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Sultanpur News: ईद मिलादुन्नबी पांच को, शुरू हुईं तैयारियां
Wed, 03 Sep 2025 02:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Wed, 03 Sep 2025 02:19 AM IST
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सुल्तानपुर। जिले में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन ईद मिलादुन्नबी को मनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। पांच सितंबर होने वाले आयोजन पर सड़कों, गलियों और बाजारों में सजावट की जा रही है।
शहर व ग्रामीण इलाकों में निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी के लिए झांकियां सजाई जा रही है। युवाओं के साथ ही छोटे बच्चों की टोलियां जुलूस में चार चांद लगाएंगी। दूबेपुर क्षेत्र के महाजितपुर गांव में ईद मिलादुन्नबी की तैयारी में मोहम्मद फैजान, अल्ताफ, साहिब राजा, अता अकबर समेत कई युवा जुटे हैं। मंगलवार शाम महाजितपुर चौराहा रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा।
इंसानियत का पैगाम देना ही असली जश्न
पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की जिंदगी इंसानियत के लिए रहमत है। उनकी सुन्नत पर चलना, गरीबों की सहायता करना और आपस में मेलजोल बरकरार रखना ही ईद-ए-मिलादुन्नबी का असली जश्न है। - मौलाना अब्दुल लतीफ, पेश इमाम चौक जामा मस्जिद।
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अमन का देते थे पैगाम
पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब 12 तारीख को पैदा हुए थे। इस दौरान पूरी दुनिया नबी के नूर से जगमगा उठी। नबी जब दुनिया में तशरीफ लाए तो बच्चियों को रहमत बना दिया। हमेशा अमन का पैगाम देते थे। - हाफिज शाबान रजा नूरी, इमाम-ए-जुमा बेलहरी जामा मस्जिद।
मुसलमानों के पवित्र दिन है बारह रबीउल अव्वल
मुसलमानों के लिए बारह रबीउल अव्वल बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि यह दिन पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म का प्रतीक है। इस दिन दुनिया भर में मुसलमान खुशी मनाते हैं। उनके संदेशों और सुन्नत से प्रेरणा लेकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। - हाफिज मोहम्मद शहबान साहब, पेश इमाम जामा मस्जिद हयातनगर।
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शहर व ग्रामीण इलाकों में निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी के लिए झांकियां सजाई जा रही है। युवाओं के साथ ही छोटे बच्चों की टोलियां जुलूस में चार चांद लगाएंगी। दूबेपुर क्षेत्र के महाजितपुर गांव में ईद मिलादुन्नबी की तैयारी में मोहम्मद फैजान, अल्ताफ, साहिब राजा, अता अकबर समेत कई युवा जुटे हैं। मंगलवार शाम महाजितपुर चौराहा रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा।
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इंसानियत का पैगाम देना ही असली जश्न
पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की जिंदगी इंसानियत के लिए रहमत है। उनकी सुन्नत पर चलना, गरीबों की सहायता करना और आपस में मेलजोल बरकरार रखना ही ईद-ए-मिलादुन्नबी का असली जश्न है। - मौलाना अब्दुल लतीफ, पेश इमाम चौक जामा मस्जिद।
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अमन का देते थे पैगाम
पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब 12 तारीख को पैदा हुए थे। इस दौरान पूरी दुनिया नबी के नूर से जगमगा उठी। नबी जब दुनिया में तशरीफ लाए तो बच्चियों को रहमत बना दिया। हमेशा अमन का पैगाम देते थे। - हाफिज शाबान रजा नूरी, इमाम-ए-जुमा बेलहरी जामा मस्जिद।
मुसलमानों के पवित्र दिन है बारह रबीउल अव्वल
मुसलमानों के लिए बारह रबीउल अव्वल बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि यह दिन पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्म का प्रतीक है। इस दिन दुनिया भर में मुसलमान खुशी मनाते हैं। उनके संदेशों और सुन्नत से प्रेरणा लेकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। - हाफिज मोहम्मद शहबान साहब, पेश इमाम जामा मस्जिद हयातनगर।