फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Hasanpur riyasat also involved in 1857 revolt

हसनपुर रियासत ने फिरंगियों के खिलाफ फूंका था बिगुल

Sat, 14 Aug 2021 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Aug 2021 11:03 PM IST
विज्ञापन
Hasanpur riyasat also involved in 1857 revolt
10. राजा हसनपुर का किला। - फोटो : SULTANPUR
सुल्तानपुर। मध्यकाल में नरवलगढ़ के नाम से मशहूर रही हसनपुर रियासत ने फिरंगियों के खिलाफ सन 1857 की जंग में हिस्सा लेकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया। मंगल पांडेय ने जब मेरठ में 1857 की क्रांति का बिगुल बजाया तो अवध में भी इसकी चिंगारी सुलग उठी।
विज्ञापन

इससे सुल्तानपुर भी अछूता नहीं रहा। कई रजवाड़े जब फिरंगियों से तालमेल बैठाकर शान-ओ-शौकत हासिल करने में जुटे थे, उस समय इस जिले की हसनपुर रियासत ने फिरंगियों के खिलाफ जंग का बिगुल फूंक दिया।
विज्ञापन

जिले की भी अपनी अलग पहचान रही है। यहां पर कई राजाओं का बोलबाला था। हसनपुर रियासत के राजा तिलकधारी हुआ करते थे। राजा हसनपुर बरियार सिंह की चौथी पुश्त त्रिलोकचंद्र की नस्ल से थे। उन्हीं की नस्ल से राजा हसन अली खां ने शिया धर्म कबूल कर लिया और 1857 में हसनपुर महल में शाही इमामबाड़ा बनवाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद हुसैन अली खां, मो. अली खां, मेंहदी अली खां हसनपुर रियासत के राजा रहे। राजा हसनपुर शक्तिशाली शासक थे। उनके पास बहुत बड़ा सुल्तानपुर का क्षेत्र था। उन्हीं के नेतृत्व में 1857 में अंग्रेजों से जबरदस्त जंग हुई थी। शहर से सटे अमहट के पास गोराबारिक में अंग्रेजों की छावनी थी।
कर्नल फिशरमैन के नेतृत्व में करीब 10 हजार फौज थी। अमहट भी जमींदारी का एक केंद्र था। यहां के लोगों ने अंग्रेजों से युद्ध करके उनकी फौज को मौत के घाट उतार दिया और कर्नल फिशरमैन की लाश को एक पेड़ पर लटका दिया था।
शेरशाह सूरी चंदेरी का किला फतेह करने के बाद जब सुल्तानपुर के रास्ते गुजर रहा था तो अपने लाव लश्कर के साथ राजा हसनपुर के महल में 19 दिन तक ठहरा था। उसी समय शेरशाह सूरी ने रोड के किनारे छांव के लिए पौधे और जगह-जगह पानी पीने के लिए कुएं की व्यवस्था कराई थी।
गभड़िया, अमहट व कादूनाला की जंग में मारे गए कई अंग्रेज
हसनपुर के शासक राजा हुसैन अली खां के नेतृत्व में देशी फौज के सैकड़ों जवानों ने विद्रोह करते हुए सुल्तानपुर के स्थानीय लोगों के साथ अंग्रेजी फौज के खिलाफ जंग लड़ी। गभड़िया, अमहट, कादूनाला में लड़ी गई इस जंग में कैप्टन गिविंग्स समेत कई अंग्रेज मारे गए।
पुलिस लाइंस सहित सरकारी दफ्तरों पर हिंदुस्तानी सिपाहियों का कब्जा हो गया। एक अनुमान के मुताबिक करीब 750 लोग शहीद हो गए। राजा हसन अली खां के शहजादे को भी वीरगति मिली। आज भी वह कब्रगाह हसनपुर में मौजूद है लेकिन निरंतर जर्जर होती जा रही है।
इस कब्रगाह की सुध किसी ने नहीं ली। आजादी के बाद हसनपुर को जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने का दर्जा हासिल हुआ। पूर्व रियासत हसनपुर के उत्तराधिकारी कुंवर मसूद अली कहते हैं कि भ्रष्टाचार देश का सबसे बड़ा मुद्दा है। हमारा इतिहास गवाह है कि राष्ट्रभक्ति में हसनपुर का कोई सानी नहीं है।
फोरलेन में मिले मुआवजे से चल रहा खर्च
हसनपुर रियासत के उत्तराधिकारी कुंवर मसूद अली ने बताया कि इस समय उनके पास रजवाड़े के नाम पर कुल चार बीघा जमीन बची है। फोरलेन सड़क निर्माण के मुआवजे में आठ लाख रुपये मिला है।

14 लाख रुपये मिलना अभी बाकी है। हसनपुर कोट के बगल सप्ताह में दो दिन बाजार लगती है। बाजार से भी कुछ वसूली हो जाती है। कुंवर मसूद अली के सात बेटे व तीन बेटिया हैं। एक बेटी का विवाह हो गया है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद से आज तक शासन व प्रशासन से किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed