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Sultanpur News: जरबेरा के फूलों से तरक्की की खुशबू

Thu, 30 Jan 2025 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Thu, 30 Jan 2025 12:40 AM IST
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Fragrance of progress from Gerbera flowers
पॉलीहाउस में लगे फूलों को देखते हुए
सुल्तानपुर। पॉलीहाउस में सब्जियों और फूलों की खेती को उद्यान विभाग बढ़ावा दे रहा है। 50 प्रतिशत अनुदान से किसान जरबेरा की खेती शुरू कर सकते हैं और एक अनुमान के मुताबिक एक साल में 20 लाख तक की कमाई भी कर सकते हैं।
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बेमौसमी सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग संरक्षित खेती करने वाले किसानों को खेती लागत पर 50 फीसदी अनुदान देगा। इसके लिए किसान को सब्जियों और फूलों की खेती के लिए पाॅली हाउस स्थापित करनी होगी। उद्यान विभाग की ओर से 8000 वर्गमीटर पॉली हॉउस को स्थापित करने पर 58 लाख 16 हजार रुपये आएगा। अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से दी जाती है।
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इस योजना के तहत सब्जियों और फूलों की खेती करने के इच्छुक किसान किसी भी कार्य दिवस पर उद्यान विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। पॉली हाउस निर्माण के लिए आवेदन करने वाले किसानों का प्रस्ताव निदेशालय उद्यान को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद किसान को पॉली हाउस का निर्माण पंजीकृत फर्म से कराना होगा।
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पॉलीहाउस में रोपित होंगे 50 हजार जरबेरा के पौधे
वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक पवन कुमार सिंह ने बताया कि 8000 वर्गमीटर के पॉली हाउस के दो पार्ट में 25-25 हजार जरबेरा के पौधे रोपित किए जाएंगे। जरबेरा का एक पौधा साल भर में 20 फूल देगा। बाजार में एक फूल की कीमत कम से कम पांच रुपये है। जरबेरा का पौधा तीन साल तक चलता है और इसमें एक साल में करीब 50 हजार फूल उगते हैं। इस हिसाब से जरबेरा पुष्प की खेती में आने वाली लागत को छोड़कर प्रतिवर्ष 20 लाख का मुनाफा कमाया जा सकता है।


बेहतर होतीं पॉलीहाउस की फसलें

पॉलीहाउस में खेती से उगाई गई बेमौसमी सब्जियां और फूल गुणवत्ता में खुले में की गई खेती से बेहतर होती है। इसका बाजार मूल्य भी अधिक होता है। इन संरचनाओं में जरबेरा, कट रोज आदि फूलों की खेती की जाती है। यह खुले में उगाई जाने वाली सब्जियों और फूलों से बेहतर होते हैं।

- रणविजय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी

डोभियारा के डॉ. आशीष झा कर रहे जरबेरा की खेती

बल्दीराय तहसील क्षेत्र के डोभियारा गांव निवासी डॉ. आशीष झा ने पॉलीहाउस निर्माण के लिए उद्यान विभाग में आवेदन किया था। निदेशालय से स्वीकृति मिलने के बाद उन्होंने पंजीकृत फर्म से पॉलीहाउस का निर्माण कराया। विभाग से उन्हें 50 फीसदी अनुदान भी मिला। इस समय उनके पॉली हाउस में जरबेरा के पौधे तैयार हो गए हैं। कुछ पौधों में फूल भी आ गए हैं।
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