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200 परिषदीय विद्यालयों में बनेगा किचन गार्डन
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दूबेपुर के परिषदीय विद्यालय में बना किचन गार्डन।
- फोटो : SULTANPUR
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सुल्तानपुर। जिले के 200 परिषदीय विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को पांच हजार रुपये शासन की ओर से दिए जाएंगे। जिले में किचन गार्डन बनाने के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके पहले गत वर्ष 10 विद्यालयों में पांच-पांच हजार रुपये की धनराशि दी गई थी।
मध्याह्न भोजन योजना में हरी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ छात्र-छात्राओं में खेती-किसानी की समझ विकसित करने के लिए परिषदीय विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित किया जाएगा। किचन गार्डन विकसित करने के लिए शासन की ओर से प्रत्येक विद्यालय को पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस पैसे से खाद, बीज व अन्य जरूरी सामान खरीदे जाएंगे। जिले में 2064 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें से 200 विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे। किचन गार्डन के लिए ऐसे विद्यालयों का चयन किया जाना है, जिसमें पर्याप्त स्थान हो। बाउंड्रीवॉल की व्यवस्था हो, सिंचाई के लिए सबमर्सिबल पंप लगा तथा परिषदीय विद्यालय में पहुंचने के लिए आवागमन का सुगम रास्ता हो। किचन गार्डन के लिए जिले को दिए गए 10 लाख रुपये में से छह लाख रुपये केंद्रांश तथा चार लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाएंगे।
जिला समन्वयक मध्याह्न भोजन योजना संदीप यादव ने बताया कि इसके पहले भी 10 विद्यालयों को पांच-पांच हजार रुपये की दर से पिछले साल धनराशि दी गई थी। गत वर्ष कई विद्यालयों में शिक्षकों की ओर से स्वयं धन खर्च कर किचन गार्डन विकसित किया गया था। किचन गार्डन विकसित करने का फायदा बच्चों के साथ ही शिक्षकों को भी हुआ है। इससे बच्चों में खेती किसानी की समझ बढ़ी है। साथ ही परिसर भी स्वच्छ व उपयोगी हो पाया है। किचन गार्डन के लिए बाउंड्रीवॉल का होना जरूरी है। ताकि छुट्टा जानवरों एवं अराजकतत्वों से किचन गार्डन को नुकसान न हो।
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सब्जियों के साथ होगी मसाले की खेती
किचन गार्डन में न सिर्फ हरी पत्तेदार सब्जियां उगाई जाएंगी, बल्कि मसाले की भी खेती की जाएगी। हरी सब्जियों में गोभी, मटर, टमाटर, आलू, बैंगन, पालक, सोया-मेथी, मूली, गाजर उगाए जाएंगे। वहीं मसालों की खेती में हल्दी, धनिया, मिर्चा व सौंफ उगाई जाएगी।
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मध्याह्न भोजन योजना में हरी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ छात्र-छात्राओं में खेती-किसानी की समझ विकसित करने के लिए परिषदीय विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित किया जाएगा। किचन गार्डन विकसित करने के लिए शासन की ओर से प्रत्येक विद्यालय को पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस पैसे से खाद, बीज व अन्य जरूरी सामान खरीदे जाएंगे। जिले में 2064 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इसमें से 200 विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे। किचन गार्डन के लिए ऐसे विद्यालयों का चयन किया जाना है, जिसमें पर्याप्त स्थान हो। बाउंड्रीवॉल की व्यवस्था हो, सिंचाई के लिए सबमर्सिबल पंप लगा तथा परिषदीय विद्यालय में पहुंचने के लिए आवागमन का सुगम रास्ता हो। किचन गार्डन के लिए जिले को दिए गए 10 लाख रुपये में से छह लाख रुपये केंद्रांश तथा चार लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाएंगे।
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जिला समन्वयक मध्याह्न भोजन योजना संदीप यादव ने बताया कि इसके पहले भी 10 विद्यालयों को पांच-पांच हजार रुपये की दर से पिछले साल धनराशि दी गई थी। गत वर्ष कई विद्यालयों में शिक्षकों की ओर से स्वयं धन खर्च कर किचन गार्डन विकसित किया गया था। किचन गार्डन विकसित करने का फायदा बच्चों के साथ ही शिक्षकों को भी हुआ है। इससे बच्चों में खेती किसानी की समझ बढ़ी है। साथ ही परिसर भी स्वच्छ व उपयोगी हो पाया है। किचन गार्डन के लिए बाउंड्रीवॉल का होना जरूरी है। ताकि छुट्टा जानवरों एवं अराजकतत्वों से किचन गार्डन को नुकसान न हो।
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सब्जियों के साथ होगी मसाले की खेती
किचन गार्डन में न सिर्फ हरी पत्तेदार सब्जियां उगाई जाएंगी, बल्कि मसाले की भी खेती की जाएगी। हरी सब्जियों में गोभी, मटर, टमाटर, आलू, बैंगन, पालक, सोया-मेथी, मूली, गाजर उगाए जाएंगे। वहीं मसालों की खेती में हल्दी, धनिया, मिर्चा व सौंफ उगाई जाएगी।