम तक शाखाओं पर कैश नहीं पहुंचा था।  

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