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Sultanpur News: फरवरी में ही मार्च जैसी तपिश, गेहूं की फसल पर संकट
Tue, 10 Feb 2026 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Tue, 10 Feb 2026 11:28 PM IST
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सुल्तानपुर। जिले में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। फरवरी की शुरुआत में ही मार्च जैसी तपिश महसूस होने लगी है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अब केवल सुबह और शाम के समय ही हल्की ठंड का एहसास बाकी रह गया है, जबकि दोपहर की तेज धूप चुभने लगी है। किसानों का मानना है कि तापमान में इस अचानक वृद्धि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान हो सकता है, हालांकि सरसों पर इसका कोई विशेष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) के मौसम पर्यवेक्षक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि एक फरवरी को जिले का अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री और न्यूनतम 9.5 डिग्री था जो बढ़कर मंगलवार को 24.5 डिग्री और न्यूनतम 8 सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पारे में आई इस उछाल का सीधा असर अब खेती पर दिखाई देने लगा है।
किसानों का कहना है कि यदि फरवरी माह में गर्मी इसी तरह बरकरार रही, तो गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है। ऐसी स्थिति में दाना पतला रह जाने और कुल उत्पादन घटने की प्रबल आशंका है। किसान रामलाल यादव ने बताया कि तेज धूप के कारण गेहूं की बालियों पर प्रतिकूल प्रभाव दिखने लगा है। वहीं किसान जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गर्मी की वजह से बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। राहत की बात यह है कि सरसों की फसल फिलहाल सुरक्षित है और खेतों में उसकी स्थिति अच्छी बनी हुई है।
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) के मौसम पर्यवेक्षक डॉ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि एक फरवरी को जिले का अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री और न्यूनतम 9.5 डिग्री था जो बढ़कर मंगलवार को 24.5 डिग्री और न्यूनतम 8 सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पारे में आई इस उछाल का सीधा असर अब खेती पर दिखाई देने लगा है।
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किसानों का कहना है कि यदि फरवरी माह में गर्मी इसी तरह बरकरार रही, तो गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है। ऐसी स्थिति में दाना पतला रह जाने और कुल उत्पादन घटने की प्रबल आशंका है। किसान रामलाल यादव ने बताया कि तेज धूप के कारण गेहूं की बालियों पर प्रतिकूल प्रभाव दिखने लगा है। वहीं किसान जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गर्मी की वजह से बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। राहत की बात यह है कि सरसों की फसल फिलहाल सुरक्षित है और खेतों में उसकी स्थिति अच्छी बनी हुई है।
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