{"_id":"63ac86531a5fd35e2e1fd6d2","slug":"gangman-s-shoes-started-breaking-as-soon-as-he-landed-on-the-track-sultanpur-news-lko6639998155","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sultanpur News: ट्रैक पर उतरते ही टूटने लगे ट्रैक मेंटेनरों के जूते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sultanpur News: ट्रैक पर उतरते ही टूटने लगे ट्रैक मेंटेनरों के जूते
विज्ञापन
सुल्तानपुर। स्थानीय रेल उप मंडल में कार्यरत ट्रैक मेंटेनरों को दिए गए सेफ्टी शूज एक-दो दिन में ही टूट जा रहे हैं। ट्रैक मेंटेनरों का आरोप है कि उन्हें मानक के मुताबिक जूते नहीं दिए जा रहे हैं। जूतों की गुणवत्ता बहुत खराब है।
सुल्तानपुर रेल उप मंडल में करीब 900 ट्रैक मेंटेनरों की ड्यूटी रेलपथ की देखरेख के लिए लगाई गई है। रेलवे की ओर से ट्रैक मेंटेनरों को ड्यूटी के दौरान पहनने के लिए रेन कोट विद कैप, वाटर प्रूफ ट्राउजर, विंटर जैकेट्स, सेफ्टी शूज, सेफ्टी हेलमेट, टूल किट बैग, रिचार्जेबल थ्री सेल की एलईडी टॉर्च दिए जाने की व्यवस्था है। जाड़े के समय में हर साल की तरह से इस बार भी सेफ्टी शूज का वितरण शुरू किया गया है।
सुल्तानपुर रेल उप मंडल के नौ सौ में से करीब पांच सौ ट्रैक मेंटेनरों को सेफ्टी शूज दिया जा चुका है। ट्रैक मेंटेनरों ने बताया कि रेलवे की ओर से प्रति ट्रैक मेंटेनर सेफ्टी शूज के लिए 14 सौ रुपये का व्यय तय किया गया है। इसके तहत ब्रांडेड कंपनियों के जूते क्रय किए जाने थे। ट्रैक मेंटेनरों का आरोप है कि उन्हें घटिया कंपनी के जूते दिए जा रहे हैं। एक-दो दिन ड्यूटी करने के बाद अधिकांश सेफ्टी शूज की सोल जूते से अलग हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुल्तानपुर रेल उप मंडल में करीब 900 ट्रैक मेंटेनरों की ड्यूटी रेलपथ की देखरेख के लिए लगाई गई है। रेलवे की ओर से ट्रैक मेंटेनरों को ड्यूटी के दौरान पहनने के लिए रेन कोट विद कैप, वाटर प्रूफ ट्राउजर, विंटर जैकेट्स, सेफ्टी शूज, सेफ्टी हेलमेट, टूल किट बैग, रिचार्जेबल थ्री सेल की एलईडी टॉर्च दिए जाने की व्यवस्था है। जाड़े के समय में हर साल की तरह से इस बार भी सेफ्टी शूज का वितरण शुरू किया गया है।
विज्ञापन
सुल्तानपुर रेल उप मंडल के नौ सौ में से करीब पांच सौ ट्रैक मेंटेनरों को सेफ्टी शूज दिया जा चुका है। ट्रैक मेंटेनरों ने बताया कि रेलवे की ओर से प्रति ट्रैक मेंटेनर सेफ्टी शूज के लिए 14 सौ रुपये का व्यय तय किया गया है। इसके तहत ब्रांडेड कंपनियों के जूते क्रय किए जाने थे। ट्रैक मेंटेनरों का आरोप है कि उन्हें घटिया कंपनी के जूते दिए जा रहे हैं। एक-दो दिन ड्यूटी करने के बाद अधिकांश सेफ्टी शूज की सोल जूते से अलग हो गए हैं।
विज्ञापन