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आज से शुरू होगा एक महीने का खरमास

Thu, 16 Dec 2021 12:15 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 12:15 AM IST
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kharmaas
सुल्तानपुर। शादी-ब्याह के सीजन की चकाचौंध के बाद बृहस्पतिवार से एक महीने का खरमास लग रहा है। चतुर्मास की तरह खरमास में भी विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। खरमास का समापन 14 जनवरी 2022 की रात्रि 8:34 बजे हो जाएगा। 15 जनवरी से मांगलिक आयोजन शुरू हो जाएंगे।
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पंडित पुरोहितों के अनुसार, खरमास के दिनों में सूर्य देव धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसके चलते बृहस्पति ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। वहीं, गुरु ग्रह को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है। लड़कियों की शादी के कारक गुरु माने जाते हैं। गुरु कमजोर रहने से शादी में देर होती है। साथ ही रोजगार और कारोबार में भी बाधा आती है।
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इसके चलते खरमास के दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। विवाह के लिए शुक्र और गुरु दोनों का उदय होना आवश्यक है। यदि दोनों में से एक भी अस्त होगा तो मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। खरमास में पूजा-पाठ व कथा भागवत जारी रहेंगे। 14 जनवरी 2022 को खरमास का समापन हो जाएगा। 15 जनवरी से मांगलिक आयोजन के साथ ही सभी तरह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
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खरमास में नहीं बंद होगा पूजा-पाठ
बृहस्पतिवार को अपराह्न 2:10 बजे से खरमास शुरू हो जाएगा। खरमास का समापन 14 जनवरी की रात्रि 8:34 बजे होगा। खरमास में शादी, विवाह, वरीक्षा, तिलक, मकान निर्माण, वास्तु पूजन, मुंडन आदि कार्य नहीं किए जाएंगे। कथा भागवत व पूजा-पाठ खरमास में भी चालू रहेगा।
14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होगा। मकर शनि की राशि है। इससे मकर संक्रांति पर तिल का दान करने से शनि ग्रह की कृपा प्राप्त होती है। मकर संक्रांति पर स्नान, दान का विशेष महत्व है। 14 जनवरी के बाद शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।
-कथा व्यास, बृजेशाचार्य महराज
सभी ग्रहों व मुहूर्तों के अधिपति हैं सूर्य
14 जनवरी 2022 को सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे। 15 जनवरी से सभी तरह के शुभ कार्य की शुरुआत हो जाएगी। धनु राशि में गोचर के मध्य सूर्य की शक्ति क्षीण और रश्मियां कमजोर पड़ जाती हैं। राशि स्वामी गुरु का तेज भी प्रभावहीन रहता है।

स्वभाव में उग्रता आ जाती है। तभी ज्योतिष ग्रंथों में इस माह को खरमास कहा गया है। सूर्य सभी ग्रहों, राशियों, नक्षत्रों, संवत्सरों, योगों, कारणों और मुहूर्तों के अधिपति हैं। प्राणियों के शरीर की आत्मा एवं जगतात्मा हैं। जीव की उत्पत्ति में इनका प्रमुख योगदान रहता है।
-ज्योतिषाचार्य, पं. रामकिशोर त्रिपाठी
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