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गोमती को मैला कर रहा नालों का कचरा
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Thu, 11 Feb 2016 10:25 PM IST
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शहर के नालों से निकलने वाला हजारों लीटर पानी गोमती नदी के जल को प्रदूषित कर रहा। प्रदूषित जल के शुद्धीकरण के लिए जल निगम की ओर से लगाए गए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बेमानी साबित हो रहे हैं। लाखों के संयत्र सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। बजट होने के बाद भी बिगड़े हुए हालात में सुधार के लिए अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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रोजाना गोमती नदी में हजारों लीटर दूषित जल प्रवेश कर रहा है। शहर की नालियों से निकलने वाला दूषित जल नालों के माध्यम से गोमती नदी में जा रहा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से जल निगम ने शहर के नालों से निकलने वाले दूषित जल के शुद्धीकरण के लिए लाखों रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए हैं।
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शहर के बढ़ैयावीर, सीताकुंड व विनोबापुरी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की गई है। इस संयंत्र के स्थापित करने का उद्देश्य गंदे पानी की अशुद्धियों को दूर कर उसे शुद्ध करना है। बावजूद इसके ये प्लांट सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। कुछ प्लांट मशीनों में आई तकनीकी कमी के चलते संचालित नहीं हो रहे हैं। इससे सीताकुंड व हथियानाला स्थित प्लांट अधिकतर बंद ही रहता है। बढ़ैयावीर स्थित प्लांट का संचालन कभी-कभार ही होता है।
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