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घरेलू गैस का दाम लगातार बढ़ने से बिगड़ा रसोई का बजट
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27. करौंदीकलां में चूल्हे पर खाना बनाती महिला।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। सरकारी तेल कंपनियों की ओर से घरेलू गैस का दाम लगातार बढ़ाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक बार फिर 25 रुपये की वृद्घि होने से रसोई गैस के एक सिलेंडर का दाम बढ़कर अब 922.50 रुपये तक पहुंच गया है। सितंबर 2020 में घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 649.50 रुपये था।
रसोई गैस का दाम साल भर में लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाने से गृहस्थी का बजट बिगड़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं एक बार फिर से लकड़ी, कंडा के सहारे खाना पकाने को मजबूर हो गई हैं। गैस का दाम बढ़ने से महिलाएं खाना पकाने के लिए बाग से लकड़ी लाने लगी हैं। घरेलू गैस का दाम बढ़ने से महिलाएं सरकार को कोस रही हैं।
मंहगाई के चलते नहीं हो पा रही रिफिलिंग
करौंदीकला/कुड़वार। करौंदीकलां ब्लॉक के सुंदरपुर गांव निवासी माधुरी पत्नी मखंचू ने बताया कि उनके पति ईंट भट्ठे पर काम करके किसी तरह परिवार चलाते हैं। इस बार हुई बरसात में कच्चा मकान भी गिर गया है। रुपये के अभाव मे गैस की रिफिलिंग नहीं हो पा रही है। माधुरी कहती है कि गैस का दाम बढ़ने से उनकी परेशानी बढ़ गई। परशुरामपुर गांव की विमला चूल्हे के सहारे खाना पका रही हैं।
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उन्होंने बताया कि मंहगाई के कारण गैस का सिलेंडर लेना मुश्किल हो गया है। सरकार को गैस का दाम कम करना चाहिए। बौढ़िया बालमऊ गांव की मुरता देवी पत्नी राम लखन आर्थिक तंगी से परेशान हैं। वे कहती हैं कि गैस का दाम लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे रिफिलिंग कराना मुश्किल हो गया है। मजबूरी में चूल्हे पर खाना पकाना पड़ रहा है। परशुरामपुर गांव निवासी छोटकी के पति बाढू पहले रिक्शा चलाते थे लेकिन अब वह भी बंद है।
किसी तरह मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण किया जा रहा है। वे कहती है कि गैस का दाम बढ़ने से लकड़ी, कंडा के सहारे खाना पकाया जा रहा है। कुड़वार ब्लॉक के तिरेछे गांव की गृहणी अनुपमा द्विवेदी का कहना है कि घरेलू गैस का दाम लगातार बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। सरकार को रसोई गैस के दाम पर सख्ती से नियंत्रण करने के लिए कदम उठाना चाहिए। कटावां गांव निवासी मालती निषाद ने बताया कि उन्हें उज्ज्वला योजना के तहत गैस का कनेक्शन मिला है। गैस का दाम अधिक होने से वे लकड़ी व कंडे से खाना पका रही हैं।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी नियमित नहीं ले रहे रिफिल
जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1,87,742 लोगों को कनेक्शन मिल चुका है। घरेलू गैस का दाम बढ़ने से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ता नियमित रूप से रिफिल नहीं ले रहे हैं। फेज-2 में इस योजना के तहत नया कनेक्शन लेने के लिए 15 सौ लोगों ने अभिलेख जमा किए हैं।
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रसोई गैस का दाम साल भर में लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाने से गृहस्थी का बजट बिगड़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं एक बार फिर से लकड़ी, कंडा के सहारे खाना पकाने को मजबूर हो गई हैं। गैस का दाम बढ़ने से महिलाएं खाना पकाने के लिए बाग से लकड़ी लाने लगी हैं। घरेलू गैस का दाम बढ़ने से महिलाएं सरकार को कोस रही हैं।
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मंहगाई के चलते नहीं हो पा रही रिफिलिंग
करौंदीकला/कुड़वार। करौंदीकलां ब्लॉक के सुंदरपुर गांव निवासी माधुरी पत्नी मखंचू ने बताया कि उनके पति ईंट भट्ठे पर काम करके किसी तरह परिवार चलाते हैं। इस बार हुई बरसात में कच्चा मकान भी गिर गया है। रुपये के अभाव मे गैस की रिफिलिंग नहीं हो पा रही है। माधुरी कहती है कि गैस का दाम बढ़ने से उनकी परेशानी बढ़ गई। परशुरामपुर गांव की विमला चूल्हे के सहारे खाना पका रही हैं।
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उन्होंने बताया कि मंहगाई के कारण गैस का सिलेंडर लेना मुश्किल हो गया है। सरकार को गैस का दाम कम करना चाहिए। बौढ़िया बालमऊ गांव की मुरता देवी पत्नी राम लखन आर्थिक तंगी से परेशान हैं। वे कहती हैं कि गैस का दाम लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे रिफिलिंग कराना मुश्किल हो गया है। मजबूरी में चूल्हे पर खाना पकाना पड़ रहा है। परशुरामपुर गांव निवासी छोटकी के पति बाढू पहले रिक्शा चलाते थे लेकिन अब वह भी बंद है।
किसी तरह मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण किया जा रहा है। वे कहती है कि गैस का दाम बढ़ने से लकड़ी, कंडा के सहारे खाना पकाया जा रहा है। कुड़वार ब्लॉक के तिरेछे गांव की गृहणी अनुपमा द्विवेदी का कहना है कि घरेलू गैस का दाम लगातार बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। सरकार को रसोई गैस के दाम पर सख्ती से नियंत्रण करने के लिए कदम उठाना चाहिए। कटावां गांव निवासी मालती निषाद ने बताया कि उन्हें उज्ज्वला योजना के तहत गैस का कनेक्शन मिला है। गैस का दाम अधिक होने से वे लकड़ी व कंडे से खाना पका रही हैं।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी नियमित नहीं ले रहे रिफिल
जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1,87,742 लोगों को कनेक्शन मिल चुका है। घरेलू गैस का दाम बढ़ने से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ता नियमित रूप से रिफिल नहीं ले रहे हैं। फेज-2 में इस योजना के तहत नया कनेक्शन लेने के लिए 15 सौ लोगों ने अभिलेख जमा किए हैं।