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डंडाधारी बंदी रक्षकों के भरोसे जेल की सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2016 10:10 PM IST
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जेल
- फोटो : Amarujala
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सूबे में द्वितीय श्रेणी जेल का दर्जा प्राप्त जिला कारागार की व्यवस्था बेपटरी है। जेल की सुरक्षा का जिम्मा डंडाधारी बंदी रक्षकों के जिम्मे है। कारागार में पुुरुष बंदियों के इलाज की व्यवस्था है लेकिन महिला बंदियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। शनिवार को वाराणसी जेल में हुई घटना के बाद अमर उजाला ने रविवार को जेल का जायजा लिया तो हालात खराब मिले।
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जिला जेल की सुरक्षा में तैनात बंदी रक्षकों के पास एक अदद राइफल तक नहीं है। मात्र संतरी के पास एक राइफल है। बंदी रक्षक डंडे से खूंखार बंदियों पर रौब गालिब करते हैं। ऐसे में कभी-कभी उनकी सख्ती उन्हीं को भारी पड़ जाती है। जिला कारागार में निरुद्घ बंदियों के उपचार के लिए जेल में अस्पताल है। अस्पताल में एंबुलेंस भी है। अस्पताल में दो चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट और आठ नर्सिंग स्टाफ तैनात हैं लेकिन महिला बंदियों के इलाज की व्यवस्था नहीं है।
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जेल प्रशासन महिला बंदियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराता है। जेल में महिला और विचाराधीन किशोर बंदियों के लिए अलग-अलग बैरक है। उल्लेखनीय है कि करीब नौ वर्ष पहले 25 जून 2007 की सुबह जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों की शासन के निर्देश पर जेल प्रशासन की ओर से की गई तलाशी के दौरान मिले मोबाइल व सिम कार्ड के विवाद में दो बंदी रक्षकों समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी।
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