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रेडियोलॉजिस्ट छुट्टी पर गए, 31 तक अल्ट्रासाउंड बंद
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जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर चस्पा नोटिस।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। अल्ट्रासाउंड कराना है तो जिला अस्पताल न आएं। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट छुट्टी पर हैं। अब नए साल में ही यहां अल्ट्रासाउंड हो सकेगा। रेडियोलॉजिस्ट कक्ष के बाहर लगी सूचना फिलहाल यही ताकीद कर रही है। 13 दिसंबर से 31 दिसंबर तक जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं होने के कारण मरीजों को निजी पैथालॉजी की शरण लेनी पड़ रही है, जहां उन्हें सात सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। रोडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर होने के कारण मारपीट में घायल लोगों का मेडिको लीगल भी नहीं किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को अल्ट्रासाउंड या दूसरी जांच कराने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। एक दशक पूर्व शासन ने जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट विभाग बनाते हुए डॉ. शारदा रंजन को तैनात किया था। रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात डॉ. रंजन 13 दिसंबर से 31 दिसंबर तक अवकाश पर चले गए हैं। इसकी सूचना रेडियोलॉजिस्ट विभाग के सामने चस्पा कर दी गई है। जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन जिला अस्पताल के ओपीडी में सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। इनमें 100 से 125 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें सिटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासांउड जांच की जरूरत होती है। 35-40 मरीज मेडिको लीगल वाले होते हैं। डॉ. शारदा रंजन को ही मेडिको लीगल का अधिकारी नामित किया गया है।
डॉ. शारदा रंजन के छुट्टी पर जाने की वजह से मेडिको लीगल वाले मरीजों को भी परेशानी हो रही है। सिटी स्कैन, एक्सरे के लिए अन्य कर्मचारी हैं लेकिन अल्ट्रासाउंड जांच पूरी तरह ठप हो गई है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता था। ऐसे में डॉ. शारदा रंजन के छुट्टी पर होने की वजह से मरीजों को निजी अस्पताल अथवा पैथालॉजी में सात सौ रुपये खर्च करके अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
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जिले में एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि जिला अस्पताल में करीब एक दशक से डॉ. शारदा रंजन रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात हैं। उन्होंने आंख का ऑपरेशन कराया है। इसलिए 13 से 31 दिसंबर तक छुट्टी पर हैं। स्वास्थ्य विभाग में जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक अन्य कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसलिए अल्ट्रासाउंड के साथ ही मेडिको लीगल करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को अल्ट्रासाउंड या दूसरी जांच कराने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। एक दशक पूर्व शासन ने जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट विभाग बनाते हुए डॉ. शारदा रंजन को तैनात किया था। रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात डॉ. रंजन 13 दिसंबर से 31 दिसंबर तक अवकाश पर चले गए हैं। इसकी सूचना रेडियोलॉजिस्ट विभाग के सामने चस्पा कर दी गई है। जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन जिला अस्पताल के ओपीडी में सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं। इनमें 100 से 125 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें सिटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासांउड जांच की जरूरत होती है। 35-40 मरीज मेडिको लीगल वाले होते हैं। डॉ. शारदा रंजन को ही मेडिको लीगल का अधिकारी नामित किया गया है।
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डॉ. शारदा रंजन के छुट्टी पर जाने की वजह से मेडिको लीगल वाले मरीजों को भी परेशानी हो रही है। सिटी स्कैन, एक्सरे के लिए अन्य कर्मचारी हैं लेकिन अल्ट्रासाउंड जांच पूरी तरह ठप हो गई है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता था। ऐसे में डॉ. शारदा रंजन के छुट्टी पर होने की वजह से मरीजों को निजी अस्पताल अथवा पैथालॉजी में सात सौ रुपये खर्च करके अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
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जिले में एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एससी कौशल ने बताया कि जिला अस्पताल में करीब एक दशक से डॉ. शारदा रंजन रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात हैं। उन्होंने आंख का ऑपरेशन कराया है। इसलिए 13 से 31 दिसंबर तक छुट्टी पर हैं। स्वास्थ्य विभाग में जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक अन्य कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसलिए अल्ट्रासाउंड के साथ ही मेडिको लीगल करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।