{"_id":"615de7c88ebc3e05ad22d498","slug":"court-sultanpur-news-lko59894840","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्राचार्य के हत्यारों को उम्र कैद की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्राचार्य के हत्यारों को उम्र कैद की सजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुल्तानपुर। गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीबी सिंह समेत दोहरे हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने पांचों अभियुक्तों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा मुकर्रर करने के बाद न्यायालय ने पांचों अभियुक्तों को जेल भेज दिया।
करीब 10 वर्ष पहले 23 दिसंबर 2011 को गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीबी सिंह व उनके प्राइवेट गनर सुरेश सिंह की कॉलेज के सामने दिनदहाड़े हत्या के मामले में दीवानी न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम ने सजा सुनाई। अदालत ने पांचों अभियुक्तों जितेंद्र शुक्ल, अनिल मिश्र, सौरभ शुक्ल, दीपक तिवारी व जितेंद्र प्रकाश मिश्र को दोहरे हत्याकांड में उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांचों अभियुक्तों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी ठोंका है।
मामले में सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम अभय श्रीवास्तव ने मंगलवार को पांचों अभियुक्तों को अभिरक्षा में लेकर दोषी मानते हुए सजा सुुना दी थी। उन्हें जेल भी भेज दिया दिया थे। अदालत के आदेश पर बुधवार को पांचों अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में फिर न्यायालय के सामने पेश किया गया। अदालत ने बुधवार को पांचों अभियुक्तों पर सजा मुकर्रर करने का ऐलान किया था। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बचाव पक्ष की ओर से कम सजा देने व अभियोजन पक्ष की ओर से अधिक से अधिक सजा देने का तर्क सुनने के बाद सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद पांचों अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में फिर जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
प्राचार्य की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा बनी काल
मूलत: प्रतापगढ़ जनपद के निवासी डॉ. प्रताप बहादुर सिंह गनपत सहाय पीजी कॉलेज में प्राचार्य के पद पर आयोग से चयनित होकर आए थे। उन्होंने पीजी कॉलेज में सुधार का रास्ता अपनाया था। गलत कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया था। कॉलेज में ही कई विरोधी पैदा हो गए थे। विरोधी उन्हें रास्ते से हटाने में लगे थे। आखिरकार विरोधियों को 23 दिसंबर 2011 की सुबह मौका मिल गया। वे सुबह अपने शहर स्थित आवास से अपने गनर सुरेश सिंह निवासी हमजाबाद थाना जयसिंहपुर के साथ पैदल कॉलेज पहुंचे थे। कॉलेज के गेट पर पहुंचते ही बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं। घटना में उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला। अंत में अपने निजी गनर समेत प्राचार्य मौके पर ही मारे गए। घटना के बाद उनकी पत्नी कोकिला सिंह ने कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
करीब 10 वर्ष पहले 23 दिसंबर 2011 को गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीबी सिंह व उनके प्राइवेट गनर सुरेश सिंह की कॉलेज के सामने दिनदहाड़े हत्या के मामले में दीवानी न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम ने सजा सुनाई। अदालत ने पांचों अभियुक्तों जितेंद्र शुक्ल, अनिल मिश्र, सौरभ शुक्ल, दीपक तिवारी व जितेंद्र प्रकाश मिश्र को दोहरे हत्याकांड में उम्र कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांचों अभियुक्तों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी ठोंका है।
विज्ञापन
मामले में सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम अभय श्रीवास्तव ने मंगलवार को पांचों अभियुक्तों को अभिरक्षा में लेकर दोषी मानते हुए सजा सुुना दी थी। उन्हें जेल भी भेज दिया दिया थे। अदालत के आदेश पर बुधवार को पांचों अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में फिर न्यायालय के सामने पेश किया गया। अदालत ने बुधवार को पांचों अभियुक्तों पर सजा मुकर्रर करने का ऐलान किया था। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बचाव पक्ष की ओर से कम सजा देने व अभियोजन पक्ष की ओर से अधिक से अधिक सजा देने का तर्क सुनने के बाद सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद पांचों अभियुक्तों को कड़ी सुरक्षा में फिर जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन
प्राचार्य की ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा बनी काल
मूलत: प्रतापगढ़ जनपद के निवासी डॉ. प्रताप बहादुर सिंह गनपत सहाय पीजी कॉलेज में प्राचार्य के पद पर आयोग से चयनित होकर आए थे। उन्होंने पीजी कॉलेज में सुधार का रास्ता अपनाया था। गलत कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया था। कॉलेज में ही कई विरोधी पैदा हो गए थे। विरोधी उन्हें रास्ते से हटाने में लगे थे। आखिरकार विरोधियों को 23 दिसंबर 2011 की सुबह मौका मिल गया। वे सुबह अपने शहर स्थित आवास से अपने गनर सुरेश सिंह निवासी हमजाबाद थाना जयसिंहपुर के साथ पैदल कॉलेज पहुंचे थे। कॉलेज के गेट पर पहुंचते ही बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं। घटना में उन्हें बचने का कोई मौका नहीं मिला। अंत में अपने निजी गनर समेत प्राचार्य मौके पर ही मारे गए। घटना के बाद उनकी पत्नी कोकिला सिंह ने कोतवाली नगर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।