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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sultanpur News ›   Embezzlement of 125 crore land deal in Amethi

सब्सिडी की आड़ में 125 करोड़ का खेेल

Tue, 25 Aug 2015 10:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर Updated Tue, 25 Aug 2015 10:03 PM IST
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गौरीगंज। रोजगार देने के नाम पर 90 के दशक में औद्योगिक क्षेत्र कौहार में खुली मेसर्स सम्राट बाइसकिल लिमिटेड के मालिकान ने राजस्व अफसरों को मिलाकर सब्सिडी की आड़ में करीब 125 करोड़ रुपये की जमीन हड़पने का बड़ा खेल खेला। अफसरों की मदद से सम्राट साइकिल के मालिकों ने यूपीएसआईडीसी की ओर से स्वयं को पट्टा मिली भूमि के साथ ही निगम की ओर से अधिग्रहीत संपूर्ण 49.84 हेक्टेयर भूमि को राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करवा लिया।

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राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दिल्ली के जैन बंधुओं ने उनके संसदीय क्षेत्र अमेठी के युवाओं को रोजगार देने के नाम पर साइकिल की फैक्ट्री डालने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के सामने रखा था। प्रधानमंत्री राजीव गांधी स्वयं अमेठी से सांसद थे। इसलिए केंद्र सरकार ने तत्काल इस प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद यूपीएसआईडीसी ने वर्ष 1983 में किसानों से अधिग्रहीत 49.84 हेक्टेयर (करीब 200 बीघा) भूमि में 65.57 एकड़ (करीब 105 बीघा) भूमि निर्धारित दर पर जैन बंधुओं की फर्म मेसर्स सम्राट बाइसकिल लिमिटेड को 90 वर्ष के लीज (पट्टा) पर दे दी। मेसर्स सम्राट बाइसकिल को पट्टा विलेख की यह कार्यवाही आठ अगस्त 1986 को पूर्ण हुई थी। हालांकि जैन बंधुओं ने वर्ष 1986 में यूपीएसआईडीसी से पट्टे पर मिली 65.57 एकड़ भूमि के साथ ही निगम की ओर से किसानों से अधिग्रहीत संपूर्ण 49.84 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1990 में अपने नाम दर्ज करवा ली।
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 यूपीएसआईडीसी को अधिग्रहीत की गई संपूर्ण भूमि सम्राट साइकिल के हड़प लेने की जानकारी 20 वर्ष बाद 2010 में हुई। जानकारी मिलने के बाद निगम ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर इस पर आपत्ति जताई। निगम की आपत्ति पर वर्ष 2011 से एसडीएम गौरीगंज कोर्ट में इस मामले पर फैसला देने के लिए सुनवाई चल रही है।
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इनसेट
मामले की हो गहन जांच : क्षेत्रीय प्रबंधक
यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस पाठक ने सम्राट साइकिल के मालिकान पर कूटरचना कर निगम की भूमि हड़पने का आरोप लगाया। पाठक ने कहा कि राजस्व विभाग की मदद से जैन बंधुओं की ओर से की गई इस धोखाधड़ी की गहन जांच कराई जानी चाहिए। पाठक ने बताया कि यह पहली बार हुआ है कि किसी आवंटी ने पट्टे पर मिली यूपीएसआईडीसी की भूमि को राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करवाया हो।


कंपनी ने किए बड़े खेल : उमाशंकर पांडेय
जिला बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष उमाशंकर पांडेय का दावा है कि कंपनी लगाने के नाम पर जैन बंधुओं ने बड़े खेल किए। पांडेय के दावों पर यकीन करें तो जैन बंधुओं ने न सिर्फ राजीव गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार को मिलाकर करीब 55 करोड़ रुपये की सब्सिडी डकार ली बल्कि कंपनी को आवंटित आयरन व स्टील का कोटा भी हजम कर गए। मामले को उठाने वाले अधिवक्ता उमाशंकर पांडेय की मानें तो 49.84 हेक्टेयर कॉमर्शियल भूमि की मौजूदा कीमत करीब 125 करोड़ होगी। जो 65.57 एकड़ जमीन राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने खरीदी है वह लगभग साढ़े पैंसठ करोड़ रुपये की होगी।



यूपीएसआईडीसी ने मामूली दर पर ली थी भूमि
कौहार में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने के लिए यूपीएसआईडीसी ने वर्ष 1983 में कौहार, दुलापुर खुर्द और भनियापुर के किसानों की 49.84 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो इस भूमि के लिए यूपीएसआईडीसी ने जिला प्रशासन व भूमि अध्याप्ति अधिकारी के माध्यम से किसानों को पांच से 13 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से भुगतान किया था। साथ ही ग्राम समाज की 42.06 हेक्टेयर भूमि का राजस्व जिला कोषागार में जमा कर निगम ने भूमि का पुनर्ग्रहण किया था। मौजूदा समय जहां निगम की ओर से  किसानों से ली गई संपूर्ण 49.84 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में सम्राट बाइसकिल लिमिटेड के नाम दर्ज हो चुकी है वहीं पुनर्ग्रहीत की गई 42.06 हेक्टेयर भूमि अभी निगम के ही नाम है।

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