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...नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्
सुल्तानपुर
Updated Sun, 11 Sep 2016 12:15 AM IST
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सुल्तानपुर के ठठेरी बाजार में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला
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जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा... की गूंज शाम होते ही पंडालों में सुनाई देने लगती है। सुबह-शाम श्रद्धालुओं की भीड़ गणपति के पंडालों में पूजा अर्चना के लिए उमड़ रही है।
स्तुति, वंदना और भक्ति गीतों से अराध्य देव श्रीगणेश को खुश करने के लिए भक्त भोग लगा रहे हैं। गणपति पंडालों के पास जगह-जगह आयोजित भंडारे में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। गणपति महोत्सव पर शहर ही नहीं ग्रामीणांचलों में भी धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है।
पंडालों में स्थापित गणेश प्रतिमा की सुबह-शाम विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है। खासतौर से बच्चे भगवान गणेश की पूजा कर बुद्धि व सौभाग्य का आशीर्वाद ले रहे हैं। इस पर्व की तैयारी पखवारे भर पहले से शुरू हो जाती है। मान्यता है कि जब गणेश भगवान घर अथवा पंडाल में आते हैं तो ढेर सारी सुख, समृद्धि, बुद्धि और खुशी लेकर आते हैं।
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जब वे घर व पंडाल से प्रस्थान करते हैं तो सारे दुखों को साथ ले जाते है। शुक्रवार को पांचवें दिन शहर के दो स्थानों पर स्थापित विघ्न विनायक की प्रतिमाओं की शोभा यात्रा निकाली गई। पूरे शहर में भ्रमण के बाद आदि गंगा गोमती में दोनों गणेश प्रतिमाओं का नम आंखों से विसर्जन कर दिया गया।
शहर समेत ग्रामीण इलाकों में स्थापित अन्य गणेश प्रतिमाओं का 16 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा। इनदिनों शाम होते ही गणेश पंडालों में जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा...के स्वर सुनाई देने लगते हैं। दर्शन व पूजन करने के लिए आने वाले भक्त आस्था व भक्ति के सैलाब में डूबे हैं। शाम होते हुए पंडालों के पास भंडारा शुरू हो जाता है।
शहर के चौक स्थित हनुमान मंदिर के पुजारी पं. रमाकांत पांडेय ने बताया कि पंडालों में स्थापित गणेश भगवान को सुबह-शाम 10 दिनों तक कपूर, चंदन, फूल, नारियल, गुड़ व लड्डू का भोग लगाया जाता है। पूजा के अंतिम दिन पूर्णमासी को गणेश विसर्जन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ विघ्नहर्ता की नम आंखों से विदाई करेगी।
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स्तुति, वंदना और भक्ति गीतों से अराध्य देव श्रीगणेश को खुश करने के लिए भक्त भोग लगा रहे हैं। गणपति पंडालों के पास जगह-जगह आयोजित भंडारे में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। गणपति महोत्सव पर शहर ही नहीं ग्रामीणांचलों में भी धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है।
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पंडालों में स्थापित गणेश प्रतिमा की सुबह-शाम विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है। खासतौर से बच्चे भगवान गणेश की पूजा कर बुद्धि व सौभाग्य का आशीर्वाद ले रहे हैं। इस पर्व की तैयारी पखवारे भर पहले से शुरू हो जाती है। मान्यता है कि जब गणेश भगवान घर अथवा पंडाल में आते हैं तो ढेर सारी सुख, समृद्धि, बुद्धि और खुशी लेकर आते हैं।
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जब वे घर व पंडाल से प्रस्थान करते हैं तो सारे दुखों को साथ ले जाते है। शुक्रवार को पांचवें दिन शहर के दो स्थानों पर स्थापित विघ्न विनायक की प्रतिमाओं की शोभा यात्रा निकाली गई। पूरे शहर में भ्रमण के बाद आदि गंगा गोमती में दोनों गणेश प्रतिमाओं का नम आंखों से विसर्जन कर दिया गया।
शहर समेत ग्रामीण इलाकों में स्थापित अन्य गणेश प्रतिमाओं का 16 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा। इनदिनों शाम होते ही गणेश पंडालों में जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा...के स्वर सुनाई देने लगते हैं। दर्शन व पूजन करने के लिए आने वाले भक्त आस्था व भक्ति के सैलाब में डूबे हैं। शाम होते हुए पंडालों के पास भंडारा शुरू हो जाता है।
शहर के चौक स्थित हनुमान मंदिर के पुजारी पं. रमाकांत पांडेय ने बताया कि पंडालों में स्थापित गणेश भगवान को सुबह-शाम 10 दिनों तक कपूर, चंदन, फूल, नारियल, गुड़ व लड्डू का भोग लगाया जाता है। पूजा के अंतिम दिन पूर्णमासी को गणेश विसर्जन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ विघ्नहर्ता की नम आंखों से विदाई करेगी।