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नहरों में उड़ रही धूल, पानी के लिए पशु पक्षी बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
Updated Sat, 09 Apr 2016 11:03 PM IST
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सूखी पड़ी नहर
- फोटो : अमर उजाला
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गर्मी में तालाबों के सूखने एवं नदियों में पानी घटने के बाद नहरों ने भी धोखा दे दिया है। सिंचाई का प्रमुख स्रोत मानी जाने वाली नहरों को रोस्टर के अनुसार बंद कर दिए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु-पक्षियों एवं जंगली जानवरों को पानी ढूंढे़ नहीं मिल रहा है।
सिंचाई के वक्त भी अक्सर नहरों व माइनरों में पानी की कमी रहने से किसानों की फसलों की पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है। नहरों पर आधारित तकरीबन 229 हजार हेक्टेयर से अधिक सिंचित क्षेत्र की सिंचाई नहीं हो पाने का असर फसलों के उत्पादन पर भी पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग नहर के पानी का उपयोग सिंचाई के अलावा मवेशियों को नहलाने-धुलाने में करते हैं। मवेशियों को पानी पिलाने में भी सुविधा होती है।
800 किमी में नहरों का संजाल
जिले में शारदा सहायक खंड-49 व खंड-16 से नहरों, रजबहों और माइनरों का संचालन हो रहा है। खंड-16 के तहत नौ रजबहे और 121 माइनरों का संचालन किया जा रहा है। खंड-49 से 12 व सिंचाई खंड से 44 माइनरों का संचालन किया जाता है। जिले में तकरीबन 800 किमी के दायरे में नहरों का जाल फैला है इससे 229 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई की जाती है।
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मौजूदा समय में एक भी नहर और माइनर में पानी नहीं आ रहा है। तालाब सूखने एवं नदियों का जलस्तर घटने के साथ माइनरों में पानी नहीं आने से किसानों के सामने जायद की फसलों की सिंचाई की समस्या खड़ी हो गई है। इसके साथ ही जंगली जानवरों एवं पशु-पक्षियों को ग्रामीण अंचलों में पानी नहीं मिल रहा है।
पिछली बार भी नहीं मिला आशा के अनुरूप पानी
पिछले रोस्टर में नहरों में पानी किसानों की उम्मीद के अनुरूप नहीं छोड़ा गया था, जिससे उन्हें सिंचाई के लिए अन्य संसाधनों का सहारा लेना पड़ा था। किसानों के मुताबिक माइनरों को छोड़ भी दें तो नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं आता। पानी की कमी से फसलों की सिंचाई प्रभावित हुई।
10 मई के बाद छोड़ा जाएगा पानी
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नहरों को रोस्टर के अनुुरूप संचालित किया जाता है। दो अप्रैैल से नहरों में पानी बंद कर दिया गया है। 10 मई तक पानी बंद रहेगा। इसके बाद नहरों में पानी छोड़े जाने की उम्मीद विभागीय अधिकारी जता रहे हैं।
होती है सिल्ट सफाई
शारदा सहायक खंड-49 के अधिशाषी अभियंता पीपी शुक्ला ने बतायुा किया कि नहरों में पानी छोड़ने के बाद नियमित जांच की जाती है। टेल तक पानी पहुंचाने में सिल्ट की समस्या आती है। समय-समय पर नहरों और माइनरों की सिल्ट सफाई का कार्य कराया जाता है।
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सिंचाई के वक्त भी अक्सर नहरों व माइनरों में पानी की कमी रहने से किसानों की फसलों की पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही है। नहरों पर आधारित तकरीबन 229 हजार हेक्टेयर से अधिक सिंचित क्षेत्र की सिंचाई नहीं हो पाने का असर फसलों के उत्पादन पर भी पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग नहर के पानी का उपयोग सिंचाई के अलावा मवेशियों को नहलाने-धुलाने में करते हैं। मवेशियों को पानी पिलाने में भी सुविधा होती है।
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800 किमी में नहरों का संजाल
जिले में शारदा सहायक खंड-49 व खंड-16 से नहरों, रजबहों और माइनरों का संचालन हो रहा है। खंड-16 के तहत नौ रजबहे और 121 माइनरों का संचालन किया जा रहा है। खंड-49 से 12 व सिंचाई खंड से 44 माइनरों का संचालन किया जाता है। जिले में तकरीबन 800 किमी के दायरे में नहरों का जाल फैला है इससे 229 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई की जाती है।
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मौजूदा समय में एक भी नहर और माइनर में पानी नहीं आ रहा है। तालाब सूखने एवं नदियों का जलस्तर घटने के साथ माइनरों में पानी नहीं आने से किसानों के सामने जायद की फसलों की सिंचाई की समस्या खड़ी हो गई है। इसके साथ ही जंगली जानवरों एवं पशु-पक्षियों को ग्रामीण अंचलों में पानी नहीं मिल रहा है।
पिछली बार भी नहीं मिला आशा के अनुरूप पानी
पिछले रोस्टर में नहरों में पानी किसानों की उम्मीद के अनुरूप नहीं छोड़ा गया था, जिससे उन्हें सिंचाई के लिए अन्य संसाधनों का सहारा लेना पड़ा था। किसानों के मुताबिक माइनरों को छोड़ भी दें तो नहरों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं आता। पानी की कमी से फसलों की सिंचाई प्रभावित हुई।
10 मई के बाद छोड़ा जाएगा पानी
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक नहरों को रोस्टर के अनुुरूप संचालित किया जाता है। दो अप्रैैल से नहरों में पानी बंद कर दिया गया है। 10 मई तक पानी बंद रहेगा। इसके बाद नहरों में पानी छोड़े जाने की उम्मीद विभागीय अधिकारी जता रहे हैं।
होती है सिल्ट सफाई
शारदा सहायक खंड-49 के अधिशाषी अभियंता पीपी शुक्ला ने बतायुा किया कि नहरों में पानी छोड़ने के बाद नियमित जांच की जाती है। टेल तक पानी पहुंचाने में सिल्ट की समस्या आती है। समय-समय पर नहरों और माइनरों की सिल्ट सफाई का कार्य कराया जाता है।