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Sultanpur News: इलेक्ट्रिक चाक से कुम्हारों की माटी कला को मिलेगी रफ्तार
Sun, 03 May 2026 11:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 03 May 2026 11:32 PM IST
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सुल्तानपुर। कुम्हारों की पारंपरिक हुनर आधुनिक तकनीक के सहारे नई उड़ान भरेगा। प्रदेश सरकार ने कुम्हारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिजली से चलने वाले चाक देने की योजना शुरू की है, जिससे उनका काम तेज और आय बढ़ाने वाला बन सके। उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड के जरिये वर्ष 2026-27 में जिले के 38 कारीगरों को निशुल्क इलेक्ट्रिक चाक (टूल किट) दिए जाएंगे।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राम सुरेश यादव ने बताया कि इस पहल का मकसद कारीगरों की मेहनत कम करना और उत्पादन क्षमता बढ़ाना है, ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप काम कर सकें। बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना जरूरी है। साथ ही वह परंपरागत माटी कला से जुड़ा कारीगर हो और उसका नाम तहसील की प्रमाणित सूची में दर्ज होना अनिवार्य है।
इलेक्ट्रिक चाक मिलने से कुम्हारों को हाथ से चाक घुमाने की मेहनत से राहत मिलेगी और कम समय में अधिक व बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। इससे उनकी आमदनी में सीधा इजाफा होने की उम्मीद है। योजना को और प्रभावी बनाने के लिए इस बार तीन पात्र कारीगरों को पगमिल मशीन (मिट्टी गूंथने वाली मशीन) भी दी जाएगी। यह योजना कुम्हारों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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ऐसे करें आवेदन
इच्छुक कारीगर 30 मई 2026 तक किसी भी कार्य दिवस में जिला ग्रामोद्योग कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। भरे हुए आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ उसी कार्यालय में जमा करने होंगे। समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
क्या है पगमिल मशीन
पगमिल मशीन मिट्टी को तेजी और समान रूप से गूंथने में मदद करती है। इससे कारीगरों का समय और श्रम दोनों बचते हैं, वहीं तैयार मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
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जिला ग्रामोद्योग अधिकारी राम सुरेश यादव ने बताया कि इस पहल का मकसद कारीगरों की मेहनत कम करना और उत्पादन क्षमता बढ़ाना है, ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप काम कर सकें। बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का ग्रामीण क्षेत्र का निवासी होना जरूरी है। साथ ही वह परंपरागत माटी कला से जुड़ा कारीगर हो और उसका नाम तहसील की प्रमाणित सूची में दर्ज होना अनिवार्य है।
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इलेक्ट्रिक चाक मिलने से कुम्हारों को हाथ से चाक घुमाने की मेहनत से राहत मिलेगी और कम समय में अधिक व बेहतर उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे। इससे उनकी आमदनी में सीधा इजाफा होने की उम्मीद है। योजना को और प्रभावी बनाने के लिए इस बार तीन पात्र कारीगरों को पगमिल मशीन (मिट्टी गूंथने वाली मशीन) भी दी जाएगी। यह योजना कुम्हारों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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ऐसे करें आवेदन
इच्छुक कारीगर 30 मई 2026 तक किसी भी कार्य दिवस में जिला ग्रामोद्योग कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। भरे हुए आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ उसी कार्यालय में जमा करने होंगे। समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
क्या है पगमिल मशीन
पगमिल मशीन मिट्टी को तेजी और समान रूप से गूंथने में मदद करती है। इससे कारीगरों का समय और श्रम दोनों बचते हैं, वहीं तैयार मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।