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लॉकडाउन में नष्ट हो गया रेस्टोरेंटों में लाखों का सामान
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सुलतानपुर। लॉकडाउन में रेस्टोरेंट व्यवसायियों की लाखों की कच्ची सामग्री नष्ट हो गई। ढाई माह बंदी के दौरान प्रतिष्ठान का नुकसान तो हुआ ही साथ ही लाखों का व्यवसाय भी प्रभावित हुआ। अनलॉक वन में होम डिलीवरी की व्यवस्था से व्यवसाय पनप नहीं पा रहा है।
ऐसी स्थिति मे संचालकों के सामने अपने व्यवसाय को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। कर्मचारियों के वेतन, बिजली बिल समेत अन्य खर्च के बोझ ने उनकी कमर तोड़ दी है। संचालकों के अनुसार व्यवसाय को उबरने में महीनों लग सकते हैं।
अवंतिका रेस्टोरेंट के संचालक आलोक आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए उन्होंने अपने प्रतिष्ठान 20 मार्च से ही बंद कर दिया। 25 मार्च से शुरू लॉकडाउन में लाखों की कच्ची सामग्री नष्ट हो गई। इसमें लाखों का नुकसान हुआ।
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प्रतिष्ठान बंद होने से बिजली समेत अन्य उपकरणों का भी काफी नुकसान हुआ। ऊपर से कर्मचारियों का वेतन, मरम्मत खर्च, लोन आदि का भार बढ़ गया। बताया कि प्रतिष्ठान को रोजाना सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग समेत अन्य नियमों का पालन करने करते हुए संचालित कराया जा रहा है। अनलॉक वन में करीब 20 फीसदी की बिजनेस चल पा रहा है।
रघुकुल रेस्टोंरेंट विनय सिंह संचालक का कहना है कि लॉकडाउन में लाखों की कच्ची सामग्री नष्ट करनी पड़ी। साथ ही कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य खर्चों का भार अभी तक चल रहा है। ढाई माह के दौरान इस व्यवसाय की कमर ही टूट गई। अब प्रतिस्पर्धा में बने रहना व व्यवसाय को बचाए रखना मुश्किल हो गया है। अनलॉक वन में भी स्थिति में सुधार नहीं हो सका है।
सवेरा रेस्टोरेंट संचालक श्याम का कहना है कि ढाई माह के लॉकडाउन के बाद अनलॉक वन में प्रतिष्ठान जरूर खुल गए लेकिन होम डिलेवरी की व्यवस्था से व्यवसाय में जान नहीं आ सकी। धार्मिक, सामाजिक अनुष्ठान बंद होने से भी व्यवसाय पर काफी असर पड़ा है। लाखों का नुकसान इस व्यवसाय को उठाना पड़ा है। नियमित खर्च ने व्यवसाय को हिलाकर रख दिया है।
अन्नपूर्णा रेस्टोरेंट संचालक अमित गुप्ता का कहना है कि ढाई माह का लॉकडाउन इस व्यवसाय को गहरी चोट दे गया है। लाखों का नुकसान उठाना पड़ा। अब होम डिलीवरी की व्यवस्था से कुछ संचालन शुरू हुआ है लेकिन करीब 20 फीसदी ही व्यवसाय चल पा रहा है। लॉकडाउन में कच्ची सामग्री का नुकसान उठाना पड़ा है।
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ऐसी स्थिति मे संचालकों के सामने अपने व्यवसाय को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। कर्मचारियों के वेतन, बिजली बिल समेत अन्य खर्च के बोझ ने उनकी कमर तोड़ दी है। संचालकों के अनुसार व्यवसाय को उबरने में महीनों लग सकते हैं।
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अवंतिका रेस्टोरेंट के संचालक आलोक आर्य ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए उन्होंने अपने प्रतिष्ठान 20 मार्च से ही बंद कर दिया। 25 मार्च से शुरू लॉकडाउन में लाखों की कच्ची सामग्री नष्ट हो गई। इसमें लाखों का नुकसान हुआ।
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प्रतिष्ठान बंद होने से बिजली समेत अन्य उपकरणों का भी काफी नुकसान हुआ। ऊपर से कर्मचारियों का वेतन, मरम्मत खर्च, लोन आदि का भार बढ़ गया। बताया कि प्रतिष्ठान को रोजाना सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग समेत अन्य नियमों का पालन करने करते हुए संचालित कराया जा रहा है। अनलॉक वन में करीब 20 फीसदी की बिजनेस चल पा रहा है।
रघुकुल रेस्टोंरेंट विनय सिंह संचालक का कहना है कि लॉकडाउन में लाखों की कच्ची सामग्री नष्ट करनी पड़ी। साथ ही कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य खर्चों का भार अभी तक चल रहा है। ढाई माह के दौरान इस व्यवसाय की कमर ही टूट गई। अब प्रतिस्पर्धा में बने रहना व व्यवसाय को बचाए रखना मुश्किल हो गया है। अनलॉक वन में भी स्थिति में सुधार नहीं हो सका है।
सवेरा रेस्टोरेंट संचालक श्याम का कहना है कि ढाई माह के लॉकडाउन के बाद अनलॉक वन में प्रतिष्ठान जरूर खुल गए लेकिन होम डिलेवरी की व्यवस्था से व्यवसाय में जान नहीं आ सकी। धार्मिक, सामाजिक अनुष्ठान बंद होने से भी व्यवसाय पर काफी असर पड़ा है। लाखों का नुकसान इस व्यवसाय को उठाना पड़ा है। नियमित खर्च ने व्यवसाय को हिलाकर रख दिया है।
अन्नपूर्णा रेस्टोरेंट संचालक अमित गुप्ता का कहना है कि ढाई माह का लॉकडाउन इस व्यवसाय को गहरी चोट दे गया है। लाखों का नुकसान उठाना पड़ा। अब होम डिलीवरी की व्यवस्था से कुछ संचालन शुरू हुआ है लेकिन करीब 20 फीसदी ही व्यवसाय चल पा रहा है। लॉकडाउन में कच्ची सामग्री का नुकसान उठाना पड़ा है।