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बैंकों में नगदी की कमी ग्राहक हो रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Thu, 17 Nov 2016 12:48 AM IST
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गौरीगंज शहर स्थित एचडीएफसी बैंक में नोट बदलने के लिए लाइन में खड़े लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के हफ्ते भर बाद भी जिले की अधिकांश बैंकें कैश की कमी से जूझ रही हैं। आलम यह है कि लोगों को शासन की ओर से निर्धारित लिमिट का एक चौथाई धन ही निकाला जा रहा है। कई बैंकों में ग्राहकों को नोटों के बजाय पांच व 10 के सिक्कों की पहले से गिनकर रखी पोटली पकड़ाई जा रही है।
केंद्र की मोदी सरकार ने बीते नौ नवंबर को पांच सौ व एक हजार के पुराने नोटों को अचानक बंद करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से जिले के सभी बैंकों में जमा-निकासी के साथ पुराने नोटों को बदलने के लिए लंबी कतार लग रही है। लोगों की मुसीबत का आलम यह है कि ज्यादातर बैंकें सरकार की ओर से निर्धारित लेन-देन के नियमों का भी पालन नहीं कर रही हैं।
बैंककर्मी ग्राहक से सिर्फ उतनी रकम भरकर लाने को कहते हैं जितने में उनका किसी तरह काम चल जाए। इलाहाबाद सहित कई अन्य बैंकों में ग्राहकों को नोटों के बजाय सिक्कों की पहले से गिनकर रखी हुई पोटली पकड़ाई जा रही है। परेशानी सिर्फ ग्राहकों को हो, ऐसा भी नहीं है। बैंककर्मी भी कम स्टाफ के बावजूद बढ़ी हुई भीड़ के साथ कम कैश को लेकर परेशान हैं।
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500-1000 के नोट बंदी के बाद बैंकों में बड़े नोट जमा करने, नोट बदलने और खाते से विड्राल करने के लिए ग्राहकों की भीड़ सुबह से ही पहुंच रही है। घंटों की जद्दोजहद के बावजूद तमाम ग्राहकों को निराश होना पड़ रहा है। कैश के अभाव में एसबीआई व डाकघर को छोड़कर अन्य बैंकों में नोट बदलने तक का कार्य नहीं हो सका। दोपहर बाद कैश उपलब्ध होने पर ग्राहकों को चेक व विड्राल से भुगतान शुरू हुआ।
एसबीआई को छोड़कर किसी भी बैंक में चेक व विड्राल पर चार हजार का ही भुगतान किया जा सका। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में लगे एटीएम पैसों के अभाव में बंद रहे। बुधवार सुबह बैंकों से पैसा निकालने व बदलने के लिए ग्राहकों की लंबी कतार दिखी लेकिन कैश नहीं उपलब्ध होने से ग्राहकों को निराश होना पड़ा।
एसबीआई और डाकघर को छोड़कर अन्य बैंकों में बड़े नोटों को बदलने का कार्य नहीं हो सका। दोपहर बाद बैंकों में कैश उपलब्ध होने के बाद ग्राहकों को चेक व विड्राल पर भुगतान शुरू किया गया। वह भी महज चार हजार रुपये का। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित एटीएम बंद रहे।
500-1000 के नोट बंद होने के बाद ठप बैनामे की प्रक्रिया सरकार के आदेश के बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। सरकार की ओर से बैनामे में छूट देने के बाद भी पुराने नोटों से स्टांप नहीं मिल पा रहे हैं। इससे बैनामे की प्रक्रिया मामूली रूप से ही शुरू हो सकी है। बैनामा लेखन व स्टांप में छूट नहीं मिलने से सरकार को रोजाना राजस्व का नुकसान हो रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से हजार व पांच सौ की नोट को बंद करने के बाद प्रदेश सरकार ने बैनामे के लिए पुरानी नोटों की छूट दे दी है। सरकार की ओर से बैनामे की छूूट देने के बाद भी रजिस्ट्री कार्यालयों में आंशिक बैनामा ही शुरू हो सका है। इसके पीछे पुुरानी नोटों पर स्टांप पेपर नहीं मिलना व बैनामा लेखन का कार्य नहीं हो पाना सामने आ रहा है।
पुरानी नोटों पर स्टांप पेपर नहीं मिलने एवं बैनामा लेखन का कार्य नहीं होने से बैनामे नहीं हो पा रहे हैं। बैनामा नहीं होने से सरकार को कई लाख रुपये का रोजाना राजस्व का नुकसान हो रहा है। सब रजिस्ट्रार सदर चंद्रभान यादव ने बताया कि स्टांप पेपर व बैनामा लेखन में छूट नहीं मिलने की वजह से कार्य अभी भी प्रभावित है। कुछ आंशिक कार्य ही हो पा रहे हैं। पुराने नोटों पर स्टांप पेपर नहीं मिल रहे हैं।
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केंद्र की मोदी सरकार ने बीते नौ नवंबर को पांच सौ व एक हजार के पुराने नोटों को अचानक बंद करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से जिले के सभी बैंकों में जमा-निकासी के साथ पुराने नोटों को बदलने के लिए लंबी कतार लग रही है। लोगों की मुसीबत का आलम यह है कि ज्यादातर बैंकें सरकार की ओर से निर्धारित लेन-देन के नियमों का भी पालन नहीं कर रही हैं।
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बैंककर्मी ग्राहक से सिर्फ उतनी रकम भरकर लाने को कहते हैं जितने में उनका किसी तरह काम चल जाए। इलाहाबाद सहित कई अन्य बैंकों में ग्राहकों को नोटों के बजाय सिक्कों की पहले से गिनकर रखी हुई पोटली पकड़ाई जा रही है। परेशानी सिर्फ ग्राहकों को हो, ऐसा भी नहीं है। बैंककर्मी भी कम स्टाफ के बावजूद बढ़ी हुई भीड़ के साथ कम कैश को लेकर परेशान हैं।
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500-1000 के नोट बंदी के बाद बैंकों में बड़े नोट जमा करने, नोट बदलने और खाते से विड्राल करने के लिए ग्राहकों की भीड़ सुबह से ही पहुंच रही है। घंटों की जद्दोजहद के बावजूद तमाम ग्राहकों को निराश होना पड़ रहा है। कैश के अभाव में एसबीआई व डाकघर को छोड़कर अन्य बैंकों में नोट बदलने तक का कार्य नहीं हो सका। दोपहर बाद कैश उपलब्ध होने पर ग्राहकों को चेक व विड्राल से भुगतान शुरू हुआ।
एसबीआई को छोड़कर किसी भी बैंक में चेक व विड्राल पर चार हजार का ही भुगतान किया जा सका। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में लगे एटीएम पैसों के अभाव में बंद रहे। बुधवार सुबह बैंकों से पैसा निकालने व बदलने के लिए ग्राहकों की लंबी कतार दिखी लेकिन कैश नहीं उपलब्ध होने से ग्राहकों को निराश होना पड़ा।
एसबीआई और डाकघर को छोड़कर अन्य बैंकों में बड़े नोटों को बदलने का कार्य नहीं हो सका। दोपहर बाद बैंकों में कैश उपलब्ध होने के बाद ग्राहकों को चेक व विड्राल पर भुगतान शुरू किया गया। वह भी महज चार हजार रुपये का। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित एटीएम बंद रहे।
500-1000 के नोट बंद होने के बाद ठप बैनामे की प्रक्रिया सरकार के आदेश के बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। सरकार की ओर से बैनामे में छूट देने के बाद भी पुराने नोटों से स्टांप नहीं मिल पा रहे हैं। इससे बैनामे की प्रक्रिया मामूली रूप से ही शुरू हो सकी है। बैनामा लेखन व स्टांप में छूट नहीं मिलने से सरकार को रोजाना राजस्व का नुकसान हो रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से हजार व पांच सौ की नोट को बंद करने के बाद प्रदेश सरकार ने बैनामे के लिए पुरानी नोटों की छूट दे दी है। सरकार की ओर से बैनामे की छूूट देने के बाद भी रजिस्ट्री कार्यालयों में आंशिक बैनामा ही शुरू हो सका है। इसके पीछे पुुरानी नोटों पर स्टांप पेपर नहीं मिलना व बैनामा लेखन का कार्य नहीं हो पाना सामने आ रहा है।
पुरानी नोटों पर स्टांप पेपर नहीं मिलने एवं बैनामा लेखन का कार्य नहीं होने से बैनामे नहीं हो पा रहे हैं। बैनामा नहीं होने से सरकार को कई लाख रुपये का रोजाना राजस्व का नुकसान हो रहा है। सब रजिस्ट्रार सदर चंद्रभान यादव ने बताया कि स्टांप पेपर व बैनामा लेखन में छूट नहीं मिलने की वजह से कार्य अभी भी प्रभावित है। कुछ आंशिक कार्य ही हो पा रहे हैं। पुराने नोटों पर स्टांप पेपर नहीं मिल रहे हैं।