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गोमती नदी का पानी घटा, बाढ़ से तराई में अधिकांश फसलें नष्ट
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सुल्तानपुर। गोमती नदी के पानी में छठवें दिन गिरावट आई है। छह दिन तक लगातार पानी की चपेट में रहने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की अधिकांश फसलें नष्ट हो गई हैं। बाढ़ से पशुओं में खुरपका रोग की शुरुआत हो गई है। कई गांवों में पशु खुरपका से पीड़ित हैं। हालांकि पानी घटने से प्रभावित ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
पिछले सप्ताह हुई बारिश से बढ़े गोमती नदी के जलस्तर में छठवें दिन गिरावट आई है। प्रशासन के मुताबिक गोमती नदी का पानी करीब 84 सेंटीमीटर पर पहुंच गया है। पानी घटने से तराई के अन्य गांवों में बाढ़ का खतरा टल गया है। छह दिन बाद नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद प्रभावित गांवों में पशुओं में संक्रामक रोग शुरू हो गया है। क्षेत्र के औदहा, अमऊ, जासरपुर, जज्जौर, धर्मदासपुर समेत अन्य गांवों के कई पशु खुरपका व मुंहपका रोग से पीड़ित हो गए हैं। पशुपालकों को रोग अन्य पशुओं में फैलने की आशंका बनी है। इसके साथ ही लगातार छह दिन तराई क्षेत्रों में पानी भरे रहने से अधिकांश फसलें नष्ट हो गई हैं।
किसानों के धान, अरहर, उड़द, तिल्ली समेत अन्य फसलें पानी में गल गई हैं। फसलें नष्ट होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इधर, बाढ़ का पानी घटने से दूसरी जगहों पर शरण लिए ग्रामीण धीरे-धीरे अपने गांव में लौटने लगे हैं। घर लौटने वाले ग्रामीण भी संक्रामक रोग फैलने की आशंका से परेशान हैं। जिला दैवीय आपदा अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि संक्रामक रोग की रोकथाम व प्रभावित ग्रामीणों की हर संभव सहायता के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित लोगों को सुविधाएं दी जा रही हैं।
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पिछले सप्ताह हुई बारिश से बढ़े गोमती नदी के जलस्तर में छठवें दिन गिरावट आई है। प्रशासन के मुताबिक गोमती नदी का पानी करीब 84 सेंटीमीटर पर पहुंच गया है। पानी घटने से तराई के अन्य गांवों में बाढ़ का खतरा टल गया है। छह दिन बाद नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद प्रभावित गांवों में पशुओं में संक्रामक रोग शुरू हो गया है। क्षेत्र के औदहा, अमऊ, जासरपुर, जज्जौर, धर्मदासपुर समेत अन्य गांवों के कई पशु खुरपका व मुंहपका रोग से पीड़ित हो गए हैं। पशुपालकों को रोग अन्य पशुओं में फैलने की आशंका बनी है। इसके साथ ही लगातार छह दिन तराई क्षेत्रों में पानी भरे रहने से अधिकांश फसलें नष्ट हो गई हैं।
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किसानों के धान, अरहर, उड़द, तिल्ली समेत अन्य फसलें पानी में गल गई हैं। फसलें नष्ट होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इधर, बाढ़ का पानी घटने से दूसरी जगहों पर शरण लिए ग्रामीण धीरे-धीरे अपने गांव में लौटने लगे हैं। घर लौटने वाले ग्रामीण भी संक्रामक रोग फैलने की आशंका से परेशान हैं। जिला दैवीय आपदा अधिकारी उमाकांत त्रिपाठी का कहना है कि संक्रामक रोग की रोकथाम व प्रभावित ग्रामीणों की हर संभव सहायता के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित लोगों को सुविधाएं दी जा रही हैं।
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