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धनज में उफनाई गोमती का कहर
Amarujala Bureau
Updated Wed, 10 Aug 2016 10:10 PM IST
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फसलें हो गईं बर्बाद
- फोटो : अमर उजाला
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गोमती के तराई इलाके में जलभराव की समस्या दूर होने के बाद अब आवागमन की समस्या बढ़ गई है। नींद से जागे स्वास्थ्य विभाग ने जलभराव वाले प्रभावित गांवों में दवाओं के छिड़काव की मुहिम तेज कर दी है। खेतों में पानी भरने से किसानों की करीब 20 फीसदी फसलें नष्ट हो गई हैं। वहीं पशु चिकित्सा विभाग भी छूटे हुए गांवों में मवेशियों को गलाघोंटू के टीकाकरण कार्य में तेजी ला दी है।
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बीते दिनों हुई तेज बारिश से तराई क्षेत्र के अमऊ जासरपुर, कोलिया, सिंहोरिया, जज्जौर, शुक्लाने, धर्मदासपुर समेत कई गांवों में जलभराव हो गया था। खेतों में खड़ीं फसलें पानी में डूब गईं थी। गांव के लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा था। गांव में संक्रामक बीमारियों ने पांस पसार लिए थे। किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गईं थी। मवेशियों का टीकाकरण नहीं होने से पशुपालक परेशान थे।
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अमर उजाला में खबर प्रकाशित होेने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जलभराव वाले गांवों में ब्लीचिंग पाउडर व चूने का छिड़काव किया। वहीं पशुपालन विभाग ने भी छूटे हुए गांवों में पशुओं के टीकाकरण अभियान में तेजी ला दी है।
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धर्मदासपुर निवासी शंकर प्रसाद, अमऊ गांव के उमाकांत, जज्जौर के सूर्यनरायन, बगियवा के रामबहादुर समेत कई लोगों ने बताया कि जलभराव कम हो गया है। खेतों में जलभराव से करीब 20 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं। अमऊ-धर्मदासपुर मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। वहीं अमऊ से कोलिया होते हुए जज्जौर जाने वाला कच्चा मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। इस मार्ग पर लोगों का पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से आवागमन की सुविधा के लिए सड़कों की मरम्मत कराए जाने की मांग की है।