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Sultanpur News: सहालग में बांस से बनी डलियों की बढ़ी मांग
Fri, 13 Feb 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Fri, 13 Feb 2026 11:41 PM IST
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चौक में बिकती बांस की बनी डलिया व अन्य उत्पाद। संवाद
सुल्तानपुर। सहालग इस सीजन में बांस की बनी डलियों की मांग में तेजी देखी जा रही है। शहर के बाजारों में इन दिनों बांस की डलियों की खरीदारी को ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। इससे दुकानदारों के चेहरों पर रौनक है। गोलाघाट मोहल्ले में सड़क किनारे डलिया बनाने वालों का लंबा कुनबा है, इससे इनका भी रोजगार बढ़ गया है।
वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, विवाह समारोहों में भोजन और अन्य सामग्री रखने के लिए बांस की डलियों का उपयोग किया जाता है। इस वर्ष भी जिन घरों में शादियां हैं, उनके परिजन बाजार से बड़ी संख्या में डलियां खरीद रहे हैं। चौक के दुकानदार जमुना ने बताया कि पिछले एक महीने की तुलना में अब बांस की डलियों का कारोबार काफी बेहतर हो गया है। जहां पहले दिन केवल दो-तीन ग्राहक आते थे। वहीं, अब दुकानों पर 15 से 20 ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं।
गोलाघाट पर सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ी में बसे 50 से अधिक परिवार बांस की डलियां बनाने का पारंपरिक व्यवसाय करते हैं। ये परिवार बाजार से बांस लाकर अपने हाथों से कुशलतापूर्वक डलियां तैयार करते हैं। यहां से स्थानीय दुकानदार खरीदारी कर उन्हें बाजार में बेचते हैं। छोटी डलियों की कीमत 30 से 50 रुपये के बीच है, जबकि बड़ी डलियां 70 से 80 रुपये तक बिक रही हैं। बड़े दुकानदारों के यहां प्रतिदिन सात हजार रुपये से अधिक की बिक्री हो रही है।
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वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, विवाह समारोहों में भोजन और अन्य सामग्री रखने के लिए बांस की डलियों का उपयोग किया जाता है। इस वर्ष भी जिन घरों में शादियां हैं, उनके परिजन बाजार से बड़ी संख्या में डलियां खरीद रहे हैं। चौक के दुकानदार जमुना ने बताया कि पिछले एक महीने की तुलना में अब बांस की डलियों का कारोबार काफी बेहतर हो गया है। जहां पहले दिन केवल दो-तीन ग्राहक आते थे। वहीं, अब दुकानों पर 15 से 20 ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं।
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गोलाघाट पर सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ी में बसे 50 से अधिक परिवार बांस की डलियां बनाने का पारंपरिक व्यवसाय करते हैं। ये परिवार बाजार से बांस लाकर अपने हाथों से कुशलतापूर्वक डलियां तैयार करते हैं। यहां से स्थानीय दुकानदार खरीदारी कर उन्हें बाजार में बेचते हैं। छोटी डलियों की कीमत 30 से 50 रुपये के बीच है, जबकि बड़ी डलियां 70 से 80 रुपये तक बिक रही हैं। बड़े दुकानदारों के यहां प्रतिदिन सात हजार रुपये से अधिक की बिक्री हो रही है।
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