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गौरीगंज के सपा विधायक समेत नौ आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
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सुल्तानपुर। वर्ष 2008 में समाजवादी पार्टी की ओर से तत्कालीन बसपा सरकार के खिलाफ डेरा डालो घेरा डालो कार्यक्रम में शामिल होने के आरोपी गौरीगंज के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख व मौजूदा सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह को कोर्ट से राहत मिल गई है।
स्पेशल जज एमपी-एमएलए पीके जयंत ने रोड जाम कर आवागमन बाधित करने और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंकने के मामले में सपा विधायक समेत नौ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
समाजवादी पार्टी की ओर से 23 अक्तूबर 2008 को तत्कालीन बसपा सरकार के खिलाफ सुल्तानपुर जिला मुख्यालय पर डेरा डालो घेरा डालो कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने आए गौरीगंज के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख व गौरीगंज के मौजूदा सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह समेत अन्य सपा नेताओं को जेल भेज दिया गया था।
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उनके जेल से छूटने के बाद 26 अक्तूबर 2008 को गौरीगंज के सैंठा चौराहे पर पहुंचने पर समर्थकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके रोड जाम कर दिया था। जाम से आवागमन बाधित हो गया था। आरोप है कि इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंका गया था।
गौरीगंज के तत्कालीन एसओ बृजेंद्रनाथ शुक्ल ने ब्लॉक प्रमुख राकेश प्रताप सिंह व उनके कई समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए, बचाव पक्ष के अधिवक्ता रुद्रप्रताप सिंह मदन ने गवाहों से जिरह की।
स्पेशल जज एमपी-एमएलए पीके जयंत ने विधायक राकेश प्रताप सिंह और उनके समर्थक उदयभान सिंह, दीपक सिंह, दिनेश श्रीवास्तव, वीरेंद्र श्रीवास्तव, काशी सिंह, रिंकू उर्फ सुशील पांडेय, उमेश सिंह व पूरन सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
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स्पेशल जज एमपी-एमएलए पीके जयंत ने रोड जाम कर आवागमन बाधित करने और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंकने के मामले में सपा विधायक समेत नौ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
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समाजवादी पार्टी की ओर से 23 अक्तूबर 2008 को तत्कालीन बसपा सरकार के खिलाफ सुल्तानपुर जिला मुख्यालय पर डेरा डालो घेरा डालो कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें शामिल होने आए गौरीगंज के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख व गौरीगंज के मौजूदा सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह समेत अन्य सपा नेताओं को जेल भेज दिया गया था।
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उनके जेल से छूटने के बाद 26 अक्तूबर 2008 को गौरीगंज के सैंठा चौराहे पर पहुंचने पर समर्थकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके रोड जाम कर दिया था। जाम से आवागमन बाधित हो गया था। आरोप है कि इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती का पुतला फूंका गया था।
गौरीगंज के तत्कालीन एसओ बृजेंद्रनाथ शुक्ल ने ब्लॉक प्रमुख राकेश प्रताप सिंह व उनके कई समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज किया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए, बचाव पक्ष के अधिवक्ता रुद्रप्रताप सिंह मदन ने गवाहों से जिरह की।
स्पेशल जज एमपी-एमएलए पीके जयंत ने विधायक राकेश प्रताप सिंह और उनके समर्थक उदयभान सिंह, दीपक सिंह, दिनेश श्रीवास्तव, वीरेंद्र श्रीवास्तव, काशी सिंह, रिंकू उर्फ सुशील पांडेय, उमेश सिंह व पूरन सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।