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धरती पर दिखेंगे देवलोक के अलौकिक दृश्य
Amarujala Bureau
Updated Sun, 17 Sep 2017 10:08 PM IST
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दुर्गा महोत्सव की तैयारियां
- फोटो : अमर उजाला
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देश-विदेश के धार्मिक स्थलों के साथ देवलोक की अनूठी छटाओं का दृश्य इस बार भी दुर्गा पूजा महोत्सव में देखने को मिलेगा। विजयादशमी से शुरू होने वाले महोत्सव की तैयारियों में पूजा समितियां दिन-रात जुटी हुई हैं। हर वर्ष लाखों की भीड़ जिले के ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव की शोभा देखने के लिए उमड़ती है। शहर के करीब 200 पंडालों में मां भगवती के विविध स्वरूपों के दर्शन मिलेंगे। देवी प्रतिमाओं को जीवंत रूप देने के साथ-साथ पंडालों को भव्य स्वरूप देने का कार्य जारी है।
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1959 में हुआ दुर्गा पूजा का शुभारंभ
जिले में दुर्गापूजा का शुभारंभ 1959 में ठठेरी बाजार में भिखारीलाल सोनी व उनके सहयोगियों ने कराया था। यहां से शुरू हुआ दुर्गापूजा का सिलसिला समय के साथ बढ़ता ही गया। स्व. भिखारीलाल के चचेरे भाई बाबा राधेश्याम सोनी बताते हैं कि दूसरी प्रतिमा की स्थापना रुहट्ठा गली में बंगाली प्रसाद सोनी ने 1961 में कराई। 1970 में दो प्रतिमाएं और जुड़ीं। इसके अगले वर्ष कालीचरन ने श्री संतोषी माता और राजेंद्र प्रसाद (रज्जन सेठ) ने मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना कराई। 1973 में श्री अष्टभुजी माता, श्री अंबे माता, श्री गायत्री माता, श्री अन्नपूर्णा माता की स्थापना के साथ ही दुर्गापूजा महोत्सव में तब्दील हो गया। यही नहीं इस समय शहर के दुर्गापूजा महोत्सव से प्रेरित होकर जिले की सभी तहसीलों व कस्बाई क्षेत्रों में भी प्रतिमाओं की स्थापना की जाने लगी है।
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बाटा गली में बन रहा ज्वाला देवी का मंदिर
शहर की बाटा गली में पार्वती माता पूजा समिति के तत्वावधान में इस बार दुर्गा पूजा महोत्सव को लेकर हिमाचल की ज्वाला देवी मंदिर की गुफा का निर्माण हो रहा है। समिति के मंत्री मुकेश मिश्र ने बताया कि पिछली बार मां वैष्णो की गुफा बनाई गई थी। इस बार ज्वाला देवी मंदिर के निर्माण में करीब तीन लाख रुपये का खर्च आ रहा है। डेढ़ लाख रुपये गुफा के निर्माण में लगे झारखंड के कारीगर को दिया जाएगा। इसके अलावा गुफा में शिव-पार्वती के पूरे परिवार व ज्वालामुखी देवी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
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